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HP High Court: देवताओं का विवाद मध्यस्थता से सुलझाने के दिए आदेश, दो सदस्यीय कमेटी का किया गठन

Sun, 02 Apr 2023 12:02 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 02 Apr 2023 12:02 PM IST
सार

यह मामला 300 साल पुरानी ब्रांशी परंपरा से जुड़ा है, जिसमें देवता बारी-बारी से गांवों में अपने रथों में जाते है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने वरिष्ठ अधिवक्ता एससी शर्मा और प्रशिक्षित मध्यस्थ की दो सदस्यीय कमेटी बनाई है। 

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Orders given to settle the dispute of the deities through mediation, a two-member committee was formed
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देवताओं के विवाद को मध्यस्थता से सुलझाने के आदेश दिए हैं। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने वरिष्ठ अधिवक्ता एससी शर्मा और प्रशिक्षित मध्यस्थ की दो सदस्यीय कमेटी बनाई है। अदालत ने मध्यस्थता कमेटी से रिपोर्ट भी तलब की है। अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता कमेटी के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं। यह मामला 300 साल पुरानी ब्रांशी परंपरा से जुड़ा है, जिसमें देवता बारी-बारी से गांवों में अपने रथों में जाते है।

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शराचली क्षेत्र के 7 गांव झराशली अथवा झगटान, रोहटान, मंडल, जखनोर पुजारली, थाना, शील अथवा तुरन और ढाडी घूंसा के तीन आराध्य देवता क्यालू महाराज, बनाड़ और देशमौली हैं। देवता क्यालू महाराज का एक स्थायी मंदिर पुजारली में है। शराचली और जुब्बल तहसील के कई गांवों के लाखों लोगों की देवता बनाड और देवता देशमौली में अटूट आस्था है। एसडीएम के पास शिकायत की गई कि देवता बनाड़ और देवता देशमौली क्षेत्र के सभी गांवों में बारी-बारी एक-एक वर्ष के लिए जाते रहे हैं। इस परंपरा को ब्रांशी कहा जाता है। जब भी ये देवता प्रत्येक गांव में बने अपने मंदिर में आते हैं तो एक उत्सव का माहौल बनता है और सभी लोग देवता के आगमन को उनका आशीर्वाद समझते हैं।
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हालांकि तीन सौ साल पुरानी इस ब्रांशी परंपरा पर अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रोहडू ने रोक लगा दी थी। यहां पर एक साथ दो देवताओं के पहुंच जाने से दो समुदायों में विवाद खड़ा हो गया था और देवता बनाड़ और देशमौली के रथों को पुजारली में ही रोक दिया गया था। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने देवता देशमौली को रोहडू के शराचली क्षेत्र के पुजारली गांव मंदिर में ही रोके जाने के आदेश दिए थे। उसके बाद हाईकोर्ट ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के इन आदेशों पर रोक लगा दी थी। अब प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में विवादित पहलुओं को देखते हुए इसे आपसी समझौते से निपटाने पर जोर देने की बात कही है।
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