{"_id":"6aedbe967a1f0c3c200e5287","slug":"order-to-disconnect-electricity-and-water-supply-to-illegal-constructions-shimla-news-c-19-sml1002-816687-2026-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: अवैध निर्माण पर बिजली-पानी \nका कनेक्शन काटने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: अवैध निर्माण पर बिजली-पानी का कनेक्शन काटने का आदेश
विज्ञापन
अदालत ने बिजली बोर्ड और नगर एवं ग्राम नियोजन की कार्रवाई को सही ठहराया कम्याना में बनी बहुमंजिला इमारत से जुड़ा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने अवैध निर्माण के चलते बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के आदेश को चुनौती देने वाली महिला की याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत अवैध निर्माण करने वाले व्यक्ति को राहत नहीं दी जा सकती। वरिष्ठ सिविल जज प्रतिभा नेगी की अदालत ने वादी का दावा खारिज करते हुए उस पर मुकदमे की कॉस्ट भी लगाई है। कैथू निवासी मनु घारू ने राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड और नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग के खिलाफ दीवानी दावा दायर किया था। वादी का कहना था कि कम्याना स्थित उनकी बहुमंजिला इमारत के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के संबंध में टीसीपी विभाग की ओर से 24 मार्च 2023 को जारी आदेश अवैध हैं। वादी ने आरोप लगाया था कि पारिवारिक विवाद के चलते यह कार्रवाई की गई। साथ ही टीसीपी विभाग ने बिना सुनवाई का अवसर दिए उनकी एनओसी वापस ले ली जिसके आधार पर बिजली बोर्ड ने कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए।
टीसीपी विभाग की टीम ने 31 जनवरी 2023 को मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि वादी ने इमारत के सेटबैक क्षेत्र में सीजीआई शीट्स लगाकर कब्जा कर रखा था। इसके अलावा सड़क स्तर से नीचे रिहायशी कमरे भी बना लिए थे। विभाग की ओर से निर्माण कार्य रोकने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अवैध निर्माण जारी रखा गया। इसके बाद टीसीपी अधिनियम की धारा 83-ए के तहत बिजली और पानी के कनेक्शन के लिए जारी एनओसी वापस ले ली थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वादी रिकॉर्ड पर ऐसा कोई स्वीकृत नक्शा या तकनीकी रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो सके कि निर्माण नियमों के अनुसार किया था। वहीं टीसीपी विभाग और बिजली बोर्ड की ओर से की गई कार्रवाई कानून और एचपी सप्लाई कोड 2009 के प्रावधानों के अनुरूप पाई गई। अदालत ने माना कि वादी ने तथ्यों को छिपाया है और उसका आचरण न्यायसंगत नहीं रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने अवैध निर्माण के चलते बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के आदेश को चुनौती देने वाली महिला की याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत अवैध निर्माण करने वाले व्यक्ति को राहत नहीं दी जा सकती। वरिष्ठ सिविल जज प्रतिभा नेगी की अदालत ने वादी का दावा खारिज करते हुए उस पर मुकदमे की कॉस्ट भी लगाई है। कैथू निवासी मनु घारू ने राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड और नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग के खिलाफ दीवानी दावा दायर किया था। वादी का कहना था कि कम्याना स्थित उनकी बहुमंजिला इमारत के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के संबंध में टीसीपी विभाग की ओर से 24 मार्च 2023 को जारी आदेश अवैध हैं। वादी ने आरोप लगाया था कि पारिवारिक विवाद के चलते यह कार्रवाई की गई। साथ ही टीसीपी विभाग ने बिना सुनवाई का अवसर दिए उनकी एनओसी वापस ले ली जिसके आधार पर बिजली बोर्ड ने कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए।
टीसीपी विभाग की टीम ने 31 जनवरी 2023 को मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि वादी ने इमारत के सेटबैक क्षेत्र में सीजीआई शीट्स लगाकर कब्जा कर रखा था। इसके अलावा सड़क स्तर से नीचे रिहायशी कमरे भी बना लिए थे। विभाग की ओर से निर्माण कार्य रोकने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अवैध निर्माण जारी रखा गया। इसके बाद टीसीपी अधिनियम की धारा 83-ए के तहत बिजली और पानी के कनेक्शन के लिए जारी एनओसी वापस ले ली थी।
विज्ञापन
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वादी रिकॉर्ड पर ऐसा कोई स्वीकृत नक्शा या तकनीकी रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो सके कि निर्माण नियमों के अनुसार किया था। वहीं टीसीपी विभाग और बिजली बोर्ड की ओर से की गई कार्रवाई कानून और एचपी सप्लाई कोड 2009 के प्रावधानों के अनुरूप पाई गई। अदालत ने माना कि वादी ने तथ्यों को छिपाया है और उसका आचरण न्यायसंगत नहीं रहा।
विज्ञापन