फल-सब्जियों की कौन करे जांच, 10 जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं
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प्रदेश में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह भी है कि प्रदेश में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पद सालों से रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में खाद्य वस्तुओं की जांच नहीं हो पा रही है। चंबा और शिमला को छोड़कर किसी भी जिले में अभी तक खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं है।
जिस कारण उक्त जिलों में किसी प्रकार के खाद्य वस्तुओं की जांच नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो प्रदेश में बेचे जा रहे बेमौसमी आम, केले, अंगूर सहित अन्य फलों को पकाने के लिए जहरीले केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है।
इसके अलावा सब्जियों को चमकाने के लिए भी कई प्रकार के केमिकल प्रयोग हो रहे है। इसके सेवन से जहर सीधा इंसान के शरीर में पहुंच रहा है। हालांकि लोगों की सेहत के खिलवाड़ न हो, इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 लागू किया गया है। लेकिन प्रदेश में स्टाफ की कमी के कारण इसे सख्ती से लागू नहीं किया जा सका है।
इस प्रकार होता है जहर का प्रयोग
केले, आम सहित अन्य फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड, एलड्रीन, करिमपोन का पानी में घोल बनाया जाता है। इसमें आम सहित केले और अन्य फलों को डाला जाता है। इसके बाद फल कुछ ही घंटों में पक जाते है।
जबकि रातों रात अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कई किसान सब्जियों को औक्सीटोसीन इंजेक्शन लगाते है। इससे रातों रात सब्जियों का आकार बढ़ जाता है। इस इंजेक्शन का प्रयोग खीरा, लौकी, करेला, बैंगन, कद्दू आदि सब्जियों के लिए प्रयोग में लाया जाता है। जबकि टमाटर को पकाने के लिए एजीएथ्री का प्रयोग होता है।
कैंसर तक की चपेट में आ सकते हैं लोग- सफदरजंग अस्पताल के सामुदायिक मेडिसिन विभाग के निदेशक और एचओडी प्रोफेसर डॉक्टर जुगल किशोर के मुताबिक वयस्कों में ऐसे फल और सब्जियों के सेवन से तंत्रिका तंत्र बाधित करने के साथ हार्मोन भी प्रभावित करता है। वहीं एलर्जी, उच्च रक्तचाप, अवसाद, बांझपन, अस्थमा के साथ कैंसर जैसी घातक बीमारियों को भी उतपन्न कर सकता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के रिक्त पद कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से भरे जाएंगे। विभाग समय-समय पर खाद्य वस्तुओं की जांच करता है। - मनोज तोमर, निदेशक, खाद्य सुरक्षा हिमाचल प्रदेश