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उम्मीद की मशालः व्हील चेयर पर बैठे राजू से सफलता की उड़ान भरना सीख रहे युवा

Mon, 08 Jan 2018 03:52 PM IST
कमलेश रतन भारद्वाज, अमर उजाला, मंडी
कमलेश रतन भारद्वाज, अमर उजाला, मंडी Updated Mon, 08 Jan 2018 03:52 PM IST
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raju saklani of mandi is giving tuition to student on wheelchair
एक हादसे के बाद से चलने-फिरने को मोहताज राजू आज दूसरों को सफलता की राह में दौड़ना सिखा रहे हैं। राजू सैन्य अफसर बनना चाहते थे, लेकिन 16 साल पहले एक हादसे ने उन्हें व्हील चेयर पर बैठा दिया। 
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हादसे के बाद हिम्मत हारने के बजाय राजू ने दूसरों के सपने पूरे करते देखना अपना जुनून बना लिया। वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के साथ डिफेंस, बैंकिंग और एसएससी की कोचिंग दे रहे हैं। गरीब बच्चों को वे मुफ्त पढ़ाते हैं। 
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उनसे कोचिंग लेकर अभी तक 40 से अधिक युवा सरकारी नौकरी कर रहे हैं। चार बच्चों से शुरुआत करने वाले राजू के पास आज 40 से अधिक बच्चे ट्यूशन और कोचिंग ले रहे हैं। हसन सकलानी उर्फ राजू जिला मुख्यालय मंडी से महज 10 किमी दूर चौहाटा गांव के रहने वाले हैं। 
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कॉलेज समय के दौरान दोस्तों के साथ खड्ड में नहाते समय पत्थर से टकराकर राजू अपंग हो गए थे। वे 16 साल से व्हील चेयर पर हैं। चल-फिर तो नहीं सकते, लेकिन जिंदगी की दौड़ में जिंदादिली के साथ दौड़ रहे हैं। इस हादसे के बाद उनकी बीएससी प्रथम वर्ष में पढ़ाई छूट गई थी।
 

जख्म के बाद मिले सम्मान से खुश राजू

raju saklani of mandi is giving tuition to student on wheelchair

वे नौवीं से 12वीं तक ट्यूशन के साथ डिफेंस, बैंकिंग, एसएससी की कोचिंग दे रहे हैं। कुछ गरीब बच्चे और दूरदराज से आने वाले तो राजू के पास ही घर में रह जाते हैं। दो से तीन माह तक कोचिंग के दौरान बच्चे फीस के बजाय उनकी देखभाल करते हैं।

इन दिनों आर्मी की लिखित परीक्षा के 15 युवाओं के बैच को राजू कोचिंग दे रहे हैं। इनमें एक युवा राजू के घर में ही रहता और गुरु दक्षिणा के रूप में गुरु की देखभाल करता है। राजू ज्योतिष शास्त्र के भी ज्ञाता हैं।

जमा दो पास राजू के पास कुंडली दिखाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। उन्होंने ज्योतिष शास्त्र की कोई विशेष पढ़ाई नहीं की, लेकिन सीखने की ललक के चलते इंटरनेट से और किताबों को पढ़कर राजू ज्योतिष शास्त्र में निपुण हो गए हैं।

हसन सकलानी उर्फ राजू का जन्म वर्ष 1981 में शेष कुमार और माता उर्मिला देवी के घर हुआ। दादी संतों देवी के लाडले राजू परिवार के इकलौते चिराग हैं। बहन बनिता की शादी हो चुकी है। \

परिवार आर्थिक रूप से तो तंग नहीं है, लेकिन आर्मी में अफसर बनने का सपना देखने वाले राजू आज कुदरत के दिए जख्मों से लड़ कर युवाओं को योग्य बना रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में कहा कि चार बच्चों से कोचिंग की शुरुआत की थी। आज संख्या 40 पार हो गई है। कहते हैं कि युवाओं के जुनून को रास्ता दिखाना ही अब जिंदगी का लक्ष्य है। 

हॉफ मैराथन सम्मान समारोह में डीएसपी ने आने का दिया न्योता 

raju saklani of mandi is giving tuition to student on wheelchair

हॉफ मैराथन कार्यक्रम के सम्मान समारोह के लिए डीएसपी हितेश लखनपाल ने फोन पर आने का न्योता दिया। आज तक कभी किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। जब डीएसपी लखनपाल ने युवाओं को प्रेरित करने की बात कही तो मुझे हठ तोड़ना पड़ा।

कुदरत से मिले जख्म के बाद पहली दफा मिले सम्मान से बेहद खुश हूं। गरीब बच्चों से न ट्यूशन के पैसे लेता हूं न ही कोचिंग के। हां संपन्न अभिभावक और युवा जरूर ट्यूशन के पैसे देते हैं, लेकिन मेरा लक्ष्य पैसे नहीं युवा जनून को राह दिखाना है। सम्मान समारोह में उनके चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी।

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