फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Panjyanu villagers doing natural farming karsog mandi himachal pradesh

सौ फीसदी प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ा ये गांव, 40 बीघा पर उगाईं जहर मुक्त फसलें

Mon, 02 Sep 2019 05:45 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी/करसोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी/करसोग Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 02 Sep 2019 05:45 PM IST
विज्ञापन
Panjyanu villagers doing natural farming karsog mandi himachal pradesh
- फोटो : अमर उजाला

कीटनाशकों और रासायनिक खादों का प्रयोग खेत खलिहानों में बढ़ रहा है। लोगों को चिंता सता रही है कि क्या उन तक पहुंचने वाली सब्जियां कैंसर को बढ़ावा देने वाली तो नहीं? इसी दौर के बीच करसोग उपमंडल की पांगणा उप तहसील के पंजयाणु गांव के किसानों ने सौ फीसदी प्राकृतिक खेती का प्रण लिया है।

विज्ञापन


गांव में प्राकृतिक खेती 40 बीघा जमीन पर की जा रही है। गांव के 30 परिवार स्वेच्छा से इसे अपना चुके हैं। धीरे-धीरे सारा गांव सौ फीसदी प्राकृतिक खेती वाला गांव बनने की राह पर अग्रसर है। खास बात है कि गांव में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी भूमिका महिलाएं निभा रही हैं।
विज्ञापन


महिला किसान ने जगाई अलख
पंजयाणु गांव के लोगों को प्राकृतिक खेती की ओर मोड़ने और इससे जोड़ने की अलख गांव की निवासी लीना शर्मा ने जगाई। उन्होंने खुद उदाहरण स्थापित कर लोगों को जहर मुक्त खेती के लिए प्रेरित किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्राकृतिक खेती से जुड़ी पंजयाणु की किसान सावित्री देवी, शीला, गुलाबी देवी, मीना, किरण और गीता हों या कांता, ममता, तारा, शांता, हेमलता और मीरा, ये सब महिलाएं खेत खलिहान और घर के कामकाज से निवृृत्त होकर दोपहर बाद एक जगह इकट्ठी होती हैं। अपनी-अपनी गाय का गोबर व गोमूत्र, जड़ीबूटियों की पत्तियां एक जगह एकत्र करती हैं और मिलकर जीवामृत, घनजीवामृत व अग्निअस्त्र जैसी दवाईयां बनाती हैं।

इस तरह फायदेमंद है खेती

प्राकृतिक खेती से खाद, केमिकल स्प्रे व दवाइयां खरीदने के भी पैसे बचते हैं। केवल किसान के पास देसी नस्ल की गाय होनी चाहिए, जिससे वे खाद व देसी कीट नाशक बना सकता है। इनके इस्तेमाल से प्रकृति भी स्वच्छ रहती है। दूसरा इस पद्धति में क्यारियां, मेढ़ें बनाकर मिश्रित खेती की जाती है, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने में भी यह बहुत कारगर है। इसमें बीज कम लगता है जबकि उत्पादकता ज्यादा है।

सरकार दे रही यह सहायता
- देसी गाय खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की सहायता 
- किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण
- 250 लीटर के ड्रम लेने पर लागत पर 75 प्रतिशत सब्सिडी 
- पशुशाला में फर्श डालने,  गोबर के चैंबर के लिए आठ हजार
- संसाधन भंडार पर 10 हजार रुपये के अनुदान का प्रावधान है 

जिले के तीन हजार किसानों ने अपनाई शून्य लागत प्राकृतिक खेती
जिला उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि मंडी जिले में शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इस साल जिले के 3 हजार किसानों ने शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाई है। जहर मुक्त खेती से भयंकर बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही लागत शून्य होने के चलते किसानों के खर्चों की बचत, मिश्रित खेती तथा अच्छी पैदावार से उनकी आमदनी दोगुनी करने में भी यह सहायक है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed