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हिमाचल के 250 करोड़ डकार रहा है पंजाब

Fri, 19 Dec 2014 04:08 PM IST
Updated Fri, 19 Dec 2014 04:08 PM IST
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punjap earning 250 crore from himachal shanan project.

ब्रिटिश काल में करीब सौ साल पहले एक परियोजना पर हुए समझौते के विवाद ने वीरवार को लोकसभा में दस्तक दी है। विवाद का कारण वर्ष 1925 में मंडी के राजा जोगेंद्र सेन बहादुर और ब्रिटिश सरकार के बीच जोगिंद्रनगर में 48 मेगावाट की शानन जल विद्युत परियोजना के लिए हुआ समझौता है।

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समझौते के तहत 1933 से ही इस परियोजना पर पंजाब को अधिकार मिला है। आजादी के बाद राष्ट्रपति की ओर से अधिसूचना जारी कर ब्रिटिश सरकार और राजा-महाराजाओं के साथ समझौते को रद्द करने के बावजूद इस पर पंजाब का अधिकार बदस्तूर जारी है।
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परियोजना के लिए अनुबंध 99 वर्ष का था, इसलिए पंजाब 2024 से पहले इस पर अपना अधिकार नहीं छोड़ना चाहता।

सांसद रामस्वरूप शर्मा ने उठाया मामला

punjap earning 250 crore from himachal shanan project.

अब मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठा कर इस परियोजना को हिमाचल प्रदेश को सौंपने की मांग की है। बकौल शर्मा इससे पंजाब हर साल 250 करोड़ रुपये का लाभ कमा रहा है, मगर रत्ती भर भी राशि क्षेत्र के विकास या पर्यावरण की सुरक्षा पर खर्च नहीं कर रहा।

इसे ब्रिटिश कार्यकाल में राजा-महाराजा के साथ हुए समझौते का इकलौता मामला माना जा रहा है। शर्मा ने सवाल उठाया कि राष्ट्रपति की अधिसूचना के बावजूद पंजाब का अधिकार कैसे कायम रह गया?

यह भी पूछा कि हिमाचल की परियोजना पर पंजाब कैसे हक जमाए रह सकता है, जबकि वह इससे मिल रहे लाभ का इस्तेमाल सिर्फ अपने राज्य के लिए कर रहा है?

हिमाचल को हो रहा नुकसान

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इस दौरान शर्मा ने बताया कि इस परियोजना के टनलों में न केवल दरारें आ रही हैं जो नुकसान पहंचा सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही संयंत्र की मरम्मत नहीं की गई तो बस्सी और ऊहल परियोजना के सामने समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने निरीक्षण टीम भेजने की मांग की।

गौरतलब है कि शानन परियोजना जब वर्ष 1933 में शुरू हुई तब यहां महज 66 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था। वर्ष 1982 में इसमें एक और टरवाइन लगा कर इसकी उत्पादन क्षमता 110 मेगावाट कर दी गई।

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