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किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ प्रदेश भर में प्रदर्शन
Mon, 14 Dec 2020 05:13 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 14 Dec 2020 05:13 PM IST
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हिमाचल में प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
किसान संगठनों के देशव्यापी आह्वान पर हिमाचल किसान सभा, सीटू, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एसएफआई, दलित शोषण मुक्ति मंच ने तीन किसान विरोधी कानूनों व बिजली संशोधन विधेयक 2020 को लेकर सोमवार को प्रदेश भर में प्रदर्शन किए। शिमला, रामपुर, रोहड़ू, ठियोग, निरमंड, करसोग, सोलन, परवाणू, दाड़लाघाट, नाहन, पांवटा साहिब, मंडी, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, जंजैहली, कुल्लू, आनी, सैंज, चंबा, चुवाड़ी, धर्मशाला, पालमपुर, हमीरपुर, ऊना में कई लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए।
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किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर, महासचिव डॉ. ओंकार शाद, सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, महिला समिति प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रीना सिंह, सचिव फालमा चौहान, डीवाईएफआई प्रदेशाध्यक्ष अनिल मनकोटिया, सचिव चंद्रकांत वर्मा, एसएफआई प्रदेशाध्यक्ष रमन थारटा, सचिव अमित ठाकुर, दलित शोषण मुक्ति मंच संयोजक जगतराम, सह संयोजक आशीष कुमार, आल इंडिया लॉयरज यूनियन प्रदेशाध्यक्ष पुनीत धांटा व सचिव अशोक वर्मा ने एलान किया कि अगर केंद्र सरकार ने किसान कानूनों व बिजली विधेयक 2020 को रद्द न किया तो हिमाचल की जनता भी दिल्ली कूच करेगी।
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उन्होंने जनता से अंबानी व अडानी के उत्पादों का पूर्ण बहिष्कार करने की अपील की है। कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाना चाहती है। तीनों नए कृषि कानून पूर्णतया किसान विरोधी हैं। किसानों की फसलों को कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिये विदेशी और देसी कंपनियों और बड़ी पूंजीपतियों के हवाले करने की साजिश रची जा रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के कानून को खत्म करने से जमाखोरी, कालाबाजारी व मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलेगा। कृषि कानूनों के बदलाव से बड़े पूंजीपतियों और देसी- विदेशी कंपनियों का कृषि पर कब्जा हो जाएगा।
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