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धूमल बोले- अपनी एज और स्टेज को ध्यान में रख, कमेंट करें सीएम

Sat, 26 Aug 2017 11:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 26 Aug 2017 11:58 AM IST
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prem kumar dhumal targets on cm virbhadra singh

नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने सदन में कहा कि सीएम विपक्ष के विधायकों को कह रहे हैं कि विधानसभा के बजाय जंगल में होने चाहिए। भाजपा विधायकों पर इस तरह की टिप्पणियां सही नहीं हैं। अब काली भेड़ें बोलना बंद कर दिया गया है। पिछले दिनों गद्दी समुदाय पर भी एक टिप्पणी की गई।

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धूमल ने सीएम की ओर कहा कि कृपया अपनी एज और स्टेज को ध्यान में रखकर कमेंट करें। धूमल ने कहा कि आपसे आग्रह है कि असंसदीय भाषा का प्रयोग न करें। ये वैसे भी इस सरकार का अंतिम सत्र है। ऐसे में चर्चा करवाई जानी चाहिए। हम भी विधानसभा से गलत मैसेज दे रहे हैं। अगर कानून-व्यवस्था विषय पर चर्चा करवाई जाती तो ये संदेश जाता कि सरकार गंभीर है।
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जयराम ठाकुर बोले, रात को एक गाड़ी ने मेरा पीछा किया
सिराज से भाजपा विधायक जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछली रात को वे रात को दस बजे बालूगंज से विधानसभा परिसर की ओर आ रहे थे कि एक गाड़ी ने उनका पीछा किया। वे उनका पीछा परिसर तक करते रहे। जब पुलिस गुमटी में इसकी सूचना दी गई तो उन्होंने कहा कि वे वायरलेस संदेश इसलिए नहीं भेज पाएंगे, क्योंकि उनके पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है।
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रात को करीब 10 बजे ही उन्होंने एसपी शिमला को फोन किया, तो सवेरे पुलिस अधिकारी उनके पास आया और पूछने लगा कि क्या करना है। इस संबंध में एसपी सौम्या सांबशिवन का कहना है कि विधायक का पीछा करने वाले दो युवकों की शिनाख्त कर ली गई है और उनसे पूछताछ की जा रही है। इस मामले में पुलिस आईपीसी की धारा 179 के तहत कार्रवाई कर रही है। 

धर्मपुर प्रकरण भी कोटखाई जैसा- महेंद्र सिंह 
धर्मपुर के भाजपा विधायक महेंद्र सिंह ने अपने क्षेत्र में हुई दुराचार की घटना पर कहा कि बच्ची के परिवार पर दबाव बनाया गया है। ये ठीक वैसा ही प्रकरण है, जैसा कि शिमला में हुआ है। उन्होंने बच्ची की मेडिकल जांच के लिए अस्पताल में पैसे लिए जाने की भी बात की।

हालांकि, स्वास्थ्य कौल सिंह ठाकुर ने इस बात को गलत बताया और कहा कि ऐसा नहीं हुआ है। कुल्लू के भाजपा विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि बीते दिन कुल्लू के बजौरा में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई है। गुड़िया कांड में आरोपियों को अगर संरक्षण न दिया गया होता तो ये सब नहीं होता। 

सियासी नफा-नुकसान में फंसे प्रदेश के अहम मुद्दे
12वीं विधानसभा के चार दिवसीय अंतिम सत्र के तीन दिन हंगामे की भेंट चढ़ गए। सत्ता पक्ष और विपक्ष चुनावी नफा नुकसान को देखते हुए अपनी अपनी प्राथमिकताओं पर अड़े हुए हैं। विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दो मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। सत्ता पक्ष पहले मानसून के दौरान हुए नुकसान पर चर्चा चाहता है, जबकि विपक्ष कानून व्यवस्था पर बहस करवाने पर अड़ा है।

विपक्ष किसी भी हाल में अपनी रणनीति बदलने को तैयार नहीं है। सत्ता पक्ष भी मानसून में हुई 266 मौतों को अधिक गंभीर बताकर कानून व्यवस्था को आगे धकेलना चाहता है। दिलचस्प यह है कि दोनों मुद्दों पर चर्चा तो चाहते हैं लेकिन प्राथमिकताएं सियासी गुणा और भाग के हिसाब से तय की गई हैं। दोनों पक्षों के सियासी दांव पेंच में दूसरे मुद्दे गौण हो चुके हैं।


