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मिसाल: माता-पिता ने शोध के लिए बेटे का शव मेडिकल कॉलेज को किया दान, समाजसेवी होने का निभाया फर्ज
Sat, 28 Oct 2023 11:12 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, नेरचौक (मंडी)
संवाद न्यूज एजेंसी, नेरचौक (मंडी)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 28 Oct 2023 11:12 PM IST
सार
समाजसेवी दंपती ने अपने दिव्यांग बेटे की मौत के बाद उसका शव लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज को शोध के लिए दान कर दिया है।
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लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
समाजसेवा करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए हर समय तन, मन, धन न्योछावर करने को तैयार रहना पड़ता है। यह बात सार्थक की है बल्ह क्षेत्र के समाजसेवी दंपती ने। उन्होंने अपने दिव्यांग बेटे की मौत के बाद उसका शव लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज को शोध के लिए दान कर दिया है। पिता बलविंद्र जेबीटी शिक्षक हैं, जबकि माता मीनाक्षी गृहिणी हैं। उनका कहना है कि बेटे के शरीर पर मेडिकल के प्रशिक्षुओं की ओर से जो शोध किया जाएगा, वह देश और दुनिया के लिए बहुत उपयोगी होगा। दरअसल लंबी बीमारी के बाद 16 वर्षीय दिव्यांग किशोर का निधन हो गया था। उनके माता-पिता ने रिश्तेदारों, सगे-संबंधियों के साथ बात करके शव दान करने का फैसला लिया।
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शनिवार को बेटे निधन के बाद उन्होंने शव को विभाग को सौंप दिया। मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रदीप कश्यप ने बताया कि बल्ह क्षेत्र के चढि़यारा गुटकर निवासी 16 वर्षीय दिव्यांग वंश कई दिनों से बीमार चल रहा था। बताया जा रहा है कि बीमारी के चलते शनिवार सुबह 8:40 बजे उसका लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज में लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके बाद उसके पिता बलविंद्र ने बेटे के शव को मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत प्रशिक्षुओं के लिए दिया है। मेडिकल कॉलेज एनाटॉमी विभाग के डॉ. प्रदीप कश्यप और डॉ. पंकज सोनी सहित स्टाफ सदस्यों ने इसके लिए मृत के परिजनों का आभार जताया है।
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