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Shimla News: तारादेवी हरित क्षेत्र से बाहर हो निजी जमीन
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खास खबर...
लोगों ने मांगी निर्माण कार्य में छूट
अप्रैल में होगी लोगों की आपत्तियों पर सुनवाई
सरकार ने तारादेवी क्षेत्र को ग्रीन एरिया बनाने का लिया है फैसला
स्थानीय लोगों ने इस पर टीसीपी को भेजी आपत्तियां
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के तारादेवी क्षेत्र को ग्रीन एरिया बनाने के सरकार के फैसले पर स्थानीय लोगों ने अपनी आपत्तियां टीसीपी विभाग को सौंप दी हैं। लोगों का कहना है कि रिहायशी क्षेत्र को ग्रीन एरिया से बाहर रखा जाए।
लोगों के सौंपे सुझावों पर अब अप्रैल में सुनवाई शुरू करने की तैयारी है। टीसीपी विभाग के पास आठ से ज्यादा आपत्तियां और सुझाव आए हैं। विभाग ने इस क्षेत्र को ग्रीन एरिया बनाने के प्रस्ताव पर फरवरी में स्थानीय लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगें थे। इसके लिए एक महीने का समय दिया था। यह समयावधि अब खत्म हो चुकी है। तारादेवी क्षेत्र में ज्यादातर ग्रीन एरिया है। यहां कुछेक छोटे-छोटे रिहायशी इलाके हैं। बढ़ई पंचायत का तारव गांव और मंदिर क्षेत्र भी इसका हिस्सा है। शोघी और आनंदपुर के पास भी कुछेक रिहायशी क्षेत्र इस ग्रीन एरिया से सटे हैं।
क्षेत्र के लोगों के पास काफी निजी जमीन है। इनका कहना है कि मलकीयत पर होने वाले निर्माण पर कोई पाबंदी न हो। सरकार वन क्षेत्र में निर्माण पर पाबंदी लगाए लेकिन निजी जमीन पर शर्तें सख्त न हों। अब विभाग जनता से मिले इन आपत्तियों और सुझावों पर सुनवाई करेगा। नियमानुसार तीन माह के भीतर इन आपत्तियों का निपटारा होता है। विधानसभा के चलते मार्च में इन पर सुनवाई नहीं हो पाएगी। ऐसे में अप्रैल में ही इस पर फैसला होगा।
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ग्रीन एरिया में सबसे सख्त हैं निर्माण शर्तें
ग्रीन एरिया में निर्माण की शर्तें सबसे ज्यादा सख्त हैं। इस क्षेत्र में हर तरह के नए निर्माण के लिए संबंधित विभाग से मंजूरी लेना अनिवार्य है। भवनों के मरम्मत कार्य भी विभाग से अनुमति लेकर ही हो पाएंगे। लोगों को ओल्ड लाइन पर ही भवन निर्माण की मंजूरी मिलती है। राजधानी में नगर निगम और टीसीपी क्षेत्र को मिलाकर अब कुल 26 ग्रीन एरिया बन गए हैं। बीते साल तक 17 ग्रीन एरिया थे। इसके बाद सरकार ने समरहिल, आंदड़ी, मशोबरा समेत आठ नए ग्रीन क्षेत्र चिह्नित कर इनमें निर्माण की शर्तें सख्त कर दीं। अब तारादेवी को ग्रीन एरिया बनाया जा रहा है। शिमला शहर के आसपास हरे भरे जंगलों को बचाने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।
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लोगों ने मांगी निर्माण कार्य में छूट
अप्रैल में होगी लोगों की आपत्तियों पर सुनवाई
सरकार ने तारादेवी क्षेत्र को ग्रीन एरिया बनाने का लिया है फैसला
स्थानीय लोगों ने इस पर टीसीपी को भेजी आपत्तियां
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के तारादेवी क्षेत्र को ग्रीन एरिया बनाने के सरकार के फैसले पर स्थानीय लोगों ने अपनी आपत्तियां टीसीपी विभाग को सौंप दी हैं। लोगों का कहना है कि रिहायशी क्षेत्र को ग्रीन एरिया से बाहर रखा जाए।
लोगों के सौंपे सुझावों पर अब अप्रैल में सुनवाई शुरू करने की तैयारी है। टीसीपी विभाग के पास आठ से ज्यादा आपत्तियां और सुझाव आए हैं। विभाग ने इस क्षेत्र को ग्रीन एरिया बनाने के प्रस्ताव पर फरवरी में स्थानीय लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगें थे। इसके लिए एक महीने का समय दिया था। यह समयावधि अब खत्म हो चुकी है। तारादेवी क्षेत्र में ज्यादातर ग्रीन एरिया है। यहां कुछेक छोटे-छोटे रिहायशी इलाके हैं। बढ़ई पंचायत का तारव गांव और मंदिर क्षेत्र भी इसका हिस्सा है। शोघी और आनंदपुर के पास भी कुछेक रिहायशी क्षेत्र इस ग्रीन एरिया से सटे हैं।
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क्षेत्र के लोगों के पास काफी निजी जमीन है। इनका कहना है कि मलकीयत पर होने वाले निर्माण पर कोई पाबंदी न हो। सरकार वन क्षेत्र में निर्माण पर पाबंदी लगाए लेकिन निजी जमीन पर शर्तें सख्त न हों। अब विभाग जनता से मिले इन आपत्तियों और सुझावों पर सुनवाई करेगा। नियमानुसार तीन माह के भीतर इन आपत्तियों का निपटारा होता है। विधानसभा के चलते मार्च में इन पर सुनवाई नहीं हो पाएगी। ऐसे में अप्रैल में ही इस पर फैसला होगा।
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ग्रीन एरिया में सबसे सख्त हैं निर्माण शर्तें
ग्रीन एरिया में निर्माण की शर्तें सबसे ज्यादा सख्त हैं। इस क्षेत्र में हर तरह के नए निर्माण के लिए संबंधित विभाग से मंजूरी लेना अनिवार्य है। भवनों के मरम्मत कार्य भी विभाग से अनुमति लेकर ही हो पाएंगे। लोगों को ओल्ड लाइन पर ही भवन निर्माण की मंजूरी मिलती है। राजधानी में नगर निगम और टीसीपी क्षेत्र को मिलाकर अब कुल 26 ग्रीन एरिया बन गए हैं। बीते साल तक 17 ग्रीन एरिया थे। इसके बाद सरकार ने समरहिल, आंदड़ी, मशोबरा समेत आठ नए ग्रीन क्षेत्र चिह्नित कर इनमें निर्माण की शर्तें सख्त कर दीं। अब तारादेवी को ग्रीन एरिया बनाया जा रहा है। शिमला शहर के आसपास हरे भरे जंगलों को बचाने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।