फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   pather ?fair at dhami shimla himachal

ऐसा मेला जहां एक दूसरे पर मारते हैं पत्थर

Fri, 24 Oct 2014 03:32 PM IST
Updated Fri, 24 Oct 2014 03:32 PM IST
विज्ञापन
pather ?fair at dhami shimla himachal

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला में दिवाली पर्व के अगले दिन अनोखी परंपराओं वाला पत्थर मेला धूमधाम से मनाया जाता है।

विज्ञापन


शिमला से 26 किलोमीटर दूर धामी क्षेत्र में मनाए जाने वाले इस मेले की खासियत यह है कि यहां दो समुदाय के लोग एक दूसरे पर पत्थर मारते हैं।

यह पत्थर मारने का दौर उस समय तक चलता रहता है जब तक कि दोनों तरफ से खेल में भाग लेने वाले लोगों में से किसी एक का सिर लहुलूहान न हो जाए।

ऐसा होने पर उस शख्स का खून मां भीमा काली के मंदिर में चढ़ाया जाता हैं। पत्थर मेले में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग सदियों से भाग लेते हैं और खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं।

मानव बलि रोकने के लिए सती हुई रानी

pather ?fair at dhami shimla himachal

मान्यता है कि धामी रियासत में मां भीमा काली के मंदिर में हर वर्ष इसी दिन परंपरा के अनुसार मानव बलि दी जाती थी। यहां पर राज करने वाले राणा परिवार की रानी इस बलि प्रथा को रोकना चाहती थी।

इसके लिए रानी यहां के चौराहे में सती हो गई और नई पंरपरा शुरू की गई। इस स्‍थान का खेल का चौरा रखा गया है और यहां पर ही पत्‍थर का मेला मनाया जाता है।

धामी रियासत के राज परिवार की अगुवाई में सदियों से यह परंपरा निभाई जा रही है। राज परिवार के उत्तराधिकारी राणा जगदीप सिंह ने बताया कि लोग श्रद्धा और निष्ठा से इस इस परंपरा को निभाते हैं। इस पर्व में धामी, शहराह, कालीहट्टी, सुन्नी अर्की दाड़लाघाट, चनावग, पनोही व शिमला के आसपास के क्षेत्र के लोग भाग लेते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे मनाया जाता है पत्‍थर का मेला

pather ?fair at dhami shimla himachal

आज दोपहर तीन बजे राज परिवार व राज पुरोहितों द्वारा श्री नरसिंह भगवान के मंदिर से पूजा अर्चना के बाद एक जन समूह ढोल नगाड़ों के साथ खेल चौरा के लिए रवाना होगा।

राज परिवार के साथ कटैड़ू और तुनड़ु, दगोई, जठोटी खुंद के लोग होते हैं जबकि दूसरी टोली में जमोगी खुंद के लोग शामिल होते हैं। इसमें गलोग, पलानिया और आसपास के स्‍थानीय लोग मां सती के स्मारक के पास एकत्रित होते हैं।

दोनों टोलियां पूजा अर्चना के बाद पत्‍थर का खेल शुरू करते है। यह खेल उस समय तक चलता है जब कि दोनों टोलियों में से किसी भी एक व्यक्ति का सिर लहूलुहान न हो जाए। ऐसा होने के बाद खेल खत्म हो जाता है और उक्त शख्स के खून को मां भीमा काली के मंदिर में चढ़ाया जाता है।

राज परिवार के कुल पुरोहित देंवेंद्र शर्मा ने बताया कि वर्षों से चली आ रही परंपरा को क्षेत्रवासी और राज परिवार श्रद्धा और निष्‍ठा से मनाता आया है और मनाता रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed