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राज्यसभा चुनाव: सुक्खू सरकार को झटका, पहले हुई क्रॉस वोटिंग, फिर पर्ची से जीते भाजपा के हर्ष महाजन

Tue, 27 Feb 2024 11:32 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 27 Feb 2024 11:32 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश की सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार को झटका लगा है। क्रॉस वोटिंग से हर्ष महाजन राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं।

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Rajya Sabha elections result: Shock to Sukhu government, first cross voting took place, then BJP's Harsh Mahaj
जीत के बाद हर्ष महाजन, नेता प्रतिपक्ष जयराम व अन्य जश्न मनाते हुए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्यसभा के चुनाव में हिमाचल प्रदेश की सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार को झटका लगा है। क्रॉस वोटिंग से हर्ष महाजन राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं। कुल 68 विधायकों में से कांग्रेस को 34 और भाजपा को भी 34 विधायकों ने वोट डाला। शाम 5:00 बजे शुरू हुई मतगणना में 34-34 वोट होने के बाद यह नतीजा देर शाम तक अटका रहा। करीब 7:45 बजे पर्ची सिस्टम से भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को विजयी घोषित किया गया। कांग्रेस के प्रत्याशी केंद्रीय नेता अभिषेक मनु सिंघवी यह चुनाव हार गए। गौर हो कि हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की यह एक सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के बतौर राज्यसभा सांसद कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई थी।

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मंगलवार को राज्यसभा सदस्य के लिए मतदान सुबह 9:00 बजे शुरू हो गया। इसके बाद शाम 5:00 बजे मतगणना प्रारंभ हुई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार में वर्तमान में 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 25 विधायक हैं। 3 निर्दलीय विधायक हैं। कांग्रेस के 6 और 3 निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। मतदान के बाद भाजपा के पक्ष में वोट करने वाले कांग्रेस के 6 विधायक और 3 निर्दलीय विधायक सीआरपीएफ और हरियाणा पुलिस के सुरक्षा घेरे में पंचकूला पहुंचाए गए। हिमाचल प्रदेश विधानसभा परिसर में पूरे दिन गहमागहमी रही। बजट सत्र के 11वें दिन की कार्यवाही में इससे गतिरोध बना रहा। 13वें दिन गुरुवार को सरकार को वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट पारित किया जाना है।
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सिंघवी के नाम की निकली पर्ची, विजेता हर्ष घोषित
34-34 मत होने के बाद भाजपा के विधायक कांग्रेस के चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन बबलू का वोट रद्द करने की मांग कर रहे थे। भाजपा का आरोप था कि सरकार ने उन्हें होशियारपुर से लाने के लिए सरकारी हेलिकाप्टर भेजा और उसके बाद शिमला के जुब्बड़हट्टी हवाईअड्डे पर सरकारी गाड़ी से उन्हें लेने गए, जो नियमों के विपरीत है। निर्वाचन आयोग ने भाजपा से इसके सबूत मांगे, जिन्हें भाजपा नेता नहीं दे पाए। इसके बाद आयोग ने पर्ची से विजेता घोषित करने का फैसला लिया। दोनों प्रत्याशियों के नाम की पर्ची डालने के बाद कांग्रेस के प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की पर्ची निकली। नियमों के अनुसार जिसके नाम की पर्ची नहीं निकलती है, उसे विजेता घोषित किया जाता है। इस तरह हर्ष महाजन को विजेता घोषित किया गया।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से भाजपा में आए थे महाजन
कांग्रेस नेता हर्ष महाजन विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर 2022 में ही भाजपा में आए थे। वह पहले कांग्रेस के वरिष्ठ एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के प्रमुख सलाहकारों में एक रहे हैं। पूर्व वीरभद्र सरकार में हर्ष पशुपालन मंत्री भी रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में हर्ष को आगे कर भाजपा ने कांग्रेस सरकार को यह बड़ा झटका दिया है।

कृपाल परमार राज्यसभा सांसद चुने तो भी हुई थी क्रॉस वोटिंग
कृपाल परमार को राज्यसभा सांसद चुना गया तो भी क्रॉस वोटिंग हुई थी। उस वक्त प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व की सरकार थी। उस वक्त वोट को दिखा नहीं सकते थे। यह वर्ष 2000 के वक्त की बात है। पिछले एक अन्य राज्यसभा चुनाव में विधायक कृष्णा मोहिनी ने अपना वोट दिखा दिया था तो वह अवैध करार दिया था। अब वोट दिखाए जा सकते हैं। राज्य में एक बार चौंकाने वाली परिस्थितियों में सरकार गिरने का सियासी घटनाक्रम भी हो चुका है। वर्ष 1998 में जब हिविकां के समर्थन से वीरभद्र सरकार बनी तो उस वक्त निर्दलीय विधायक रमेश धवाला ने समर्थन वापस ले लिया था। उस समय भी कांग्रेस सरकार गिर गई थी और धूमल के  नेतृत्व में सरकार बनी थी। 

जो हिमाचल प्रदेश में कभी नहीं हुआ था, वह हुआ : जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में हर्ष महाजन की ऐतिहासिक जीत हुई है। जो हिमाचल प्रदेश में कभी नहीं हुआ था, वह हुआ है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हृदय से धन्यवाद करते हैं। इनके मार्गदर्शन से प्रदेश हमेशा आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि भाजपा मुकाबले में नहीं थे। सोच रहे थे कि चुनाव लड़े कि नहीं। भाजपा में 25 थे और वे 40 थे। तीन निर्दलीय भी साथ थे। वे डराते रहते थे। उन्होंने तय किया लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत पार्टी का निर्णय आया कि हारना-जीतना चला रहता है। 25 से वे 34 पहुंचे और टाई हो गए। सबने सहयोग दिया, उसके लिए वह आभार जताते हैं। मुख्यमंत्री को अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए। 

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