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ब्रॉडगेज नहीं होंगे हिमाचल के दोनों नैरोगेज रेल ट्रैक: पीयूष गोयल

Mon, 03 Dec 2018 12:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला Updated Mon, 03 Dec 2018 12:00 PM IST
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railway minister Piyush Goyal statement on railway tracks in himachal pradesh

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि शिमला-कालका और पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज ट्रैक देश की ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इसलिए इन्हें नैरोगेज से ब्रॉडगेज नहीं किया जाएगा। इनका विस्तारीकरण कर छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। धर्मशाला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मौजूदगी में प्रेसवार्ता में रेल मंत्री ने कहा कि दोनों रेल लाइनों की पुरानी पटरियां बदली जाएंगी।

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पुरानी गाड़ियों को भी बदल कर नए कोच चलाए जाएंगे। इसके लिए उन्होंने आज ही रेलवे बोर्ड और कोच फैक्टरी प्रबंधन से फोन से बात कर योजना बनाने के निर्देश दे दिए हैं। इसके लिए उन्होंने बोर्ड को 100 दिन का समय दिया है। 
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रेल मंत्री ने कहा कि दोनों नैरोगेज ट्रैक पर चलने वाली गाड़ियों की गति में सुधार किया जाएगा। शिमला-कालका की तर्ज पर पठानकोट-जोगिंद्रनगर ट्रैक पर भी विस्ताडोम (पारदर्शी कोच) चलाए जाएंगे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। गौरतलब है कि नैरोगेज ट्रैक पर अभी 20-22 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों को पहले 35 और फिर 50 किलोमीटर प्रतिघंटा दौड़ाने की तैयारी है। 
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छह घंटे में पहुंचेंगे पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक 
पठानकोट-जोगिंद्रनगर ट्रैक पर गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी। यात्री नौ के बजाय छह घंटे में यह सफर पूरा कर सकेंगेे। इस ट्रैक के 17 स्टेशनों में चरणबद्ध फ्री वाईफाई सुविधा होगी। कांगड़ा स्टेशन का जीर्णोद्धार होगा। सभी स्टेशनों पर शौचालय और एलईडी लाइट्स की सुविधा होगी। विदेशों की तर्ज पर पर्यटकों को अत्याधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी। 

स्टीम इंजन में पिकनिक का मजा ले सकेंगे स्कूली बच्चे

railway minister Piyush Goyal statement on railway tracks in himachal pradesh

रेल मंत्री ने कहा कि स्कूली बच्चों को पिकनिक के लिए पालमपुर से बैजनाथ तक स्टीम इंजन चलाने की योजना है। इससे बच्चों का मनोरंजन तो होगा कि वे ट्रैक के बारे में भी जान सकेंगे।  

जोगिंद्रनगर-पठानकोट ट्रैक का रेल मंत्री ने किया हवाई सर्वे
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ सतलुज नदी पर बने कौल डैम का हेलीकॉप्टर से निरीक्षण किया। उसके बाद जोगिंद्रनगर से कांगड़ा तक रेल ट्रैक और गोपालपुर के चिड़ियाघर का हवाई जायजा लिया। सर्वे के बाद धर्मशाला स्थित होटल द पवेलियन में उत्तर रेलवे फिरोजपुर मंडल के अधिकारियों से बैठक की।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस रेलवे ट्रैक के सुधार पर पूर्व सरकारों ने कोई काम नहीं किया। शिमला-कालका, पठानकोट- जोगिंद्रनगर ट्रैक को अंग्रेजों के बाद कोई आगे नहीं बढ़ा पाया।

शिमला-कालका ट्रैक पर कल होगा ट्रायल
शिमला-कालका ट्रैक पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके लिए चार दिसंबर को ट्रायल होगा।

बॉलीवुड कलाकारों को यहां भेजेंगे शूटिंग करने
केंद्रीय मंत्री ने कहा मुंबई से हूं, बॉलीवुड कलाकारों को विदेश में शूटिंग करने की बजाय यहां आने के लिए वह उन्हें प्रेरित करेंगे। 

