मैगसेसे अवॉर्डी बोले- शिमला के लोग भगवान के लाडले, खूब खर्चते हैं पानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजभवन शिमला में संगोष्ठी के दौरान जल पुरुष के नाम से विख्यात मैगसेस अवार्डी डॉ. राजेंद्र सिंह बोले कि शिमला के लोग भगवान के लाडले बेटे हैं। भगवान की कृपा से यहां पानी खूब बरसता है, लेकिन यहां के लोग इसका संग्रहण करने के बजाय इसे खर्च करने पर जोर देते हैं।
इस बारे में सोचे जाने की जरूरत है। उन्होंने अफसोस जताया कि हिमाचल जो देश के दूसरे हिस्सों को पानी देता है, उसकी राजधानी में पानी नहीं होता है। मंगलवार को राजभवन शिमला में डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि मैं आपकी सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि पानी पर समय रहते सोचा जाए। पानी के लिए एक विशेष अभियान चलाए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि राजधानी शिमला समेत हिमाचल के राज्यपाल की आंखों में भी पानी है और वे हिमाचल में पानी का स्तर बढ़वाना चाहते हैं। बारिश के पानी से खेती-बागवानी करें। बारिश का पानी सबसे अच्छा होता है। हिमाचल में एक जल साक्षरता अभियान शुरू किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लिए एक तरह का डिजाइन ठीक नहीं होगा। यहां जल संरक्षण के लिए अलग-अलग डिजाइन बनाने होंगे।
क्या नगर निगम शिमला ने जल संरक्षण की कोई पहल की
डॉ. राजेंद्र सिंह ने पूछा कि शिमला में नगर निगम ने इस बारे में कोई पहल की है। क्या वे अपने पानी को यहां संरक्षित करेंगे। यहां से शुरुआत होगी तो चेतना प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी फैलेगी। शिमला शहर को पानीदार बनाएं। दूसरों का कितना पानी पिया जाएगा। जो पानी आसमान से आता है, उसका संरक्षण किया जाना जरूरी है।
पेयजल संकट से निपटने के लिए देश को दिए ये सुझाव
जलपुरुष के नाम से विश्वविख्यात रमन मैगसेसे अवार्डी डा. राजेंद्र सिंह ने कहा कि देश में पेयजल की समस्या से निपटने के लिए नदियों को लिंक जरूरी नहीं है। नदियों को जोड़ने के बजाय लोगों को नदियों से जोड़ने की जरूरत है।
डा. राजेंद्र सिंह राजभवन शिमला में मंगलवार को जल संरक्षण और प्रबंधन पर सेमीनार में बोल रहे थे। इस सेमीनार का उद्घाटन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया। डा. राजेंद्र सिंह ने पानी की समस्या से निपटने का सूत्र देते हुए कहा कि अगर सूरज की चोरी को रोका जाए तो सब ठीक हो सकता है।
राजस्थान में एक बुजुर्ग ने उन्हें इस मिशन की ओर अग्रसर किया। वहां सीखा कि बारिश के पानी से धरती का पेट कैसे भरा जा सकता है। डा. सिंह बोले - हमें पानी को धरती के तल पर नहीं, धरती के पेट में भरना होगा।
विकास नीति को कांट्रैक्ट ड्राइव से कम्युनिटी ड्राइव की ओर ले जाने की जरूरत है। इस मौके पर प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा का कहना था कि उनकी एजेंसी क्या प्रदेश में साढ़े 1100 करोड़ के बागवानी प्रोजेक्ट में सहयोग करेगी। इस पर डा. राजेंद्र सिंह ने पूर्ण सहयोग करने को कहा।
उन्होंने कहा कि 30 मार्च से चार अप्रैल के बीच हिमाचल के लोग राजस्थान आकर उनके काम को देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि खूब पेड़ लगाएं। फलों के ही खूब बगीचे लगाएं, बारिश खुद होगी।
ये भी रहे मौजूद, सवालों के जवाब दिए
अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि अरविंद मेहता, एचपीयू के वीसी प्रो. एडीएन बाजपेयी, बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक सरयाल, एचपीएमसी के उपाध्यक्ष प्रकाश ठाकुर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद हुए। डा. राजेंद्र सिंह ने मौजूद लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।