फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Priorities of public interest forgotten by minister and MLA in himachal

जनहित की प्राथमिकताएं भूले मंत्री और विधायक

Tue, 05 Mar 2019 10:47 AM IST
ashok chauhan सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Tue, 05 Mar 2019 10:47 AM IST
विज्ञापन
Priorities of public interest forgotten by minister and MLA in himachal
कुछ विधायक भूल गए या फिर तय ही नहीं कर पाए कि जनहित की किन-किन योजनाओें को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करें, ये तो वही जानें। मगर बजट बुक के खाली पन्ने बताते हैं कि कुछ मंत्रियों समेत डेढ़ दर्जन विधायकों से यह चूक हुई है।
विज्ञापन


अधिकतर को राज्य सरकार के योजना विभाग ने रिमाइंडर भेजे हैं। ये अपने विधानसभा हलकों की अगले वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताएं नहीं दे पाए। ये प्राथमिकताएं सड़कों-पुलों, पेयजल और सिंचाई की देनी होती हैं। ऐसे में सरकार को विधायकों की अज्ञात प्राथमिकताओं के लिए 25-25 हजार रुपये का टोकन बजट डालना पड़ा है। 
विज्ञापन

स्कीमों के कॉलम खोजते रहे लोग

Priorities of public interest forgotten by minister and MLA in himachal

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बीते 9 फरवरी को अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 का बजट पेश किया और हिमाचल विधानसभा ने इसे 18 फरवरी को पारित कर दिया। इसके बाद बजट बुक भी छपकर आई।

इसमें कई लोग अपने-अपने हलकों की रियली न्यू स्कीमों और ओनगोइंग स्कीमों के कॉलम खोजते रहे, मगर उन्हें अपने यहां की योजनाएं इनमें नहीं मिलीं। हिमाचल प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों के एमएलए को ये स्कीमें बजट बुक में डालनी होती हैं।

इनमें रियली न्यू स्कीमों और ऑनगोइंग स्कीमों के खातों में दो-दो योजनाएं सड़कों, दो-दो पेयजल और दो-दो सिंचाई की योजनाओं रहती हैं। बजट सत्र शुरू होने से पहले ही उनसे ये योजनाएं मांग ली गई थीं।

इन विधानसभा हलकों के विधायकों ने नहीं दीं प्राथमिकताएं

Priorities of public interest forgotten by minister and MLA in himachal

भटियात, चुराह, कसुम्पटी, फतेहपुर, जसवां-परागपुर, नादौन, बड़सर, नूरपुर, जोगिंद्रनगर, कुल्लू, कसौली, मंडी, धर्मपुर, जुब्बल-कोटखाई, ठियोग, शिमला आदि। इनमें से कई हलकों से एक भी प्राथमिकता नहीं दी गई। कई क्षेत्रों से सारी नहीं आईं। 

जिन विधायकों से प्राथमिकताएं नहीं मिलीं, उन्हें योजना विभाग ने संभवतया रिमाइंडर भेजे हैं। विधायक चाहें तो आजकल भी प्राथमिकताएं दे सकते हैं। 
- अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त एवं योजना, हिमाचल सरकार

विज्ञापन

लोगों को नाराज नहीं करना चाहते कई विधायक 

Priorities of public interest forgotten by minister and MLA in himachal

विधायक प्राथमिकता योजनाओं पर हर विधानसभा क्षेत्र में एक अनार सौ बीमार जैसी स्थिति बन जाती है। किस क्षेत्र की स्कीम डाली जाए, इसका धर्मसंकट खड़ा हो जाता है।  इसलिए कई विधायक कुछ पंचायतों की योजनाएं बजट बुक में छपवाकर अपने हलके की बड़ी आबादी को नाराज नहीं करना चाहते।

कई बार फिजिबलिटी स्पष्ट नहीं होने के कारण भी ये प्राथमिकताएं तय नहीं हो पातीं। इसलिए बाद में सोच-समझकर तय की जाती हैं। सूत्रों की मानें तो ऐेसे ये चूक विधायक कई बार जानबूझकर भी करते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed