एचआईवी पीड़ितों को पेंशन, बस पास देने की तैयारी
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हिमाचल में एचआईवी पीड़ितों को पेंशन और बस पास देने की तैयारी है। स्वास्थ्य महकमे ने सरकार को दिल्ली और चंडीगढ़ की तर्ज पर पेंशन देने का प्रस्ताव भेजा है। प्रदेश में दस लाख लोगों की जांच की गई है, जिसमें 8,091 लोग एचआईवी पॉजीटिव पाए गए हैं। 2,879 पीड़ितों का इलाज चल रहा है जबकि 3,172 की जांच हो रही है।
हमीरपुर जिले में पीड़ितों की संख्या ज्यादा है। यहां 1,057 लोगों का इलाज चल रहा है। प्रदेश भर में एचआईवी पीड़ितों में महिलाओं की संख्या अधिक है। यह खुलासा बुधवार को राजधानी में ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड, राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी और प्रदेश वॉलंटियर हेल्थ एसोसिएशन की कार्यशाला में हुआ। कार्यशाला की अध्यक्षता स्वास्थ्य निदेशक डॉ. डीएस गुरंग ने की।
उन्होंने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव लोगों को बस पास देने के लिए एचआरटीसी के साथ बैठक हुई है। वर्तमान में पीड़ित और एक तीमारदार को आने-जाने का किराया लौटाया जाता है। इसमें समय ज्यादा लगता है। लिहाजा, इन्हें बस पास देने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार से मंजूरी मिलने के बाद पेंशन पर भी काम शुरू कर दिया जाएगा।
हिमाचल में एड्स के मामले बढ़ने के मुख्य कारण
-प्रदेश का मशहूर पर्यटन स्थल होना
-प्रवासी मजदूरों का हिमाचल में आना
-प्रदेश से बाहर जाने वाले ट्रक ड्राइवर
स्टेटस बताना जरूरी नहीं
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. डीएस गुरंग ने बताया कि किसी भी कर्मचारी को नौकरी के दौरान एचआईवी स्टेटस बताना अनिवार्य नहीं है। स्कूली बच्चों से भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।
परिवार को बताने में लग गए पांच साल
कार्यशाला में पहुंचे एक पूर्व सैनिक ने बताया कि वे ड्यूटी के दौरान 1990 में बीमारी की चपेट में आ गए। पुणे में इलाज के बाद एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चला। 42 साल की उम्र में 2002 में रिटायरमेंट ले ली। साल 2010 में इलाज शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस बारे में परिवार को बताने में उन्हें पांच साल लग गए।