दफ्तर का घेराव करने पहुंचे सीटू के सौ से ज्यादा कार्यकर्ता गिरफ्तार
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जिला किन्नौर के शौंगटोंग प्रोजेक्ट से निकाले गए मजदूरों की बहाली की मांग को लेकर बीसीएस में पावर कॉरपोरेशन के दफ्तर का घेराव करने पहुंचे सीटू कार्यकर्ताओं को मौके से जबरन उठाकर पुलिस ने गिरफ्तार किया। बुधवार रात आठ बजे बीसीएस से दो गाड़ियों में सौ से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस उठाकर ले गई।
उधर, निजी कंपनी के साथ हड़ताली मजदूरों की बुधवार को बैठक नहीं हो सकी। बुधवार दोपहर ढाई बजे से शाम आठ बजे तक मजदूरों का प्रदर्शन जारी रहा। तनाव बढ़ने पर पावर कॉरपोरेशन के अफसरों ने अंदर से ही दफ्तर का गेट बंद करवा दिया। मौके पर तनाव बढ़ने के चलते भारी पुलिस बल भी मौजूद रहा। इस दौरान पुलिस अधीक्षक शिमला भी मौके पर मौजूद रहे।
बिफर उठे सीटू कार्यकर्ता
17 फरवरी को हुए घेराव के दौरान पुलिस अधीक्षक शिमला की मौजूदगी में 22 फरवरी को बैठक करने का फैसला लिया गया था। इस बैठक में निजी कंपनी के प्रतिनिधियों को बुलाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन बुधवार को दोपहर ढाई बजे से लेकर शाम आठ बजे तक सीटू नेताओं को बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया।
इस पर सीटू कार्यकर्ता बिफर उठे। दफ्तर में प्रवेश करने को लेकर कई बार सीटू नेताओं की पुलिस के साथ हल्की झड़प भी हुई। तनाव बढ़ने पर पुलिस ने जबरन सभी प्रदर्शनकारियों को मौके से उठाया। इस अवसर पर सीटू नेता विजेंद्र मेहरा, राकेश सिंघा, किशोरी ढटवालिया, विनोद विरसांटा, चंद्रकांत वर्मा, नोवल, रोनी, बबलू, रीता, हेमलता, पवन, सतपाल सहित कई अन्य मौजूद रहे।
जिन्हें बुलाया था, वह वार्ता करने नहीं आए: कॉरपोरेशन
प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रवक्ता ने बताया है कि बुधवार दोपहर दो बजे निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ हड़ताली मजदूरों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया गया था। लेकिन शाम साढ़े छह बजे तक वह कर्र्मी नहीं आए जिन्हें बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि निजी कंपनी द्वारा मजदूरों को नौकरी से निकाले जाने का मामला लेबर कोर्ट में विचाराधीन है। 25 फरवरी को मामले की सुनवाई होना तय हुई है।
बैठक का किसी को नहीं आया बुलावा: विजेंद्र
शिमला। मजदूर संगठन सीटू के जिला सचिव विजेंद्र मेहरा ने बताया कि कॉरपोरेशन के अधिकारी झूठे बयान दे रहे हैं। किसी भी कर्मी को बुधवार को बैठक के लिए नहीं बुलाया गया। आज जिस मामले के लेबर कोर्ट में विचाराधीन होने की बात कही जा रही है, उस मामले पर बीते सात महीनों तक कॉरपोरेशन ने क्या किया? इसको लेकर भी रुख स्पष्ट करना चाहिए। विजेंद्र मेहरा ने कहा निजी कंपनी हाईकोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना कर रही है।