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Shimla News: शहर में छह फीसदी तक बढ़ सकता है संपत्ति कर, टैक्स चोरों की ढीली होगी जेब

Sun, 22 Feb 2026 11:51 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:51 PM IST
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property tax to be increase
नगर निगम ने शुरू की कवायद, अप्रैल से जारी होने हैं टैक्स के बिल, बीते साल सात फीसदी बढ़ा था टैक्स
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शहर में 32507 भवनमालिक, टैक्स चोरी में पकड़े जाने वाले भवनमालिकों से वसूला जाएगा पुराना बिल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के 32 हजार से ज्यादा भवनमालिकों को इस साल छह फीसदी ज्यादा संपत्ति कर चुकाना पड़ सकता है। बजट घोषणा के अनुसार नगर निगम ने टैक्स की दरों में संशोधन को लेकर कवायद शुरू कर दी है। अप्रैल से टैक्स के बिल जारी किए जाएंगे।
नगर निगम के अनुसार राज्य के सकल घरेलू उत्पाद यानि की जीडीपी की दर के अनुसार टैक्स के बिल जारी होंगे। मार्च में इस पर स्थिति स्पष्ट होगी कि प्रदेश में विकास दर कितनी रही है। अभी अनुमान है कि छह से सात फीसदी के आसपास यह दर रह सकती है, इसलिए टैक्स की दर भी इसके अनुसार ही बढ़ेगी। बीते साल करीब सात फीसदी टैक्स बढ़ोतरी हुई थी। शहर में कुल 32507 भवनमालिक हैं जो नगर निगम को टैक्स देते हैं। नगर निगम हर साल संपत्ति कर वसूलता है। नगर निगम के अनुसार केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राज्य की जीडीपी के अनुसार आगामी वित्त वर्ष में संपत्ति कर को बढ़ाया जाता है। इस बार राज्य सरकार की जीडीपी की दर पिछले वर्ष की तुलना में कम रह सकती है। ऐसे में यह संपत्ति कर लोगों पर छह फीसदी तक ही बढ़ाया जा सकता है। नगर निगम लोगों से टैक्स वसूलने के बाद जमा हुई राशि को शहर में सफाई व्यवस्था, सड़क मरम्मत जैसी मूलभूत सुविधाओं पर खर्च करता है।
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शहर में भवन का आकार और इस्तेमाल गलत बताने वाले भवनमालिकों की जेब इस बार ढीली होने वाली है। निगम इनसे पिछले कई साल का टैक्स वसूलने जा रहा है। इस साल करीब चार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ने का टारगेट रखा गया है। इसके लिए ड्रोन आधारित जीआईएस मैपिंग और संपत्तियों सर्वेक्षण 34 वार्डों में किया जा रहा है। नगर निगम का दावा है कि अब तक करीब 30 वार्डों में यह काम पूरा हो गया है। निगम के अनुसार इस सर्वेक्षण में बिल्डिंग फुट प्रिंटस, सड़क/स्ट्रीट मैपिंग, भूमि उपयोग/ लैंड कवर आदि की मैपिंग की जा रही है। सर्वे में आए डाटा को टैक्स शाखा सत्यापन कर रहा है। इसके बाद उसे केंद्र के उपयोग प्लेटफार्म के तहत विकसित सॉफ्टवेयर में एकीकृत किया जा रहा है। नगर निगम के अनुसार अब तक 22 हजार संपत्तियों का सत्यापन इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जा चुका है। बाकी संपत्तियों का सत्यापन 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा।
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