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Shimla News: सूखे जैसे हालत से मटर की फसल बरबाद
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सूखे जैसे हालात से संकट
में पहाड़ी मटर की फसल
बारिश न होने से खेतों में ही सूख रहे पौधे
कृषि विभाग ने विकास खंडों से मांगी नुकसान की रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। लंबे समय से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालातों के चलते शिमला जिले में पहाड़ी मटर की फसल पर संकट पैदा हो गया है।
नमी न होने से खेतों में ही मटर की सफल सूख रही है। निचले क्षेत्रों में मटर की फसल लग चुकी है जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मटर की बुआई अभी होनी है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में किसानों ने मटर की बुआई कर ली है और पौधे जमीन से बाहर आ गए हैं वहां अधिक नुकसान हो रहा है। सूखे के कारण मटर की बिजाई भी प्रभावित हो रही है। सूखे से फसल प्रभावित होने के चलते कृषि विभाग ने विकास खंडों से नुकसान की रिपोर्ट मांग ली है।
शिमला जिला और मंडी के करसोग में रबी सीजन की मटर की फसल किसानों की आर्थिकी का मुख्य साधन है। शिमला की ढली मंडी में मटर का करोड़ों का कारोबार होता है। सीजन के दौरान शिमला, किन्नौर, करसोग और सिरमौर से ढली मंडी में पहुंचने वाला मटर दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कोलकाता और बंगलूरू तक भेजा जाता है। अकेले शिमला जिले में सालाना करीब 81 हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन होता है।
किसान सभा के सदस्य जयशिव ठाकुर ने बताया कि सूखे के कारण मटर की फसल को भारी नुकसान हो रहा है। ठंड बढ़ने के कारण पाला पड़ने से भी फसल प्रभावित हो रही है। बारिश न होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार को नुकसान का आंकलन कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
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ढली मंडी आढ़ती एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमन सूद ने बताया कि समय से बारिश न होने के कारण मटर का सीजन लेट हो सकता है। आने वाले दिनों में भी सूखे की स्थिति बनी रही तो फसल प्रभावित होने की संभावना है जिससे किसानों के अलावा सब्जी कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विकास खंडों से मंगवाई नुकसान की रिपोर्ट
बारिश न होने से मटर की फसल को नुकसान की संभावना है। सूखे जैसी स्थिति से कुछ क्षेत्रों में मटर की बुआई लेट हो गई है। विकास खंडों से फसल को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। पाले से बचाव के लिए धुआं लगाने की परंपरागत तकनीक अपना सकते हैं। हल्की सिंचाई भी कारगर रहती है। जब तक बारिश नहीं होती खाद कीटनाशक का प्रयोग न करें।
- अजब कुमार नेगी उपनिदेशक, कृषि विभाग
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में पहाड़ी मटर की फसल
बारिश न होने से खेतों में ही सूख रहे पौधे
कृषि विभाग ने विकास खंडों से मांगी नुकसान की रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। लंबे समय से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालातों के चलते शिमला जिले में पहाड़ी मटर की फसल पर संकट पैदा हो गया है।
नमी न होने से खेतों में ही मटर की सफल सूख रही है। निचले क्षेत्रों में मटर की फसल लग चुकी है जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मटर की बुआई अभी होनी है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में किसानों ने मटर की बुआई कर ली है और पौधे जमीन से बाहर आ गए हैं वहां अधिक नुकसान हो रहा है। सूखे के कारण मटर की बिजाई भी प्रभावित हो रही है। सूखे से फसल प्रभावित होने के चलते कृषि विभाग ने विकास खंडों से नुकसान की रिपोर्ट मांग ली है।
शिमला जिला और मंडी के करसोग में रबी सीजन की मटर की फसल किसानों की आर्थिकी का मुख्य साधन है। शिमला की ढली मंडी में मटर का करोड़ों का कारोबार होता है। सीजन के दौरान शिमला, किन्नौर, करसोग और सिरमौर से ढली मंडी में पहुंचने वाला मटर दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कोलकाता और बंगलूरू तक भेजा जाता है। अकेले शिमला जिले में सालाना करीब 81 हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन होता है।
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किसान सभा के सदस्य जयशिव ठाकुर ने बताया कि सूखे के कारण मटर की फसल को भारी नुकसान हो रहा है। ठंड बढ़ने के कारण पाला पड़ने से भी फसल प्रभावित हो रही है। बारिश न होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार को नुकसान का आंकलन कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
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ढली मंडी आढ़ती एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमन सूद ने बताया कि समय से बारिश न होने के कारण मटर का सीजन लेट हो सकता है। आने वाले दिनों में भी सूखे की स्थिति बनी रही तो फसल प्रभावित होने की संभावना है जिससे किसानों के अलावा सब्जी कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विकास खंडों से मंगवाई नुकसान की रिपोर्ट
बारिश न होने से मटर की फसल को नुकसान की संभावना है। सूखे जैसी स्थिति से कुछ क्षेत्रों में मटर की बुआई लेट हो गई है। विकास खंडों से फसल को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। पाले से बचाव के लिए धुआं लगाने की परंपरागत तकनीक अपना सकते हैं। हल्की सिंचाई भी कारगर रहती है। जब तक बारिश नहीं होती खाद कीटनाशक का प्रयोग न करें।
- अजब कुमार नेगी उपनिदेशक, कृषि विभाग