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64 साल बाद शुक्रिया करने भारत आया पाकिस्तानी परिवार

Tue, 23 Jun 2015 06:20 PM IST
Updated Tue, 23 Jun 2015 06:20 PM IST
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pakistani faimly came india to say thanks.

1948 में भड़के दंगों में जब दो समुदाय के लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे बने हुए थे तो दूसरी तरफ एक हिंदू राजपूत महिला ज्ञान देवी सद्भावना की मिसाल कायम कर रही थी। चार साल का बच्चा गहरे घावों के दर्द से तड़प रहा था।

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इस बच्चे की मां खुद को और अपने बच्चे की जिंदगी के लिए हाथ-पांव मार रही थी। दंगे में बच्चा अपने पिता को खो चुका था। ऐसे में इस राजपूत महिला ने मां-बेटे को अपने घर में पनाह देकर उन्हें नया जीवनदान दिया।
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उस वक्त को याद कर आज भी हबीब अहमद की आंखें भर आती हैं। क्योंकि वो बच्चा कोई और नहीं बल्कि हबीब अहमद ही थे। दरअसल, हबीब अहमद उस महिला का शुक्रिया करने लाहौर (शाहदरा) से सपरिवार कांगड़ा पहुंचे हैं।
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ज्ञान देवी ने की थी हिफाजत

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हबीब सोमवार को कांगड़ा के गुप्त गंगा में ज्ञान देवी के घर पहुंचे लेकिन ज्ञान देवी का निधन हो चुका है। ऐसे में हबीब ने ज्ञान देवी के बेटे तरसेम सिंह गुलेरिया और उनके परिवार के साथ कुछ समय बिताया। हबीब ने तरसेम के परिवार को बताया कि किस तरह ज्ञान देवी ने उनकी हिफाजत की थी।

हबीब के साथ उनकी पत्नी सलीमा बीबी, बेटा, बहू और पोता भी आए हैं। वे परिवार के साथ हरनोटा में अपने रिश्तेदारों के पास रुके हैं। हबीब के अनुसार उनका जन्म 1944 में गुलेर के पास मंगवाल समरालियां गांव में हुआ था। अब यह गांव पौंग डैम में समा चुका है।

पाकिस्तान में हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने की पूरी आजादी

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हबीब के अनुसार 1952 में जब वे आठ वर्ष के थे, तो उनकी माता और उनको मामा ने पाकिस्तान बुला लिया था। हबीब के अनुसार पाकिस्तान में हिंदू परिवारों के पूजा-पाठ में कोई दखलंदाजी नहीं करता।

हिंदू अपने त्योहारों दीवाली, होली को उत्साह से मनाते हैं। वहां हर कोई अपने धर्म में खुश है। करीब 64 साल बाद भारत आने पर हबीब अहमद ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की कि वीजा प्रणाली आसान बनाई जाए ताकि वे लोग जब चाहें अपने परिजनों से मिल सकें।

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