12वीं विधानसभा के अंतिम सत्र के तीन दिन हंगामे के शोरगुल में बीत गए। तीसरे दिन की शुरुआत विपक्ष ने ठीक वहीं से की, जहां से पहले दिन की कार्यवाही समाप्त हुई थी। प्रश्नकाल की जगह नियम 67 में कानून व्यवस्था पर बहस की मांग विपक्ष ने उठाई। अध्यक्ष ने चर्चा की मांग तो स्वीकार की है, लेकिन दो शर्तों के साथ।

एक तो चर्चा का नियम 67 की जगह 130 कर दिया, जिसमें मानसून के दौरान हुए नुकसान की चर्चा भी लगी थी। पीठ ने दूसरा बदलाव यह किया कि कानून व्यवस्था को चर्चा में दूसरी प्राथमिकता में रखा। यह दोनों बदलाव सरकार के पक्ष में आते देख विपक्ष ने तीसरे दिन भी सदन चलने नहीं दिया।

नेता सदन वीरभद्र की अगुवाई में सभी मंत्रियों विधायकों ने सदन में पलटवार की कोशिश की, लेकिन विपक्ष को स्थगन स्थगित करवाने से नहीं रोक पाए। अब सरकार सदन के बाहर विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। सीएम वीरभद्र ने साफ कर दिया है कि वे कानून व्यवस्था पर चर्चा को तैयार हैं।

मानसून के दौरान हुए नुकसान पर चर्चा को राज्य हित में बताते हुए सीएम बोल रहे हैं कि इसका प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाना है ताकि प्रदेश को कुछ पैकेज मिल सके। मंत्री भी इस बात की पैरवी कर रहे हैं कि कानून व्यवस्था और मानसून से नुकसान दोनों ही संवेदनशील हैं। दोनों मुद्दों पर अध्यक्ष ने चर्चा की अनुमति दे दी है। ऐसे में विपक्ष के अड़ने को जन मुद्दों पर चर्चा नहीं होने के नुकसान से जोड़ा जा रहा है।

67 और 130 में अंतर
विधानसभा का नियम 67 स्थगन प्रस्ताव है। इसके तहत अध्यक्ष चर्चा स्वीकार करते हैं तो सारे कामकाज रोककर संबंधित विषय पर चर्चा करवानी होगी। नियम 130 के तहत चर्चा सदन के रुटीन बिजनेस के बाद होती है। विपक्ष यह साबित करना चाहता है कि उनके उठाए मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं। सत्ता पक्ष इसे नियम 130 में चर्चा करवा कर अपने हिसाब से सदन को चलाने के मूड में है।

दोनों का दांव कामयाब
विपक्ष गुड़िया प्रकरण को चुनावी मुद्दा बना चुका है। सदन में उसे यह साबित करना है कि सरकार के पास इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं है। हंगामा कर सदन की कार्यवाही नहीं चलने से उसका दांव ठीक बैठ रहा है। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष कानून व्यवस्था को रुटीन मुद्दा साबित करने की कोशिश में है। सत्ता पक्ष विपक्ष को शोरशराबे के बीच भी सरकार का रोजाना का तय बिजनेस निपटा रहा है। 

विपक्ष के हंगामे के बीच तीन विधेयक पटल पर रखे, एक हुआ पारित 
विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने सदन पटल पर रुटीन बिजनेस को निपटाया। सदन के पटल पर तीन विधेयक रखने के साथ हिमाचल प्रदेश निरसन विधेयक, 2017 भी पारित किया। कानून व्यवस्था पर नियम 67 के तहत चर्चा स्वीकृत नहीं होने पर विपक्ष के विरोध की भेंट प्रश्नकाल तो चढ़ गया। 

 

लेकिन उसके बाद दोबारा शुरू हुई कार्यवाही नारेबाजी के बीच भी चलती रही। सत्ता पक्ष ने सदन की समितियों के प्रतिवेदनों के अलावा अधिसूचित एवं शासकीय राजपत्र सदन के पटल पर रखे। सदन के बाहर विपक्ष अब यह दलील दे रहा है कि सरकार ने जनहित के खिलाफ किसी विधेयक को पास करवाया है, तो राजभवन में मुद्दा उठाया जाएगा। वीरवार को 11:00 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो प्रदेश विधानसभा के स्पीकर बृज बिहारी बुटेल ने प्रश्नकाल का एलान किए बगैर ही कहा कि सीएम सू-मोटो स्टेटमेंट देना चाहते हैं।

