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Himachal: आउटसोर्स, बिजली सहित ये कर्मचारी करेंगे हड़ताल, अस्पतालों-उद्योगों में सेवाएं रहेंगी प्रभावित

Wed, 11 Feb 2026 09:57 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 11 Feb 2026 09:57 PM IST
सार

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के विरोध में12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। 

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Outsourced employees on strike today, services in hospitals and industries to be affected
हड़ताल(सांकेतिक)

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के विरोध में 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। मजदूर संगठनों द्वारा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न फेडरेशनों के आह्वान पर हड़ताल बुलाई गई है। हिमाचल प्रदेश में सीटू के बैनर तले प्रदेश भर में धरने प्रदर्शन होंगे। हड़ताल के चलते प्रदेश में आउटसोर्स कर्मी हड़ताल पर रहेंगे जिसके चलते अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं और उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सीटू के बनैर तले प्रदेश में आशा वर्कर, मिड-डे मील, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आउटसोर्स कर्मी सेवाएं नहीं देंगे। राजधानी शिमला में आईजीएमसी, एम्स चमियाणा, केएनएच, 108 एंबुलेंस सेवाएं, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, नगर परिषद और नगर निगम के आउटसोर्स कर्मी, बिजली परियोजना कर्मी, रेहड़ीफड़ी और तहबाजारी यूनियन, होटल कर्मी, निर्माण मजदूर, मनरेगा मजदूर, उद्योग मजदूर, बैंक कर्मी, बिजली कर्मी, बीएसएनएल, एलआईसी कर्मी हड़ताल पर रहेंगे।

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ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि चार नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकार छीनने का काम कर रहे हैं। इन कानूनों से यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार कमजोर हुआ है। हड़ताल करने की प्रक्रिया को भी कठिन बना दिया गया है। संगठनों का कहना है कि इससे मालिकों को फायदा और मजदूरों को नुकसान होगा। ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलने से स्थायी नौकरियों की संख्या घटेगी और असुरक्षा बढ़ेगी। मजदूर संगठनों ने सरकार से चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग की है। उधर हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश ठाकुर ने बताया कि बिजली कर्मचारी और अभियंता 12 फरवरी को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने तथा पावर सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर की जा रही है। सोलन शहर में भी वीरवार को सबुह 11 बजे से एक बजे तक दो घंटे 11 से 1 बजे तक ऑटो रिक्शा का संचालन बंद रहेगा।

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चार लेबर कोड के विरोध में देशभर के मजदूरों और कर्मियों के आह्वान पर हड़ताल बुलाई गई है। आउट सोर्स कर्मियों का भी हड़ताल को समर्थन मिला है। पुख्ता तरीके से इस हड़ताल के जरिये चार लेबर कोड को लेकर विरोध दर्ज कर इन्हें वापस लेने की मांग उठाई जाएगी।- विजेंद्र मेहरा, प्रदेशाध्यक्ष सीटू

 

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किसान-बागवानों ने दिया है हड़ताल को समर्थन
देशव्यापी हड़ताल को प्रदेश के किसान-बागवान संगठनों ने भी समर्थन का एलान किया है। संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि किसानों बागवानों की घरों से बेदखली, किसान विरोधी ट्रंप टैरिफ, एफटीए पर रोक, विदेशी सेब पर आयात शुल्क 100 प्रतिशत करने और आपदा प्रभावितों को उचित मुआवजा देने की मांग पर हिमाचल किसान सभा और हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने 12 फरवरी की देशव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया है। किसान बागवान संगठन भी वीरवार को प्रदेश भर में धरने -प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाएंगे।

27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे
 हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश ठाकुर ने कहा कि देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता गुरुवार को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने और पाॅवर सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर की जा रही है। लोकेश ठाकुर ने कहा कि पहली बार बिजली कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया है। 

मांगें पूरी न हुईं तो पेंशनर 16 फरवरी को शिमला में करेंगे विधानसभा घेराव
एचआरटीसी परिवहन कल्याण मंच का कहना है कि निगम के पेंशनरों को समय पर पेंशन तक नहीं दी जा रही है। 11 फरवरी को भी पेंशन खाते में नहीं आई है। मंच ने विधानसभा घेराव की चेतावनी दी है। मंच की नाहन इकाई के अध्यक्ष मोहन सिंह ठाकुर ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पेंशनरों को महीने के अंत में पेंशन मिल रही है। उन्होंने कहा कि 16 का स्केल, तीन प्रतिशत डीए सभी महकमों को दे दिया गया है, लेकिन उनको नहीं मिला है। तीन साल से मेडिकल बिलों का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। पेंशनरों के लाखों रुपये के चिकित्सा बिल सरकार के पास लंबित हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनर तंग आर्थिक हालात का सामना कर रहे हैं। यदि सरकार ने उनकी मांगें आने वाले दिनों में नहीं मानीं तो पूरे प्रदेश के पेंशनर शिमला में 16 फरवरी को विधानसभा का घेराव करेंगे।

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