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उद्योगों के लिए पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर मांगा प्रोत्साहन पैकेज
Wed, 29 Apr 2020 01:00 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 29 Apr 2020 01:00 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के हिमाचल प्रदेश स्टेट चैप्टर ने कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान उद्योग के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वीडियो कांफ्रेंस का आयोजन किया। चैंबर के अधिकांश सदस्यों ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार पहाड़ी राज्यों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर प्रोत्साहन पैकेज देने पर विचार करे।
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चर्चा की अध्यक्षता करते हुए हिमाचल प्रदेश स्टेट चैप्टर के अध्यक्ष रमेश कुमार जैन ने महामारी से लड़ने में केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। जैन ने कहा कि उद्योग और अर्थव्यवस्था बहुत कठिन समय से गुजर रहे हैं। सह-अध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि बिजली, पानी, सीवरेज और नगर निगम के औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के शुल्क को पूरी तरह से माफ किया जाए। एमएसएमई को दिए जाने वाले शुद्ध ऋण को 35 फीसदी तक बढ़ाया जाए।
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वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार बहुत जल्द एमएसएमई के लिए एक राहत पैकेज लेकर आ सकती है। आशीष बागरोडिया ने कहा कि पूंजी निवेश और माल भाड़े की सब्सिडी के सभी लंबित दावों को तुरंत अदा करे। पूर्व अध्यक्ष ध्यान चंद ने कहा कि पर्यटन उद्योग हिमाचल प्रदेश में लगभग सात लाख लोगों को रोजगार दे रहा है। नई और विस्तार परियोजनाओं के पूरा होने की समय अवधि को कम से कम दो साल बढ़ाया जाए।
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सत्य प्रकाश ठाकुर ने कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े सहकारी क्षेत्र को सभी लंबित सब्सिडी और अनुदान जारी करें। शूलिनी यूनिवर्सिटी के उपकुलपति प्रो. पीके खोसला और इटरनल यूनिवर्सिटी बड़ू साहिब के उपकुलपति प्रो. एचएस धारिवाल ने कम ब्याज वाले ऋण निजी विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को दिए जाएं।