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बड़े खेल की आशंका: पेपर लीक करने में कहीं पुलिस अफसर की मिलीभगत तो नहीं
Sun, 08 May 2022 12:15 PM IST
Krishan Singh
सुनील चड्ढा, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, धर्मशाला
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 08 May 2022 12:15 PM IST
सार
पुलिस पहले मामले को सामान्य मामला बताकर गोलमाल करने की कोशिश कर रही थी। अमर उजाला ने जब मामले में तह तक जाने की कोशिश की तो दबाव में आकर मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा और दो दिन बाद फिर एफआईआर दर्ज हुई।
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कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल के हजारों बेरोजगारों से मजाक करने वाले कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले ने पुलिस पर भी कई सवाल उठा दिए हैं। चार गिरफ्तारियां होने के बाद भी यह पता नहीं चल रहा कि पेपर कहां और कैसे लीक हुआ। अभी पेपर लीक मामले में शक की सूई प्रिंटिंग प्रेस और पुलिस के किसी अफसर पर घूम रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस पहले मामले को सामान्य मामला बताकर गोलमाल करने की कोशिश कर रही थी। अमर उजाला ने जब मामले में तह तक जाने की कोशिश की तो दबाव में आकर मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा और दो दिन बाद फिर एफआईआर दर्ज हुई।
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सूत्रों के अनुसार पेपर लीक होने की बात एक आईपीएस अधिकारी को तीन मई को पता चल गई थी, लेकिन मामले में एफआईआर दो दिन बाद की गई। पेपर लीक की बात मुख्यमंत्री से भी दो दिन तक छिपाई गई। एक आईपीएस अफसर ने 4 मई को बाकायदा डीआईजी सुमेधा द्विवेदी को पत्र लिखकर मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखा। डीआईजी ने अनुमति के लिए पत्र को डीजीपी को भेज दिया, लेकिन इसके बाद मामला धींगामुश्ती में डाल दिया दिया।
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सवाल यह उठ रहा है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी इस मामले में लिप्त नहीं था तो दो दिन तक मामले की जानकारी होने के बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। क्यों मुख्यमंत्री तक को इतने बड़े मामले की जानकारी नहीं दी गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पहले जो एसआईटी बनाई गई, उसमें एसपी कांगड़ा और डीआईजी सुमेधा द्विवेदी को क्यों बाहर रखा गया। दबाव बनने के बाद एसपी कांगड़ा को तो एसआईटी में शामिल किया गया लेकिन डीआईजी को उससे नहीं डाला गया।
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पुलिस अधिकारी के रिश्तेदार का भी आया नाम
अगर तीन मई को पेपर लीक की बात पता चलते ही एफआईआर दर्ज कर ली जाती तो उसी रात मास्टरमाइंड को पकड़ा जा सकता था। सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि एक पुलिस अधिकारी के रिश्तेदार ने भी पैसे देकर लिखित परीक्षा पास की है, जिसकी जांच चल रही है। हालांकि, इसमें कितना सच है इसका पता जांच के बाद ही चलेगा। इसलिए, यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं किसी पुलिस अधिकारी ने ही मिलीभगत से पेपर लीक नहीं करवाया।
करोड़ों का खेल हो सकता है कि पेपर लीक के पीछे
पेपर लीक मामले की अभी तक की जांच में सामने आया है कि पेपर के प्रश्न और उत्तर जानने के लिए एक-एक अभ्यर्थी ने 6 से 8 लाख रुपये दलालों को दिए। कांगड़ा के अलावा ऊना जिले में भी जांच में पाया गया है कि करीब 10 युवकों ने भी पैसे देकर प्रश्न और उत्तर जाने। ऐसे में यह खेल पूरे हिमाचल में हुआ, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ है कि पेपर लीक मामले में करोड़ों का खेल हो सकता है जिसमें अधिकारी और दलाल मिले हो सकते हैं।