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Shimla News: पद्मदेव कॉम्प्लेक्स जर्जर, टपक रही छत, दीवारें टूटीं
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लापरवाह निगम, बदहाल परिसर-1...फोटो सहित
राजधानी में कारोबार बढ़ाने, शहरवासियों को एक छत के नीचे कई सुविधाएं देने और कमाई के लिए बनाए गए नगर निगम के व्यावसायिक परिसर अब जर्जर हैं। नगर निगम हर महीने इनसे लाखों रुपये की कमाई तो कर रहा है लेकिन इनकी खस्ता होती हालत सुधारने के लिए पाई तक नहीं खर्च रहा। छत से टपकता पानी, उखड़ रहा प्लास्टर, टूटी हुईं खिड़कियां और सीलन भरी दीवारों से ये परिसर बदहाल हो गए हैं। पेश है रिपोर्ट -
बारिश में टपक रही छत
आम जनता से लेकर कर्मचारी भी परेशान
40 से ज्यादा दुकानें, दो रेस्तरां, अस्पताल और निगम के कई दफ्तर वाले परिसर की नहीं ली जा रही सुध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान पर बना नगर निगम का चार मंजिला व्यावसायिक परिसर पद्मदेव कॉम्प्लेक्स जर्जर है। बारिश होते ही परिसर की छत टपकने लगती है। इसका पानी न सिर्फ दुकानों में घुस रहा है बल्कि नगर निगम दफ्तर की फाइलें भी खराब कर रहा है।
परिसर की दीवारों से प्लास्टर उखड़ गया है। तीसरी और चौथी मंजिल की ज्यादातर दीवारों से प्लास्टर झड़ चुका है। टपकती छत के कारण दुकानों की लकड़ी की सीलिंग सड़ गई है। हालत यह है कि बारिश शुरू होते ही दुकानों के भीतर तिरपाल रखकर सामान खराब होने से बचाना पड़ता है। परिसर की ज्यादातर खिड़कियों के शीशे गायब हैं। सीढ़ियां टूटी हुई हैं और कई जगह सरिया बाहर निकल आया है। इन दो मंजिलों में ज्यादातर दुकानें हैं। नगर निगम के कैश काउंटर भी यहीं बने हैं। टपकती छत और सीलन से यहां फाइलें भी खराब हो रही हैं। बिजली के तार बेतरतीब पड़े हैं। इनसे हादसे का खतरा बना हुआ है।
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साल 1992 में बने परिसर में 40 से ज्यादा दुकानें हैं। पहली और दूसरी मंजिल के आधे हिस्से में अस्पताल और प्रेस क्लब हैं। यहां सीलन के कारण दीवारें बदसूरत हो चुकी हैं। सीढ़ियों से गंदा पानी परिसर में घुस रहा है।
खराब हो रहीं फाइलें और नक्शे
आम जनता के लिए टैक्स, पानी बिल, किराया आदि के भुगतान के लिए नगर निगम के कैश काउंटर यहां बनाए हैं। रोजाना सैकड़ों लोग यहां आते हैं। जर्जर हालत देखकर लोग भी हैरान हैं। भवनों के नक्शे पास करने वाली वास्तुकार शाखा, शहर में दुकानों, पार्किंग व अन्य निगम संपत्तियों का लेखा-जोखा रखने वाली संपदा शाखा भी यहां चल रही है। इनका रिकॉर्ड सीलन और पानी घुसने से खराब हो रहा है। इससे कर्मचारी परेशान हैं। निगम ने वास्तुकार शाखा की मरम्मत करवाई है और अब संपदा शाखा का भी कायाकल्प करने की तैयारी है, लेकिन परिसर का बाकी हिस्सा जर्जर बना हुआ है।
निगम को हो रही लाखों की कमाई
नगर निगम को इस परिसर से हर माह लाखों रुपये की कमाई हो रही है। परिसर की टैरेस का किराया ही करीब दो लाख रुपये प्रतिदिन है। परिसर में 40 से ज्यादा दुकानें हैं, जो ज्यादातर लीज पर दी गई हैं। कई चैंबर भी किराये पर दिए हैं। इसके अलावा दो बड़े रेस्तरां और एक अस्पताल भी यहां चल रहा है।
किसने क्या कहा
सीलन भरी दुकानें
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की हालत खस्ता है। दीवारों में सीलन है। छत से पानी टपक रहा है। इससे कारोबार पर असर पड़ रहा है। निगम को इसकी हालत सुधारनी चाहिए।
-राहुल, कारोबारी
बारिश होते ही टपकती छत
बारिश होते ही रेस्तरां की छत टपकने लगती है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। सामान भी खराब हो रहा है। परिसर के शीशे गायब हैं और दीवारें टूट चुकी हैं।
-बिट्टू कुमार, रेस्तरां संचालक
आज तक नहीं की मरम्मत
जब से निगम ने यह भवन बनाया है, तब से इसकी मरम्मत नहीं की गई। कई बार शिकायत करने के बावजूद निगम ने इसकी सुध नहीं ली। मरम्मत होनी चाहिए।
-किशोर कुमार, कारोबारी
सड़ गई सीलिंग, रखना पड़ रहा तिरपाल
छत टपकने से दुकान की सीलिंग सड़ गई है। बारिश होते ही दुकान के भीतर सामान तिरपाल से ढकना पड़ता है। परिसर की सभी मंजिलों में पानी घुस रहा है।
