शीत मरुस्थल लाहौल-स्पीति में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, मानवाधिकार आयोग से की शिकायत
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शीत मरुस्थल कहे जाने वाले जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगाें ने आयोग से शिकायत कर हालात बयान किए हैं।
उन्होंने बताया है कि महीनों अलग-थलग रहने को मजबूर जिलावासियों को सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं भी नहीं दे पा रही है। अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं।
जिला परिषद सदस्य तथा जिला शिक्षा एवं स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष सुदर्शन जस्पा, शकुंतला, पूनम और पदमा ने शिकायत भेजी है। सात पन्नों के शिकायत पत्र में समिति ने कहा है कि प्रदेश की सभी सरकारों का इस जनजातीय जिला के प्रति सौतेला व्यवहार रहा है।
मेडिकल और पैरा मेडिकल के 225 पद रिक्त
जिले में चिकित्सा सुविधाओं के लिए 36 उपकेंद्र, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 3 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और एक क्षेत्रीय अस्पताल हैं। इनमें मेडिकल और पैरा मेडिकल के 445 पदों में से 225 पद रिक्त हैं।
मेडिकल ऑफिसर के 49 में से 22 पद, विशेषज्ञों के सभी सात, दंत चिकित्सकों के आठ में से सात, स्टाफ नर्सों के 39 में से 11 और लैब टेक्नीशियन के सभी 16 पद रिक्त पड़े हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा अधिकारियों के 22 में से 7 पद खाली हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल केलांग में 21 डाक्टरों में से 15 पद खाली पड़े हैं, जिनमें सभी 7 विशेषज्ञों के पद वर्षों से खाली हैं। उपकरणों के नाम पर केलांग और उदयपुर में कुछ पुरानी एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीनों के अलावा कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते शेष दुनिया से कट जाने के कारण गंभीर रोगों और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगाें की जान पर बन आती है। कईयों को इस दौरान जान तक गंवानी पड़ गई। समिति सदस्यों ने अविलंब लाहौल-स्पीति की सुध लेने की गुहार लगाई है।