व्हाइट हाउस में ट्रंप दंपति के लिए पीएम मोदी यहां से ले गए थे खास तोहफे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांगड़ा घाटी की चाय के जायके से लेकर शहद की मिठास को अमेरिका के व्हाइट हाउस पहुंचा दिया। राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप से अपनी पहली मुलाकात को यादगार बनाने के लिए पीएम मोदी ने हिमाचल के कुछ तोहफे भेंट किए।
उन्होंने ट्रंप को कांगड़ा की मशहूर चाय और शहद जबकि फर्स्ट लेडी मेलानिया को कुल्लू की ऊनी शॉल और हाथ से बना मंडी का ब्रेसलेट दिया। इस मुलाकात से हिमाचल प्रदेश सुर्खियों में आ गया है।
पहली बार हिमाचली चाय का जायका और परंपरागत आभूषण को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है। माना जा रहा है कि पीएम की इस पहल से हिमाचल के उत्पादों की डिमांड बढ़ जाएगी।
दुनिया में चर्चित है कांगड़ा की ग्रीन और ब्लैक टी
अमेरिका दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया से मुलाकात की। पहली मुलाकात के लिए मोदी अपने साथ कई तोहफे लेकर गए थे।
कांगड़ा की ग्रीन और ब्लैक टी देश-दुनिया में चर्चित है लेकिन सरकार की अनदेखी से दम तोड़ रही है। कांगड़ा घाटी का शहद पूरी तरह से नेचुरल होने के साथ हर्बल गुणों से भरपूर है, लेकिन इसकी मार्केटिंग भी बेहद कमजोर है।
मंडी के कारीगरों ने तैयार किया मलेनिया का चांदी का ब्रेसलेट
मलेनिया को दिया गया चांदी का ब्रेसलेट जिस कंपनी का है उसे हिमाचल के मंडी के कारीगरों ने तैयार किया है। लगभग 35 ग्राम वजनी चांदी का ब्रेसलेट मंडी की पारंपरिक शैली में बना है।
इसे हाथ से तैयार किया गया है। फर्स्ट लेडी के गिफ्ट पैक में कुल्लू की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ऊनी शाल भी है। जानकार मान रहे हैं कि व्हाइट हाउस में पहुंचने के बाद हिमाचली उत्पाद अंतरराष्ट्रीय ब्रांड में तब्दील होंगे।
100 फीसदी आर्गेनिक है कांगड़ा चाय, हार्ट-कैंसर के लिए फायदेमंद
कांगड़ा चाय की खासियत है कि अगर इसमें दूध और चीनी न भी डालें तो यह अपना अलग ही बेहतरीन स्वाद देती है। इसमें किसी भी आर्टिफिशियल रंग का प्रयोग नहीं किया जाता है।
कांगड़ा चाय पूरी तरह से आर्गेनिक है। हृदय, कैंसर सहित कई बीमारियों के लिए कांगड़ा चाय फायदेमंद है। चाय की इस तरह की गुणवत्ता दुनिया के किसी अन्य कोने में नहीं है।
1852 में शुरू हुआ था कांगड़ा चाय का उत्पादन, अंग्रेज लेकर आए थे
कांगड़ा में चाय को अंग्रेज लेकर आए थे। चीन से लाए पौधों को यहां रोपा गया और 1852 में कांगड़ा चाय का उत्पादन शुरू हुआ था। 1886 और 1895 में कांगड़ा चाय को अपनी बेहतरीन क्वालिटी और अलग स्वाद के लिए लंदन और एम्स्टर्डम में गोल्ड और सिल्वर मेडल से नवाजा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 90 के दशक में जब हिमाचल भाजपा के प्रभारी थे तो उस दौरान उन्हें कांगड़ा चाय का चस्का लगा। 1882 में धर्मशाला में बनी टी फैक्टरी मान एस्टेट के मैनेजर दविंद्र पठानिया कहते हैं उनकी फैक्टरी से कांगड़ा चाय जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड और कनाडा तक निर्यात हो चुकी है।