-पंकज कुमार, कारोबारी
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राजधानी में कारोबार बढ़ाने, शहरवासियों को एक छत के नीचे कई सुविधाएं देने और कमाई के लिए बनाए गए नगर निगम के व्यावसायिक परिसर अब जर्जर हैं। नगर निगम हर महीने इनसे लाखों रुपये की कमाई तो कर रहा है लेकिन इनकी खस्ता होती हालत सुधारने के लिए पाई तक नहीं खर्च रहा। छत से टपकता पानी, उखड़ रहा प्लास्टर, टूटी हुईं खिड़कियां और सीलन भरी दीवारों से ये परिसर बदहाल हो गए हैं। पेश है रिपोर्ट -
बारिश में टपक रही छत
आम जनता से लेकर कर्मचारी भी परेशान
40 से ज्यादा दुकानें, दो रेस्तरां, अस्पताल और निगम के कई दफ्तर वाले परिसर की नहीं ली जा रही सुध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान पर बना नगर निगम का चार मंजिला व्यावसायिक परिसर पद्मदेव कॉम्प्लेक्स जर्जर है। बारिश होते ही परिसर की छत टपकने लगती है। इसका पानी न सिर्फ दुकानों में घुस रहा है बल्कि नगर निगम दफ्तर की फाइलें भी खराब कर रहा है।
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परिसर की दीवारों से प्लास्टर उखड़ गया है। तीसरी और चौथी मंजिल की ज्यादातर दीवारों से प्लास्टर झड़ चुका है। टपकती छत के कारण दुकानों की लकड़ी की सीलिंग सड़ गई है। हालत यह है कि बारिश शुरू होते ही दुकानों के भीतर तिरपाल रखकर सामान खराब होने से बचाना पड़ता है। परिसर की ज्यादातर खिड़कियों के शीशे गायब हैं। सीढ़ियां टूटी हुई हैं और कई जगह सरिया बाहर निकल आया है। इन दो मंजिलों में ज्यादातर दुकानें हैं। नगर निगम के कैश काउंटर भी यहीं बने हैं। टपकती छत और सीलन से यहां फाइलें भी खराब हो रही हैं। बिजली के तार बेतरतीब पड़े हैं। इनसे हादसे का खतरा बना हुआ है।
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साल 1992 में बने परिसर में 40 से ज्यादा दुकानें हैं। पहली और दूसरी मंजिल के आधे हिस्से में अस्पताल और प्रेस क्लब हैं। यहां सीलन के कारण दीवारें बदसूरत हो चुकी हैं। सीढ़ियों से गंदा पानी परिसर में घुस रहा है।
खराब हो रहीं फाइलें और नक्शे
आम जनता के लिए टैक्स, पानी बिल, किराया आदि के भुगतान के लिए नगर निगम के कैश काउंटर यहां बनाए हैं। रोजाना सैकड़ों लोग यहां आते हैं। जर्जर हालत देखकर लोग भी हैरान हैं। भवनों के नक्शे पास करने वाली वास्तुकार शाखा, शहर में दुकानों, पार्किंग व अन्य निगम संपत्तियों का लेखा-जोखा रखने वाली संपदा शाखा भी यहां चल रही है। इनका रिकॉर्ड सीलन और पानी घुसने से खराब हो रहा है। इससे कर्मचारी परेशान हैं। निगम ने वास्तुकार शाखा की मरम्मत करवाई है और अब संपदा शाखा का भी कायाकल्प करने की तैयारी है, लेकिन परिसर का बाकी हिस्सा जर्जर बना हुआ है।
निगम को हो रही लाखों की कमाई
नगर निगम को इस परिसर से हर माह लाखों रुपये की कमाई हो रही है। परिसर की टैरेस का किराया ही करीब दो लाख रुपये प्रतिदिन है। परिसर में 40 से ज्यादा दुकानें हैं, जो ज्यादातर लीज पर दी गई हैं। कई चैंबर भी किराये पर दिए हैं। इसके अलावा दो बड़े रेस्तरां और एक अस्पताल भी यहां चल रहा है।
किसने क्या कहा
सीलन भरी दुकानें
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की हालत खस्ता है। दीवारों में सीलन है। छत से पानी टपक रहा है। इससे कारोबार पर असर पड़ रहा है। निगम को इसकी हालत सुधारनी चाहिए।
-राहुल, कारोबारी
बारिश होते ही टपकती छत
बारिश होते ही रेस्तरां की छत टपकने लगती है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। सामान भी खराब हो रहा है। परिसर के शीशे गायब हैं और दीवारें टूट चुकी हैं।
-बिट्टू कुमार, रेस्तरां संचालक
आज तक नहीं की मरम्मत
जब से निगम ने यह भवन बनाया है, तब से इसकी मरम्मत नहीं की गई। कई बार शिकायत करने के बावजूद निगम ने इसकी सुध नहीं ली। मरम्मत होनी चाहिए।
-किशोर कुमार, कारोबारी
सड़ गई सीलिंग, रखना पड़ रहा तिरपाल
छत टपकने से दुकान की सीलिंग सड़ गई है। बारिश होते ही दुकान के भीतर सामान तिरपाल से ढकना पड़ता है। परिसर की सभी मंजिलों में पानी घुस रहा है।
-पंकज कुमार, कारोबारी