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फ्रासबीन के दामों में उछाल
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Parsbeen rate hike in shimla
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ढली मंडी में 65 रुपये किलो तक बिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। फ्रासबीन के दामों में आए उछाल से किसानों के चेहरों पर दो माह बाद रौनक लौट आई है। ढली मंडी में बेल वाली फ्रासबीन 20 और बूटे वाली फ्रासबीन 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है। किसान इसे अब तक का सबसे अच्छा रेेट मान रहे हैं।
प्रदेश की सबसे बड़ी सब्जी मंडी सोलन में फ्रासबीन 50 रुपये किलो तक बिक रही है। दो माह पहले फ्रासबीन का रेट 15 रुपये किलो तक था। आढ़ती विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि बारिश होने से फ्रासबीन के दामों में उछाल आया है। एपीएमसी सचिव ढली ओम प्रकाश ने कहा कि शिमला के मशोबरा, ठियोग और बसंतपुर में फ्रासबीन की अच्छी पैदावार होती है। प्रगतिशील किसान प्रीतम ठाकुर ने बताया कि फ्रासबीन दो किस्मों की होती है। बेल वाली फ्रासबीन को कम और बूटे वाली फ्रासबीन को अधिक रेट मिलते हैं। फ्रासबीन की फसल सबसे कम 60 दिन में तैयार हो जाती है। इस साल टमाटर के दामों में भारी गिरावट आने से किसानों की दवाईयों का खर्चा भी पूरा नहीं हो सका था लेकिन अब फ्रासबीन के दाम अच्छे मिलने से किसान इस घाटे के पूरे होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
ढली मंडी में शिमला मिर्च 15 से 25 रुपये और सोलन मंडी में 20 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रही है। किसान देवेंद्र ठाकुर, राजेश और सुरेश ने बताया कि इस बार कोई भी सब्जी अच्छे दामों पर नहीं बिक पाई जिससे परिवार का खर्चा चलाने में मुश्किल होगी। ।
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दस क्विंटल दिया है किसानों को : डॉ. अर्जुन
कृषि विभाग के एडीओ डॉ. अर्जुन के अनुसार जिले में इस वर्ष फ्रासबीन का दस क्विंटल से अधिक बीज किसानों को उपदान पर उपलब्ध करवाया है। इसमें फ्रासबीन की प्रमुख किस्म कंटेंडरस, वैष्णवी और कोमल ग्रीन बंडर शामिल है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। फ्रासबीन के दामों में आए उछाल से किसानों के चेहरों पर दो माह बाद रौनक लौट आई है। ढली मंडी में बेल वाली फ्रासबीन 20 और बूटे वाली फ्रासबीन 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है। किसान इसे अब तक का सबसे अच्छा रेेट मान रहे हैं।
प्रदेश की सबसे बड़ी सब्जी मंडी सोलन में फ्रासबीन 50 रुपये किलो तक बिक रही है। दो माह पहले फ्रासबीन का रेट 15 रुपये किलो तक था। आढ़ती विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि बारिश होने से फ्रासबीन के दामों में उछाल आया है। एपीएमसी सचिव ढली ओम प्रकाश ने कहा कि शिमला के मशोबरा, ठियोग और बसंतपुर में फ्रासबीन की अच्छी पैदावार होती है। प्रगतिशील किसान प्रीतम ठाकुर ने बताया कि फ्रासबीन दो किस्मों की होती है। बेल वाली फ्रासबीन को कम और बूटे वाली फ्रासबीन को अधिक रेट मिलते हैं। फ्रासबीन की फसल सबसे कम 60 दिन में तैयार हो जाती है। इस साल टमाटर के दामों में भारी गिरावट आने से किसानों की दवाईयों का खर्चा भी पूरा नहीं हो सका था लेकिन अब फ्रासबीन के दाम अच्छे मिलने से किसान इस घाटे के पूरे होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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ढली मंडी में शिमला मिर्च 15 से 25 रुपये और सोलन मंडी में 20 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रही है। किसान देवेंद्र ठाकुर, राजेश और सुरेश ने बताया कि इस बार कोई भी सब्जी अच्छे दामों पर नहीं बिक पाई जिससे परिवार का खर्चा चलाने में मुश्किल होगी। ।
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दस क्विंटल दिया है किसानों को : डॉ. अर्जुन
कृषि विभाग के एडीओ डॉ. अर्जुन के अनुसार जिले में इस वर्ष फ्रासबीन का दस क्विंटल से अधिक बीज किसानों को उपदान पर उपलब्ध करवाया है। इसमें फ्रासबीन की प्रमुख किस्म कंटेंडरस, वैष्णवी और कोमल ग्रीन बंडर शामिल है।