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Shimla News: सहर्ष निधि लिमिटेड को 32 हजार रुपये लौटाने के आदेश
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जिला उपभोक्ता विवाद आयोग का फैसला
कंपनी के प्रबंधक बैंक बंद कर हो गए थे फरार
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने बचत खाते में जमा राशि वापस न करने के मामले में सहर्ष निधि लिमिटेड के प्रबंधकों के खिलाफ फैसला सुनाया है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने विपक्षी पक्ष को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को उसके खाते में जमा 32,074 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। ब्याज की गणना शिकायत दर्ज करने की तारीख से लेकर पूरी राशि का भुगतान होने तक की जाएगी। इसके अलावा मानसिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर 15 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने के भी आदेश दिए हैं। आयोग ने आदेशों की अनुपालना के लिए 45 दिन का समय निर्धारित किया है।
मामले के अनुसार शिमला निवासी अंजलि रावत ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 35 के तहत सहर्ष निधि लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अतुल कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह 7 दिसंबर 2017 से संस्था में टेलर के पद पर कार्यरत थी। संस्था में उसका बचत खाता भी था जिसमें 32,074 रुपये जमा थे। आरोप है कि 30 सितंबर 2023 की आधी रात को कंपनी के प्रबंधक अचानक बैंक बंद कर फरार हो गए। इससे कई खाताधारकों की जमा पूंजी फंस गई। अब आयोग ने पैसा लौटाने का फैसला सुनाया है।
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कंपनी के प्रबंधक बैंक बंद कर हो गए थे फरार
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शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने बचत खाते में जमा राशि वापस न करने के मामले में सहर्ष निधि लिमिटेड के प्रबंधकों के खिलाफ फैसला सुनाया है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने विपक्षी पक्ष को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को उसके खाते में जमा 32,074 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। ब्याज की गणना शिकायत दर्ज करने की तारीख से लेकर पूरी राशि का भुगतान होने तक की जाएगी। इसके अलावा मानसिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर 15 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने के भी आदेश दिए हैं। आयोग ने आदेशों की अनुपालना के लिए 45 दिन का समय निर्धारित किया है।
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मामले के अनुसार शिमला निवासी अंजलि रावत ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 35 के तहत सहर्ष निधि लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अतुल कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह 7 दिसंबर 2017 से संस्था में टेलर के पद पर कार्यरत थी। संस्था में उसका बचत खाता भी था जिसमें 32,074 रुपये जमा थे। आरोप है कि 30 सितंबर 2023 की आधी रात को कंपनी के प्रबंधक अचानक बैंक बंद कर फरार हो गए। इससे कई खाताधारकों की जमा पूंजी फंस गई। अब आयोग ने पैसा लौटाने का फैसला सुनाया है।
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