 

इस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बोलना शुरू किया तो विपक्ष ने भारी विरोध किया। विपक्षी भाजपा के विधायकों का यह कहना था कि जब उन्हें नियम 67 के तहत कानून-व्यवस्था विषय पर बोलने की मंजूरी नहीं दी गई तो मुख्यमंत्री किस नियम के तहत वक्तव्य दे रहे हैं। क्या प्रश्नकाल को ही सस्पेंड कर दिया गया है? इस पर सीएम वीरभद्र भी विपक्ष की ओर बोले - आपको क्या पता कि मैं क्या स्टेटमेंट देने जा रहा हूं?

 

मैं यह वक्तव्य चेयर की परमिशन से दे रहा हूं। इसके बाद विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सीएम से वक्तव्य लेकर इसे खुद पढ़ना शुरू किया। सीएम वीरभद्र सिंह धर्मपुर और सरकाघाट क्षेत्र में लड़की का अपहरण करने के बाद दुराचार के मामले में वक्तव्य देना चाह रहे थे। इस वक्तव्य को अग्निहोत्री ने पढ़ते हुए कहा कि इस मामले के आरोपियों को पकड़ दिया गया है। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद रिमांड पर भेज दिया गया है।

 

इस पर नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि उनके पास प्वाइंट ऑफ  ऑर्डर है। तीन दिन से वे प्रश्नकाल को निलंबित कर नियम 67 के तहत चर्चा मांग रहे हैं। जब प्रश्नकाल को सस्पेंड नहीं किया गया है तो किस नियम के अंतर्गत सीएम को वक्तव्य देने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री वक्तव्य पढ़ने के काबिल नहीं हैं तो संसदीय कार्य मंत्री को इसे पढ़ने की मंजूरी किसने दे दी?

 

शोर-शराबे के बीच प्रश्नकाल में ही विपक्ष के सदस्य और सत्ता पक्ष के सदस्य इस पर अपने विचार प्रस्तुत करते रहे। स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने भी इसका थोडे़ वक्त तक कोई विरोध नहीं किया। धर्मपुर के भाजपा विधायक महेंद्र सिंह, कुल्लू के भाजपा विधायक महेश्वर सिंह, देहरा के भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि, सिराज के भाजपा विधायक जयराम ठाकुर और राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इस बीच अपने-अपने वक्तव्य शुरू किए।

 

ऐसा लग रहा था कि मानो सारा बिजनेस स्थगित होकर कानून-व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई। इस पर धूमल ने स्पीकर का भी धन्यवाद किया कि थोड़ी-थोड़ी करके चर्चा उन्होंने शुरू करवा दी है। इसके वे धन्यवादी हैं। इसके बाद विपक्ष ने फिर से सारा काम रोककर नियम 67 के तहत चर्चा करवाने को कहा तो स्पीकर ने इससे इनकार करते हुए कहा कि आने वाले कल नियम 62 के तहत चर्चा करवा दी जाएगी।

 

करीब पौने 12 बजे शोर-शराबा थमता न देख स्पीकर ने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। 12 बजे कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष की बात नहीं मानने पर भाजपा के सभी सदस्यों ने पिछले दो दिनों की तरह फिर से चेयर का घेराव किया। इसके  बाद विपक्ष के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि विधायकों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर सीएम माफी मांगें।

 

उन्होेंने जनता के चुने हुए भाजपा विधायकों को गुंडे और जंगली तक कह दिया है। उन्होंने नियम 67 में कानून-व्यवस्था पर चर्चा नहीं करवाने का मामला फिर उठाया। स्पीकर ने इससे मना किया तो सदन फिर गरमा गया। विपक्ष के सदस्य वेल में जाकर नारेबाजी करते रहे।

 

उन्होंने चेयर का भी नारेबाजी के साथ घेराव किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही चलती रही। करीब सवा 12 बजे सदन की कार्यवाही को अगले दिन शुक्रवार को 11:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

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