वन रैंक-वन पैंशनः जानिए किसे होगा कितना फायदा?
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वन रैंक, वन पेंशन लागू होने के बाद सिपाही और हवलदार रैंक के पूर्व सैनिकों को पेंशन में सबसे ज्यादा लाभ होने का दावा किया जा रहा है। बिलासपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रकाश चंद ने बताया कि इन रैंक के पूर्व सैनिकों की पेंशन में बेसिक के आधार पर 107 से 114 फीसदी तक फायदा पहुंचेगा।
प्रदेश में इन रैंक के पूर्व सैनिकों की संख्या सबसे अधिक है। कुल सवा लाख पूर्व सैनिकों में से 60 से 70 फीसदी इसी श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि सिपाही और हवलदार 35 से 44 वर्ष में सेवानिवृत्त हो जाते हैं। उन्हें 107 से 114 प्रतिशत तक लाभ मिलेगा। पूर्व सैनिकों की पत्नियों को 61 से 70 प्रतिशत तक फायदे की उम्मीद है।
नायब सूबेदार से सूबेदार मेजर तक के रैंक में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। प्रकाश चंद ने बताया कि वन रैंक, वन पेंशन को लेकर छेड़ा गया आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन का विराम दिया गया है। पूर्व कैप्टन रामलाल ने कहा कि वन रैंक, वन पेंशन को पूर्ण रूप से लागू करवाया जाएगा।
बिलासपुर में पलकों पर बैठाए ‘नायक’
वन रैंक, वन पेंशन की मांग पर दिल्ली के जंतर-मंतर में भूख हड़ताल पर बैठे प्रदेश के पूर्व सैनिकों का लौटने पर भव्य स्वागत किया गया। बिलासपुर के किसान भवन में हुए कार्यक्रम में उन्हें फूलमालाएं पहनाई गईं। भारत माता की जय, साडा बाकी हक ऐथे रख, सैनिक एकता जिंदाबाद के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।
पूर्व सैनिक कल्याण समिति के प्रदेशाध्यक्ष सूबेदार प्रकाश चंद, कैप्टन रामलाल, सूबेदार रामानंद मंगलवार को बिलासपुर पहुंचे। पूर्व सैनिकों ने इन्हें सिर-आंखों पर बैठा लिया। इसके बाद किसान भवन से चंगर स्थित शहीद स्मारक तक विजय रैली निकाली गई। यहां 1965 भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए युद्धवीरों को श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखा।
एक विशाल जनसभा का आयोजन भी किया गया। इसमें सैकड़ों पूर्व सैनिक उपस्थित थे। सूबेदार प्रकाश चंद ने कहा कि 40 साल से पूर्व सैनिक वन रैंक, वन पेंशन की लड़ाई लड़ रहे थे। अब केंद्र ने यह मांग पूरी कर दी है। यदि केंद्र ने इस मांग को पूर्व सैनिकों के अनुरूप मानने में कोई खामी बरती तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कैप्टन नरेंद्र, अन्य जिलों से आए स्कवाड्रन लीडर बृज लाल धीमान, सूबेदार रोशन लाल, कैप्टन सुरेंद्र, हवलदार कश्मीर सिंह, सूबेदार हरि सिंह, सुखराम ने भी विचार रखे।