फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Preparation to give clean chit to former minister Singhi Ram in alleged scam of scissor and aari purchase

कैंची और आरी खरीद के कथित घोटाले में पूर्व मंत्री सिंघी राम को क्लीन चिट देने की तैयारी

Fri, 03 Sep 2021 10:53 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 03 Sep 2021 10:53 AM IST
सार

सिंघी राम इस संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले रामपुर विधानसभा हलके से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते आए हैं, मगर अब वह भाजपा का दामन थाम चुके हैं। इस मामले की जांच 12 साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन इस संबंध मेें न तो धूमल सरकार और न ही वीरभद्र सरकार ने नियमित केस दर्ज कराया था।

विज्ञापन
Preparation to give clean chit to former minister Singhi Ram in alleged scam of scissor and aari purchase
पूर्व बागवानी मंत्री सिंघी राम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैंची और आरी खरीद के कथित घोटाले में हिमाचल प्रदेश के पूर्व बागवानी मंत्री सिंघी राम को क्लीन चिट देने की तैयारी कर दी गई है। विजिलेंस ब्यूरो को इस मामले में पूर्व बागवानी मंत्री सिंघी राम को लपेटने के लिए सीधे सबूत नहीं मिले हैं। अब इस प्रकरण की पूरी फाइल ही बंद करने की तैयारी है। इस संबंध में विजिलेंस ब्यूरो ने अभियोजन अधिकारियों की राय भी मांगी है। कैंची और आरी खरीद पर हुए कथित घपले की फाइल बंद करने की यह हलचल ठीक मंडी लोकसभा उपचुनाव से पहले शुरू हुई है। सिंघी राम इस संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले रामपुर विधानसभा हलके से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते आए हैं, मगर अब वह भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

विज्ञापन


इस मामले की जांच 12 साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन इस संबंध मेें न तो धूमल सरकार और न ही वीरभद्र सरकार ने नियमित केस दर्ज कराया था। यह जांच वर्ष 2008 में शुरू की गई थी। इसे विजिलेंस ब्यूरो ने शिकायत संख्या 10/2008 के रूप में दर्ज किया था। इसे भाजपा की कांग्रेस के खिलाफ बनी चार्जशीट में शामिल किया गया था। इसमें आरोप थे कि वीरभद्र सरकार मेें जब सिंघी राम बागवानी मंत्री थे तो यह खरीद दिसंबर 2005 में की गई तो दो तरह की प्रूनिंग कैचिंयों और आरी की खरीद में अनियमितताएं बरती गईं। इससे विभाग को नुकसान पहुंचाया गया। 
विज्ञापन


कंपनी को अनुचित लाभ देने के आरोप 
आरोप रहे हैं कि मैसर्ज हर्बल नई दिल्ली को लगभग 25 से 26 लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया। वास्तविक से अधिक दरों पर कैंचियों की खरीद की। करीब 66 लाख रुपये की खरीद की गई। यह खरीद सरकारी उपक्रम हिम एग्रो के माध्यम से उद्यान विभाग के दिशा-निर्देशों पर की गई। इस खरीद में लगभग 10-11 लाख रुपये की अधिक अदायगी की गई। कंपनी को परिवहन और ऑपरेशनल चार्जेज दिए, जो इस फर्म को देय नहीं थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कंपनी ने हलफनामा नहीं दिया, फिर भी की खरीद 
30 मार्च 2002 के निर्णय के अनुसार यह खरीद जर्मनी की कंपनी गार्डिना इंटरनेशनल से की जानी थी। इसके बावजूद इसे मैसर्ज हर्बल नई दिल्ली से किया। अफसरों ने तय किया था कि इस खरीद से पहले नई दिल्ली की फर्म उन्हें हलफनामा देगी कि जर्मनी की कंपनी के रेट उसके बराबर हैं, मगर दिल्ली वाली फर्म ने हलफनामा नहीं दिया। इसके बगैर ही इस फर्म से खरीद हुई। 


1231.25 रुपये में खरीद ली 712.12 रुपये की कैंची 
विजिलेंस में हुई शिकायत के अनुसार दो तरह की कैं चियों की खरीद 1231.25 और 692 रुपये में की गई। प्रति आरी की खरीद 825 रुपये के हिसाब से की गई। हालांकि जर्मनी की कंपनी ने कैंचियों के रेट 712.12 और 360.18 रुपये के अनुसार तय किए। आरी का क्रय 475.16 रुपये हुआ। कुछ अफसरों ने लिखित रूप से यह संदेह जताया था कि ये रेट ज्यादा हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed