Himachal: नए खुले और अपग्रेड कार्यालयों में हुईं पदोन्नतियों की भी होगी समीक्षा, सरकार ने तैयार की सूची
कोविड की चपेट में आने के बाद क्वारंटीन अवधि के दौरान भी विभागीय कार्यों पर मुख्यमंत्री की पैनी नजर है। वह मुख्य सचिव के अलावा वित्त, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता जैसे विभागों के प्रशासनिक सचिवों से भी रोजाना विभागीय फीडबैक ले रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में पूर्व सरकार की ओर से 1 अप्रैल 2022 के बाद नए खोले और अपग्रेड कार्यालयों में तैनाती देने के लिए की गई अफसरों की पदोन्नतियों की भी समीक्षा होगी। डिनोटिफाई हुए करीब 350 कार्यालयों में अफसरों की पदोन्नितयों से अधिकांश पद भरे गए हैं। पूर्व की भाजपा सरकार पर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार ऐेसे कई कार्यालयों की सूची बन गई है, जिन्हें सिर्फ एक या दो अफसरों को पदोन्नत करने के लिए खोला गया है। कार्यालय को चलाने के लिए आवश्यक स्टाफ के पद तक सृजित नहीं किए गए हैं। औपचारिकता के नाम पर कुछ कार्यालयों में आसपास के क्षेत्रों से कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। अब ऐसी पदोन्नतियों की भी समीक्षा की जाएगी। मंत्रिमंडल का गठन होते ही विभागों के अनुसार ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा। नियमों के अनुसार पदोन्नत हुए अधिकारियों को जरूरत और रिक्त चल रहे पदों वाले कार्यालयों में भेजा जाएगा। जिन अधिकारियों की नियमों के विपरीत पदोन्नतियां हुई होंगी, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली से शीर्ष अधिकारियों को रोजाना दिशा-निर्देश दे रहे सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू नई दिल्ली से सरकार के शीर्ष अधिकारियों को प्रशासनिक कामकाज को लेकर नई दिल्ली से ही लगातार दिशा-निर्देश दे रहे हैं। कोविड की चपेट मेें आने के बाद क्वारंटीन अवधि के दौरान भी विभागीय कार्यों पर मुख्यमंत्री की पैनी नजर है। वह मुख्य सचिव के अलावा वित्त, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता जैसे विभागों के प्रशासनिक सचिवों से भी रोजाना विभागीय फीडबैक ले रहे हैं। पिछले दिनों सीमेंट उद्योगों में उपजे विवाद को लेकर वह लगातार मुख्य सचिव आरडी धीमान से संपर्क में थे। इन दिनों वित्तीय वर्ष 2023-24 के वार्षिक बजट के अनुमानों को तैयार किया जा रहा है। इस संबंध में वह लगातार मुख्य सचिव से संपर्क साधे हुए हैं। इन दिनों नया बजट तैयार करने के लिए विभागीय बैठकों के दौर चले हुए हैं। सुक्खू चाहते हैं कि आगामी बजट को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, कर्मचारी जैसे विषयों पर केंद्रित किया जाए। सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में उन्होेंने बेसहारा बच्चों के लिए एक नीति तैयार करने को कहा है। इसी तरह से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी एक समग्र नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि स्वास्थ्य उपचार के लिए यहां के लोगों को राज्य से बाहर न जाना पडे़।
बिना बजट प्रावधान खुले कार्यालयों को बंद करने का फैसला सराहनीय : वीरेंद्र
प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ और प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि कांग्रेस सरकार की ओर से पूर्व सरकार के छह महीनों के निर्णयों की समीक्षा करना जनहित एवं कर्मचारी हित में लिया गया सराहनीय कदम है। संघ इस फैसले की सराहना करता है। कहा कि भाजपा सरकार ने अंतिम छह महीनों में बिना किसी बजट का प्रावधान किए राजनीतिक फायदा लेने के लिए धड़ल्ले से संस्थानों व कार्यालयों को खोलने व स्थानांतरण करने का बिना सोचे समझे काम किया। इसमें न तो किसी तरह की व्यवस्था को तैयार किया गया और न ही बजट का प्रावधान किया गया। इस प्रक्रिया के चलते न तो पहले से कार्यरत संस्थान सही तरीके से काम कर पाए और न ही नए खोले गए कार्यालय एवं संस्थानों को सही तरीके से चलाया जा सका। इससे एक और जहां कर्मचारी पसोपेश की स्थिति में रहे वही सरकारी कार्य भी बाधित रहे। चौहान ने कहा कि सरकार ने अनगिनत ऐसे संस्थानों को खोला और स्तरोन्नत किया जिसका कोई औचित्य नहीं था।
बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने 32 कार्यालय बंद करने का किया स्वागत
राज्य बिजली बोर्ड की कर्मचारी यूनियन ने 32 कार्यालय बंद करने का स्वागत किया है। वीरवार को यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर दत्त शर्मा की अध्यक्षता में शिमला में हुई बैठक इस फैसले के लिए कांग्रेस सरकार का आभार जताया गया। अध्यक्ष कामेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले बिजली बोर्ड में राजनीतिक दृष्टिकोण से इन कार्यालयों को खोला था। यूनियन की बैठक में बिजली बोर्ड में कर्मचारियों की घटती संख्या पर चिंता जताई गई। प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि बोर्ड में विभिन्न श्रेणियों के लगभग 8,500 पद खाली पड़े हैं। बिजली बोर्ड गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने से बोर्ड के ऊपर बिना किसी जरूरत के अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। करीब 1800 करोड़ रुपये की लागत से पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदलने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर की टेंडर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूनियन इन सभी मसलों से नवनिर्वाचित प्रदेश सरकार को भी अवगत कराएगी।