Kargil Vijay Diwas 2024: नौजवानों को प्रेरणा और साहस देता है जवानों का बलिदान
सूबेदार मेजर संजय कुमार इन दिनों एनडीए पुणे प्रशिक्षण केंद्र में तैनात हैं। वे विशेष रूप से द्रास में विजय दिवस मनाने गए हैं। उन्होंने बताया कि 4 और 5 जुलाई 1999 का वो दिन उन्हें आज भी याद है।
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कारगिल में 1999 में पाकिस्तान के साथ चले दो माह तक के युद्ध में हिमाचल प्रदेश के वीर सपूतों ने अदम्य साहस का परिचय देते ह़ुए मिसाल पेश की। कारगिल युद्ध में प्रदेश के 52 वीर सपूतों ने प्राणों की आहुतियां दीं। इन जवानों की शहादत आज भी युवाओं को कठित हालात में हौसला बनाए रखते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। नौजवानों की प्रतिमाएं देख फौज में शामिल होकर देश सेवा के लिए प्रेरित हो रहे हैं। ऑपरेशन विजय में सेना के 527 जवान बलिदान हुए। इनमें से 52 हिमाचली जवान थे। हिमाचल के 52 बलिदानियों में सबसे अधिक कांगड़ा जिला के 15 जवान शामिल थे।
पालमपुर के कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत, जबकि बिलासपुर के राइफलमैन संजय कुमार को सर्वोच्च गैलेंट्री अवार्ड परमवीर चक्र से नवाजा गया था। हिमाचल के सपूतों को दो अशोक चक्र, 10 महावीर चक्र, 18 कीर्ति चक्र, 51 वीर चक्र, 89 शौर्य चक्र और 985 अन्य मेडल मिले हैं। ब्रिगेडियर (सेवानिवृत) खुशाल ठाकुर के नेतृत्व में 23 जुलाई को 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया था। इस यूनिट को राष्ट्रपति ने 52 वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया था। 25 साल पहले जो जख्म कारगिल युद्ध में मिले थे वह जख्म आज तक नहीं भर सके हैं। कारगिल युद्ध में किसी ने बेटा खोया, किसी ने भाई तो किसी ने पिता। फिर में हिमाचलियों में अपने बेटों को सेना में भेजना की उत्साह कम नहीं हुआ है।
सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार मेजर संजय कुमार द्रास में कारगिल विजय दिवस मनाया। संजय कुमार ने वहां स्थित मेमोरियल में कारगिल युद्ध में शहीद हुए साथियों को श्रद्धांजलि दीं। सूबेदार मेजर संजय कुमार इन दिनों एनडीए पुणे प्रशिक्षण केंद्र में तैनात हैं। वे विशेष रूप से द्रास में विजय दिवस मनाने गए हैं। उन्होंने बताया कि 4 और 5 जुलाई 1999 का वो दिन उन्हें आज भी याद है। दिन और रात लगातार चले ऑपरेशन के दौरान दो गोलियां उनके घुटने में लगी थीं और दो शरीर के अन्य भाग में। वे अपने दो साथियों को भी खो चुके थे। इसके बावजूद मश्को वैली द्रास में प्वाइंट 4875 पर कब्जा किया।
दुश्मन की यूनिवर्सल मशीनगन छीन कर तीन पाकिस्तानी को मार गिराया था। ऑपरेशन के दौरान 11 जवानों में से दो शहीद और आठ घायल हुए थे। जबकि एक जवान सुरक्षित था। देश के लिए प्राणों की आहुतियां देने वाले जब साथी वीर सैनिक शहीद हुए उन्हें देख सांसे थम सी गई थीं। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध के बाद लखनऊ, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, देहरादून और विदेश में सेवाएं दी। सूबेदार मेजर संजय कुमार देश सेवा में 30 साल देश की रक्षा करने के बाद 28 फरवरी 2026 में देश सेवानिवृत्त होंगे।