सियासत: सीएम जयराम ने कांगड़ा पर किया फोकस, देररात तक चला मंथन, मंत्री रखे दूर
मंडी में 6 अप्रैल को आम आदमी पार्टी की प्रस्तावित रैली में कांगड़ा जिले से नाराज भाजपा नेता आप में शामिल न हों, इसके लिए योजना बनाई गई। बैठक में कांगड़ा जिले के विधायकों और मंत्रियों के कामकाज की भी समीक्षा की गई, ताकि आने वाले विस चुनाव में जीत को लेकर स्टीक निर्णय लिए जा सकें।
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता की दहलीज पर पहुंचाने का माद्दा रखने वाले हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा पर फोकस कर दिया है। आम आदमी पार्टी की दस्तक और कांग्रेस की दिल्ली बैठक के बाद ढीले हो रहे कांगड़ा के सियासी पेंच को मुख्यमंत्री ने कसना शुरू कर दिया है। कांगड़ा के राजनीति पर शीर्ष नेतृत्व से इतर अब भाजपा की छोटी टोली भी पैनी नजर रखेगी। भाजपा की यह छोटी टोली विधायकों और मंत्रियों की फीडबैक रखने के साथ नाराज कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का प्लान तैयार करेगी। भाजपा की छोटी टोली में मुख्यमंत्री, प्रदेश महासचिव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शामिल हैं।
छोटी टोली ने धर्मशाला के परिधि गृह में देर रात तक लंबी बैठक कर कांगड़ा जिले के सियासी माहौल पर गहन मंथन किया। हिमाचल में आम आदमी पार्टी के संभावित असर पर चर्चा की गई। मंडी में 6 अप्रैल को आम आदमी पार्टी की प्रस्तावित रैली में कांगड़ा जिले से नाराज भाजपा नेता आप में शामिल न हों, इसके लिए योजना बनाई गई। बैठक में कांगड़ा जिले के विधायकों और मंत्रियों के कामकाज की भी समीक्षा की गई, ताकि आने वाले विस चुनाव में जीत को लेकर स्टीक निर्णय लिए जा सकें। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली छोटी टोली की बैठक धर्मशाला में आनन फानन रखी गई। पहले धर्मशाला में मुख्यमंत्री का दिन का ही कार्यक्रम था, लेकिन पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के युवा सम्मेलन के सफल आयोजन और आम आदमी पार्टी के अप्रैल माह के पहले हफ्ते में धर्मशाला में प्रस्तावित रैली के संभावित नफा नुकसान को भांपकर कर आनन फानन छोटी टोली की बैठक रखी गई।
सीएम के दौरे में नहीं आए विधायक-मंत्री, अपने इलाकों में डटे
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की फीडबैक की भनक लगते ही जिला कांगड़ा के अधिकतर विधायक और मंत्री मुख्यमंत्री के दौरे में आने के बजाय अपने अपने विस क्षेत्रों में डटे रहे। मंत्रियों में सिर्फ बिक्रम ठाकुर सीएम के दौरे में पहुंचे। मंत्री राकेश पठानिया और सरवीण चौधरी गायब रहे। मुल्ख राज प्रेमी, विशाल नैहरिया और अरुण मेहरा कूका के अलावा कोई विधायक सीएम के कार्यक्रम में नहीं आया।
तीन दिन से नई चाल
तीन दिन से कांगड़ा का सियासी पारा गर्म हो गया है। 29 मार्च को पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा का बड़ा युवा सम्मेलन, दूसरे दिन मुख्यमंत्री का दौरा और तीसरे दिन आम आदमी पार्टी के हिमाचल प्रभारी सत्येंद्र जैन के प्रस्तावित शाहपुर दौरे ने चुनावी वर्ष में सियासी हवा गर्म कर दी है। भाजपा के एसोसिएट विधायक होशियार सिंह ने भी बुधवार को देहरा में बड़ा सम्मेलन कर भाजपा की टिकट पर दावा पेश कर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी।
नवरात्र के बीच सरकार और संगठन में फिर बडे़ फेरबदल की सुगबुगाहट
उधर, प्रदेश में नवरात्र के बाद सरकार और संगठन में फिर बडे़ फेरबदल की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। भाजपा संगठन के कुछ प्रमुख नेताओं को छह अप्रैल के बाद नई दिल्ली बुलाए जाने की तैयारी है। निष्क्रिय बोर्डों-निगमों के कुछ अध्यक्षों-उपाध्यक्षों की तो कुर्सी भी जा सकती है। अच्छी परफॉर्मेंस न देने वाले मंत्रियों पर भी आंच आने की चर्चा शुरू हो गई है। चुनावी साल में सरकार और संगठन को अधिक चुस्त करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व कुछ नए प्रयोग कर सकता है। राज्य में वर्तमान में भाजपा का ध्यान छह अप्रैल को मनाए जा रहे स्थापना दिवस पर है। इसे आम आदमी पार्टी के मंडी रोड शो को काउंटर करने के लिए भाजपा बड़े स्तर पर मनाने जा रही है।
हर विधानसभा क्षेत्र में पांच हजार कार्यकर्ता जुटेंगे। इसी दिन भाजपा महासंपर्क अभियान भी शुरू करने जा रही है। इसके बाद नवरात्र केे दौरान ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप और अन्य प्रमुख संगठन नेताओं को दिल्ली बुलाए जाने की भी तैयारी है। नवरात्र में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा उनके साथ बैठक ले रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव हैं। इसके लिए अक्तूबर के बाद आचार संहिता लग सकती है। ऐसे में सरकार अभी से मिशन रिपीट की तैयारी में जुट सकती है।
हालांकि , भाजपा के राज्य प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने बताया है कि अभी कुछ तय नहीं किया गया है। अभी कुछ कहना सही नहीं होगा।
सुरेश भारद्वाज की नड्डा से मुलाकात के निकाले जा रहे कई सियासी मायने
- शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। नड्डा ने उनसे भी हिमाचल में सरकार और संगठन की चाल के बारे में फीडबैक लिया है। हालांकि, भारद्वाज का कहना है कि उन्होंने अपने विभागीय मसलों पर बात की है।