बिलासपुर: हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में 14 दिसंबर से पहले सत्र की ऑफलाइन कक्षाएं
हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्रावास तैयार न होने के कारण करीब तीन सप्ताह पहले कॉलेज में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई थीं। लेकिन अब 13 दिसंबर को कॉलेज का निर्माण कार्य कर रही कंपनी छात्रावास तैयार कर कॉलेज प्रबंधन को सौंप देगी।
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लंबे इंतजार के बाद हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के बंदला स्थित हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में 14 दिसंबर से पहले सत्र की ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होंगी। कॉलेज का छात्रावास तैयार न होने के कारण करीब तीन सप्ताह पहले कॉलेज में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई थीं। लेकिन अब 13 दिसंबर को कॉलेज का निर्माण कार्य कर रही कंपनी छात्रावास तैयार कर कॉलेज प्रबंधन को सौंप देगी। इसके बाद 14 दिसंबर से कॉलेज की नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। बिलासपुर के बंदला में 62.08 बीघा भूमि पर 105 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज की कक्षाएं 14 दिसंबर से शुरू हो रही है।
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की हरी झंडी मिलने के बाद कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां से प्रथम वर्ष की कक्षाएं बंदला शिफ्ट की जा रही हैं। पिछले चार साल से बंदला में भवन निर्माण कार्य पूरा न होने और मूलभूत ढांचे की कमी के चलते एआईसीटीई की मंजूरी न मिलने के पर बिलासपुर में कक्षाएं शुरू नहीं करवाई जा रही थी। इस कारण नगरोटा बगवां से ही पहला बैच निकल गया। अब बंदला में कक्षाएं शुरू करने के लिए हॉस्टल, प्रिंसिपल रूम से लेकर क्लासरूम तक सब तैयार हैं।
कॉलेज में प्रवेश के लिए तीन राउंड की काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद 120 प्रशिक्षुओं के पद भरे गए हैं। इनमें प्रथम वर्ष में सिविल और इलेक्ट्रिकल की कक्षाएं ही शुरू होंगी, जिनमें दोनों ट्रेड में 60-60 प्रशिक्षु होंगे।यह कॉलेज जब पूरी तरह संचालित हो जाएगा तो इसमें 4 ट्रेड की डिग्री मिलेगी। हर ट्रेड में 60-60 सीटें होंगी। हर बैच में 240 हाइड्रो इंजीनियर पासआउट होंगे। प्रदेश के एकमात्र हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर साइंस ट्रेड में पढ़ाई होगी। उधर, तकनीकी शिक्षा निदेशक विवेक चंदेल ने बताया कि 14 दिसंबर से कॉलेज में कक्षाएं नियमित तौर से शुरू होंगीं। अभी मात्र पूजा पाठ करके कक्षाओं का शुभारंभ होगा। औपचारिक उद्घाटन बाद में होगा।