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पटरी पर दौड़ा 108 साल पुराना स्टीम इंजन
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 28 Dec 2014 12:24 PM IST
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रेलवे का 108 साल पुराना इतिहास ‘स्टीम लोकोमोटिव इंजन’ एक बार फिर ट्रैक पर दौड़ा। ट्रायल के लिए स्टीम इंजन को शिमला से तारादेवी तक चलाया गया। उत्तर रेलवे के एजीएम की देखरेख में स्टीम इंजन का सफल ट्रायल किया गया। रेलवे के अधिकारियों की टीम ने ओल्ड बस स्टैंड के पास स्थित बाबा भलखू रेल संग्रहालय का भी निरीक्षण किया गया।
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रेलवे स्टेशन से तारादेवी की ओर शाम 4:50 पर स्टीम इंजन रवाना किया गया। स्टीम इंजन को देखने के लिए स्थानीय लोग और सैलानी खासे उत्साहित दिखे। इंजन के प्लेटफार्म पर पहुंचते ही लोगों को यहां जमावड़ा लग गया। लोगों ने अपने कैमरों से दिल खोलकर स्टीम इंजन की फोटो लीं।
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पिस्टन से निकली ‘छुक-छुक’ की आवाज
स्टीम इंजन के पहुंचते ही प्लेटफार्म छुक-छुक की आवाज से गूंज उठा। रेल का पर्याय मानी जाने वाली छुक-छुक की आवाज स्टीम इंजन से ही निकलती है।
स्टीम इंजन का इतिहास आंकड़ों की जुबानी
-108 साल पुराना है केसी-520 स्टीम लोकोमोटिव इंजन
-1905 में अंग्रेजों ने शिमला से कैथलीघाट के बीच चलाया
-1971 के बाद 30 सालों तक वर्कशॉप में खड़ा रहा
-2001 में दोबारा बनाकर तैयार किया गया
-41 टन है इंजन का वजन
-80 टन तक खींचने की क्षमता