गैस के दाम बढ़े तो वापस लेने लगे छोड़ी सब्सिडी, दोबारा किया आवेदन
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रसोई गैस सिलिंडरों की बढ़ती कीमतों के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील बेअसर साबित होने लगी है। घरेलू गैस के हर माह बढ़ते दामों के चलते उपभोक्ता रसोई गैस पर छोड़ी सब्सिडी वापस मांगने लगे हैं।
प्रदेश में बीते दस माह के दौरान 1200 से अधिक उपभोक्ताओं ने छोड़ी सब्सिडी दोबारा लेने को आवेदन किया। गैस कंपनियों के पास रोजाना कई उपभोक्ता सब्सिडी शुरू करवाने के आवेदन करने पहुंच रहे हैं। उधर, कुल 18 लाख में से 70 हजार से अधिक उपभोक्ता अभी भी सब्सिडी छोड़े हुए हैं।
हिमाचल में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनियां घरेलू गैस सिलिंडरों की सप्लाई कर रही हैं। प्रदेश में आईओसी के सबसे अधिक 16.31 लाख उपभोक्ता हैं। अन्य दोनों कंपनियों के पास करीब पौने दो लाख उपभोक्ता हैं। गैस कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गिव इट अप’ अपील के बाद रसोई गैस सिलिंडरों की सब्सिडी छोड़ने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा हुआ।
अब जब गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं तो कई उपभोक्ता दोबारा आवेदन कर सब्सिडी शुरू करवाने की मांग कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब सब्सिडी छोड़ी थी तब सिलिंडर की कीमत कम थी। अब दाम बहुत बढ़ गए हैं। प्रतिमाह 400 से अधिक रुपयों का नुकसान बजट को बिगाड़ रहा है। ऐसे में सब्सिडी वापस लेने का फैसला लिया है।
तीन साल में 51 रुपये बढ़ी कीमत
तीन साल में सब्सिडी वाले सिलिंडर के दाम में 51 रुपये बढ़े। जनवरी 2016 में 711 रुपये का सिलिंडर था। इस पर 250 रुपये सब्सिडी थी। यानी 461 रुपये में सिलिंडर पड़ता था। नवंबर 2018 में दाम 982.50 रुपये पहुंच गए हैं। इसमें सब्सिडी 470 रुपये मिल रही है। इसमें होम डिलीवरी के अलग से 50 रुपये लिए जाते हैं।
एक साल में 203 रुपये महंगा हुआ नॉन सब्सिडी सिलिंडर
एक साल में नॉन सब्सिडी सिलिंडर 203 रुपये महंगा हुआ है। नवंबर 2017 में दाम 779 रुपये था। नवंबर 2018 में दाम 982.50 रुपये पहुंच गए। पहल योजना से न जुड़ने वाले उपभोक्ताओं को बाजार कीमत पर सिलिंडर खरीदना पड़ता है।