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Shimla News: महालक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल श्रेष्ठ, दो दिन होगा पूजन
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दिवाली पर शाम 6:38 से 8:24 बजे तक प्रदोष काल
पहली नवंबर को स्वाति नक्षत्र में शाम 5:13 से 6:17 तक मुहूर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में इस बार दिवाली 31 अक्तूबर और पहली नवंबर दो दिन मनाई जा रही है। अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर को दोपहर 3:53 बजे शुरू होकर पहली नवंबर शाम 6:17 बजे तक रहेगी।
दो दिन अमावस्या तिथि होने से लोगों दोनों दिन महालक्ष्मी पूजन कर सकते हैं। दिवाली पर महालक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में की गई पूजा से दिवाली पर मां लक्ष्मी का आगमन होता है। ज्योतिषाचार्य डाॅ. मस्तराम शर्मा ने बताया कि प्रदोष काल में की गई महालक्ष्मी पूजा को श्रेष्ठ माना जाता है। प्रदोषकाल सूर्य अस्त और रात्रि के प्रारंभ की संधि है। बताया कि 31 अक्तूबर को शाम 6:38 से शाम 8:24 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस दिन इस मुहूर्त में ही माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करनी चाहिए। पहली नवंबर को प्रदोष काल के साथ स्वाति नक्षत्र का भी शुभ योग है। बताया कि 31 अक्तूबर को 12:44 बजे से स्वाति नक्षत्र लगेगा। यह पहली नवंबर को पूरा दिन और 2 नवंबर को सुबह 3:31 बजे तक रहेगा।
स्वाति नक्षत्र में की गई महालक्ष्मी पूजा का अधिक महत्व है। कहा कि पहली नवंबर को शाम 5:13 से शाम 6:17 बजे तक प्रदोष व्यापिनी तिथि है। इस मुहूर्त में पूजा करने का महत्व है। कहा कि मार्तंग पंचाग, निर्णय सिंधू, धर्म सिंधू के अनुसार प्रदोष काल और स्वाति नक्षत्र में दिवाली की पूजा करनी चाहिए। धनतेरस से दीपोत्सव का आगाज हुआ है। 31 अक्तूबर और पहली नवंबर को दिवाली, 2 नवंबर को गेवर्धन पूजा और 3 नवंबर को भैया दूज पर दीपोत्सव का समापन होगा।
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दिवाली पर रात्रि पूजन का महत्व
दिवाली पर महालक्ष्मी का रात्रि पूजन करने का विशेष महत्व है। माता लक्ष्मी की साधना के लिए मध्य रात्रि शुभ मानी गई है। ज्योतिषाचार्य डॉ. राजेश भारद्वाज ने बताया कि घर में स्थिर लक्ष्मी आगमन के लिए महालक्ष्मी के साथ कुबेर देवता का पूजन करना चाहिए। यह पूजन प्रदोष काल में किया जाए तो फलदायी होता है। बताया कि महालक्ष्मी की साधना के लिए रात्रि पूजा को श्रेष्ठ माना गया है। कहा कि 31 अक्तूबर को सिंह लग्न में मध्य रात्रि 12:42 बजे से 2:00 बजे तक पूजन का मुहूर्त है। ऐसा करने से साल भर माता लक्ष्मी घर में वास करती है। इसके साथ ही शाम के समय प्रदोष काल में घर के दरवाजे पर दीया जलाना चाहिए। माता लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने दीये प्रज्ज्वलित कर जल, रोली, खील, बताशे, चावल, गुड, गुलाल, धूप से पूजन करें। व्यापारी लोग अपनी दुकानों की गद्दी पर गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा रखकर पूजन करें।
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पहली नवंबर को स्वाति नक्षत्र में शाम 5:13 से 6:17 तक मुहूर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में इस बार दिवाली 31 अक्तूबर और पहली नवंबर दो दिन मनाई जा रही है। अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर को दोपहर 3:53 बजे शुरू होकर पहली नवंबर शाम 6:17 बजे तक रहेगी।
दो दिन अमावस्या तिथि होने से लोगों दोनों दिन महालक्ष्मी पूजन कर सकते हैं। दिवाली पर महालक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में की गई पूजा से दिवाली पर मां लक्ष्मी का आगमन होता है। ज्योतिषाचार्य डाॅ. मस्तराम शर्मा ने बताया कि प्रदोष काल में की गई महालक्ष्मी पूजा को श्रेष्ठ माना जाता है। प्रदोषकाल सूर्य अस्त और रात्रि के प्रारंभ की संधि है। बताया कि 31 अक्तूबर को शाम 6:38 से शाम 8:24 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस दिन इस मुहूर्त में ही माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करनी चाहिए। पहली नवंबर को प्रदोष काल के साथ स्वाति नक्षत्र का भी शुभ योग है। बताया कि 31 अक्तूबर को 12:44 बजे से स्वाति नक्षत्र लगेगा। यह पहली नवंबर को पूरा दिन और 2 नवंबर को सुबह 3:31 बजे तक रहेगा।
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स्वाति नक्षत्र में की गई महालक्ष्मी पूजा का अधिक महत्व है। कहा कि पहली नवंबर को शाम 5:13 से शाम 6:17 बजे तक प्रदोष व्यापिनी तिथि है। इस मुहूर्त में पूजा करने का महत्व है। कहा कि मार्तंग पंचाग, निर्णय सिंधू, धर्म सिंधू के अनुसार प्रदोष काल और स्वाति नक्षत्र में दिवाली की पूजा करनी चाहिए। धनतेरस से दीपोत्सव का आगाज हुआ है। 31 अक्तूबर और पहली नवंबर को दिवाली, 2 नवंबर को गेवर्धन पूजा और 3 नवंबर को भैया दूज पर दीपोत्सव का समापन होगा।
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दिवाली पर रात्रि पूजन का महत्व
दिवाली पर महालक्ष्मी का रात्रि पूजन करने का विशेष महत्व है। माता लक्ष्मी की साधना के लिए मध्य रात्रि शुभ मानी गई है। ज्योतिषाचार्य डॉ. राजेश भारद्वाज ने बताया कि घर में स्थिर लक्ष्मी आगमन के लिए महालक्ष्मी के साथ कुबेर देवता का पूजन करना चाहिए। यह पूजन प्रदोष काल में किया जाए तो फलदायी होता है। बताया कि महालक्ष्मी की साधना के लिए रात्रि पूजा को श्रेष्ठ माना गया है। कहा कि 31 अक्तूबर को सिंह लग्न में मध्य रात्रि 12:42 बजे से 2:00 बजे तक पूजन का मुहूर्त है। ऐसा करने से साल भर माता लक्ष्मी घर में वास करती है। इसके साथ ही शाम के समय प्रदोष काल में घर के दरवाजे पर दीया जलाना चाहिए। माता लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने दीये प्रज्ज्वलित कर जल, रोली, खील, बताशे, चावल, गुड, गुलाल, धूप से पूजन करें। व्यापारी लोग अपनी दुकानों की गद्दी पर गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा रखकर पूजन करें।