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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Potatoes can be grown in stubble; just place the seeds on the ground, eliminating the hassle of tilling the f

हिमाचल: पराली में उगेगा आलू; जमीन पर रख दो बीज, खेत जोतने का भी झंझट नहीं

Mon, 03 Nov 2025 01:19 PM IST
Krishan Singh भजन चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, धौलाकुआं (सिरमौर)।
भजन चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, धौलाकुआं (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 03 Nov 2025 01:19 PM IST
सार

 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने आलू की नई किस्म नीलकंठ का सफलतापूर्वक ट्रायल किया है। ऊना व सिरमौर जिलों में इस साल इस फसल को बड़े पैमाने पर लगाने को लेकर भी काम किया जा रहा है।

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Potatoes can be grown in stubble; just place the seeds on the ground, eliminating the hassle of tilling the f
पराली में उगेगा आलू - फोटो : संवाद

विस्तार

आलू की फसल के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने नई तकनीक खोजी है। इसके जरिए आलू की खेती के लिए न तो खेत को हल से जोतने की जरूरत है और न ही ज्यादा सिंचाई की। बस जमीन के ऊपर आलू रख दो और 3 माह के भीतर फसल तैयार हो जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने आलू की नई किस्म नीलकंठ का सफलतापूर्वक ट्रायल किया है। ऊना व सिरमौर जिलों में इस साल इस फसल को बड़े पैमाने पर लगाने को लेकर भी काम किया जा रहा है। आलू की इस किस्म की बिजाई करने के लिए खेतों की जुताई की जरूरत नहीं होती। धान की फसल की कटाई के बाद किसान इस फसल के बीज को सीधे खेत में रख सकते हैं।

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बीज को खेत में रखने के बाद उसे पराली से ढका जाता है। जब फसल तैयार होती है तो फसल की खोदाई का खर्च भी बचता है। पराली हटाने के बाद आलू की फसल को सीधे उठाया जा सकता है। आत्मा प्रोजेक्ट से खंड तकनीकी प्रबंधक डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. शौरभ शर्मा ने फूलपुर ग्राम पंचायत में उत्पादन की शुरुआत कर किसानों को उत्पादन की विधि भी बताई। विशेषज्ञों का कहना है कि भरपूर पौष्टिक तत्व होने के चलते यह किस्म दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद है। सिरमौर जिला में पहली बार केवीके इस फसल को बढ़ावा देने को लेकर काम कर रहा है। पांवटा साहिब व नाहन के तहत आने वाले क्षेत्रों में एक दर्जन किसानों को बीज वितरित कर नई विधि से तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

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बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए जिला ऊना और सिरमौर को इस बार चयनित किया गया है। बीते साल ऊना और धौलाकुओं के विज्ञान केन्द्रों में ट्रायल पर इस किस्म का उत्पादन किया गया था। इसके अच्छे परिणाम मिलने से अब बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए आत्मा प्रोजेक्ट के सहयोग से प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों का चयन कर बीज वितरण किया गया है। इसमें गोजर, काशीपुर, फूलपुर, कोलर, सालवाला, सैनवाला सहित एक दर्जन किसानों को जोड़ा गया है। कृषि विज्ञान केंद्र ऊना अकरोट के सहायक वैज्ञानिक डा. सौरभ शर्मा ने बताया कि सिरमौर में पहली बार इस किस्म के आलू की फसल तैयार होगी। 

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तीन बार ही सिंचाई की जरूरत
धौलाकुओं कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी डा. पंकज मित्तल ने बताया कि इस नई किस्म को नई तकनीक से बिजाई की जाती है। धान कटाई के बाद जमीन को बिना हल से खाली जमीन पर आलू रख कर उसके बाद धान का पराली बिछा कर छोड़ दिया जाता है। अक्तूबर-नवंबर में बिजाई के बाद फरवरी में फसल तैयार हो जाती है। इसमें तीन बार ही सिंचाई की जरूरत होती है। सबसे बड़ी बात यह भी है कि इसको तैयार करने में ट्रैक्टर खर्च, गुड़ाई मजदूरी खर्च नहीं है। बस एक बार खाली जमीन पर बीज लगा कर और तैयार होने पर आलू बिना खोदाई के जमीन पर से उठा सकते हैं।

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