केंद्रीय बजट में नहीं होगी बड़ी घोषणा  
रेल मंत्री ने कहा कि चुनावी वर्ष होने के कारण आगामी वर्ष के आम बजट में रेलवे मंत्रालय में कोई बड़ी योजना की घोषणा नहीं होगी।

करोड़ों की गड़बड़ियों के बाद बंद किया रेल बजट : गोयल

railway minister Piyush Goyal statement on railway tracks in himachal pradesh

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने रेल मंत्रालय का राजनीतिक तौर पर प्रयोग किया। कांग्रेस सरकार एक कार्यकाल में रेलवे के नए प्रोजेक्ट की घोषणा करती थी तो दूसरे में सर्वे का काम शुरू करती थी। 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐसे सैकड़ों प्रोजेक्टों को खंगाला, जिन पर कई करोड़ रुपये बजट खर्च हो गया था लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। इसके चलते मोदी सरकार ने रेल बजट को आम बजट में ही जोड़ दिया, ताकि रेल बजट पर राजनीति न हो। पिछले साढे़ चार साल में रेलवे में 2.5 गुणा निवेश बढ़ा है।

भानुपल्ली-लेह रेल लाइन के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह ट्रैक देश की सुरक्षा से जुड़ा है। इसके लिए रेलवे और रक्षा मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। अभी इस लाइन के सर्वे के लिए बजट जारी किया है। उन्होंने कहा कि देश में रेलवे विद्युतीकरण की ओर बढ़ रहा है। अभी तक देश में 709 रेवले स्टेशनों को वाईफाई से लैस कर दिया है। इसके अलावा रेलवे हादसों में कमी और सुरक्षा को बढ़ाया दिया जा रहा है। 

विपिन चौधरी, धर्मशाला। सन 1926 से शुरू हुई पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेल लाइन के ब्राडगेज बनने का सपना अब साकार नहीं होगा। पिछले करीब 93 साल से पठानकोट-जोगिंद्रनगर ट्रैक पर दौड़ रही छुक-छुक को तेज गति नहीं मिलेगी। इस रेलवे ट्रैक को ब्राडगेज करने के सारे दावों पर केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने विराम लगा दिया है। इसके चलते अब इस रेलवे ट्रैक पर बड़ी और सुपरफास्ट ट्रेनों के गुजरने का सपना साकार नहीं होगा। 

जानकारी के अनुसार करीब 93 साल पहले 1926 में पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे लाइन का कार्य कर्नल बैदी ने शुरू करवाया था। 164 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक में 950 के करीब छोटे-बड़े पुल हैं, जबकि दो सुरंगें और 34 स्टेशनों से होकर यह ट्रेन अपना सफर पूरा करती है। पहली अप्रैल, 1929 को पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक पर पहली भाप से चलने वाली रेल गाड़ी दौड़ी थी।

1972 में पौंग डैम के कारण इसके ट्रैक को बदलने का कार्य शुरू हुआ, जिसके चलते करीब 6 साल तक जोगिंद्रनगर तक रेलगाड़ी नहीं पहुंच सकी। 1978 में नया ट्रैक बनने के बाद सात ट्रेनें पठानकोट से जोगिंद्रनगर पहुंचनी शुरू हुईं। लेकिन बरसात के दौरान इस 164 किलोमीटर में कहीं-कहीं ल्हासे गिरने के कारण कई बार ट्रेनों को पठानकोट से जवाली स्टेशन से वापस मोड़ दिया जाता है। मौजूदा समय में इस ट्रैक पर केवल चार ट्रेनें ही दौड़ रही हैं।  

रेल ट्रैक कई बार बना चुनावी मुद्दा 
पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक कई बार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मुद्दा बना है। इस ट्रैक को ब्राडगेज करवाने के लिए दो बार सर्वे भी किया जा चुका है। इसके अलावा कांगड़ा-चंबा के सांसद शांता कुमार इस ट्रैक को ब्राडगेज करने की बात करते आए हैं। लेकिन अब रेलवे मंत्री के बयान के बाद इस चुनावी मुद्दे पर भी विराम लग जाएगा।

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