सरकार ने अधिकारियों के विदेश दौरों पर खर्च कर दिए करोड़ों
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सरकार ने निगम, बोर्ड और विभागों के अधिकारियों के विदेशी दौरे पर 1,69,24,345 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। 25 जनवरी, 2012 से दिसंबर, 2015 तक हिमाचल के 364 अधिकारियों ने विदेश दौरा किया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह जानकारी विधायक अनिरुद्ध सिंह और संजय रतन के लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम-बोर्ड के दो अध्यक्षों ने इस समय अवधि के बीच विदेशी दौरा किया है, जबकि निगम, बोर्ड के 150 अधिकारियों ने विदेशी दौरा किया है। उन्होंने कहा कि निगम बोर्डों के अध्यक्ष और अधिकारियों के विदेशी दौरे पर 1,13,13,021 करोड़ रुपये खर्च आया है। विभागों के अधिकारियों के इस समय अवधि के विदेशी दौरे के दौरान 56,11,324 लाख रुपये की राशि खर्च की गई।
सरकार सचिवालय प्रशासन 7 अधिकारी, लोक प्रशासन संस्थान शिमला-4, मत्स्य पालन विभाग बिलासपुर-1, निर्वाचन विभाग के 4, उद्यान विभाग के-3, पर्यटन एवं नागरिक एवं उड्डन विभाग के -6, उपायुक्त मंडी-3, तकनीकी शिक्षा व्यावसायिक एवं
औद्योगिकी-3, परिवहन निदेशालय-3 और कृषि विभाग के 14 अफसरों ने विदेशी दौरे किए। कई अधिकारियों के लिए प्रदेश के सरकारी खजाने, जबकि कइयों को भारत सरकार और कुछेक को कंपनियों और निगम-बोर्ड की ओर से पैसा खर्च किया गया।
मानसून सत्र के तीसरे दिन नहीं चल पाया प्रश्नकाल
हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को प्रश्नकाल नहीं चल पाया। पहले दिन भी सोमवार को शोक प्रस्ताव के लंबा खिंचने के कारण प्रश्नकाल नहीं चल पाया। तीसरे दिन भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि के माइक तोड़ने पर निलंबन कार्रवाई से हुई हल्की नोकझोंक के लंबा खिंचने के कारण नहीं चल सका।
इसके बाद स्पीकर बुटेल के कार्यालय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों में चर्चा हुई। रविंद्र रवि भी उनके कार्यालय में गए। करीब पौने घंटे बाद 12 बजकर 40 मिनट पर सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई। भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने कंडीशनल एपोलॉजी व्यक्त की। कहा कि ऐसे में सदन उनके निलंबन पर पुनर्विचार करे।
बुधवार सुबह 11 बजे स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल प्रश्नकाल की घोषणा करने वाले ही थे कि कांग्रेस विधायक संजय रतन और अजय महाजन ने उनसे माइक तोड़ने पर कार्रवाई की जानकारी देने को कहा। स्पीकर ने बताया कि विधानसभा सदस्य का व्यवहार सभा के नियमों के खिलाफ रहा है। सदन की सहमति हो तो उन्हें 24 जुलाई की बैठक से लेकर विधानसभा के मानसून सत्र के समापन तक निलंबित किया जाता है।
इसके बाद बुटेल ने रविंद्र रवि को सदन से बाहर जाने को कहा। बुटेल ने कहा कि वे इस मानसून सत्र में सदन में वापस नहीं आएंगे। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि क्या निलंबन के ऑर्डर पहले ही लिखे गए थे। मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि विधायक को पहले स्पष्टीकरण देने का मौका दिया जाना चाहिए था।
बुटेल ने कहा कि घटना के बाद ही आदेश लिखे गए। नियम सात में स्पष्ट है कि ऐसे मामले में किसी शिकायत या बहस की जरूरत नहीं होती। नियम 75 में स्पीकर ऐसी कार्रवाई के लिए कंपीटेंट हैं। इसी बीच, सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों में हल्की नोकझोंक होती रही। भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल और जयराम ठाकुर ने कहा कि दो मिनट का समय देकर रविंद्र रवि को अपनी बात रखने का मौका दें।
स्पीकर बुटेल ने कहा कि हाउस को पूछकर ही अब इसकी समीक्षा कर सकते हैं। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि इस बारे में निर्णय वापस नहीं लिया जाना चाहिए। भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि रविंद्र सिंह रवि पांच बार विधायक रहे हैं। ऐसी बात प्रदेश के लिए ठीक नहीं है। इस आदेश को वापस लें। स्पीकर ने पौने 12 बजे सदन की बैठक को दस मिनट के लिए स्थगित करने की घोषणा की। मगर ये लगभग एक घंटे तक स्थगित रहा।
नहीं चले माइक, खड़े रहे धूमल और हैलो-हैलो करते रहे वीरभद्र
प्रदेश विधानसभा में बुधवार को अलग तरह का नजारा रहा। सदन के भीतर माइक नहीं चले। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल खडे़ हुए और काफी देर तक अपनी सीट पर लगे माइक को थपथपाते रहे। भाजपा विधायक उनका माइक ठीक करने को कहते रहे। शुरू में बिना माइक के ही सदन की कार्यवाही चली। बाद में कोर्डलेस मंगवाया गया। इस पर आवाज न आती सुन सीएम वीरभद्र सिंह इस पर हैलो-हैलो करते रहे।
स्पीकर बुटेल ने शॉर्ट-सर्किट होना इसका कारण बताया। केवल स्पीकर का ही माइक चल रहा था। भोजनावकाश से पहले सदन की कार्यवाही में माइक नहीं चला तो प्रेम कुमार धूमल बोले कि यह व्यवस्था का प्रश्न खड़ा करता है। बोले- विपक्ष जो बोले, वह रिकॉर्ड में नहीं आएगा और आप माइक ऑन नहीं करने देते।
महेंद्र सिंह ने माइक न चलने की बात कही तो स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह बोले - माइक हमारे भी नहीं चल रहे हैं। स्पीकर ने कहा - मैं सूचित करना चाहता हूं कि यह शॉर्ट-सर्किट से हुआ है। सत्ता पक्ष के विधायकों से आवाज आई - हमारे भी नहीं चल रहे। भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा- क्या यह विधानसभा की विफलता है।
स्पीकर बोले- यह अचानक हुआ है। बाद में जब कोर्डलेस आया तो मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज भी - हैलो-हैलो करते रहे। यह कोर्डलेस माइक बारी-बारी से सबको दिया जाता रहा। बाद में जब सीएम वीरभद्र बोल रहे थे तो उनकी आवाज नहीं आ रही थी। कहा- मैं क्या करूं, माइक ही नहीं चल रहा है।
हिमाचल में यथा स्थिति में नियमित होंगे अवैध भवन
हिमाचल में अवैध भवनों को नियमित करने के लिए प्रदेश सरकार ने बुधवार को विधानसभा पटल पर टीसीपी संशोधन विधेयक रखा है। संशोधन विधेयक में अवैध भवनों को यथा स्थिति यानि जैसा है वैसी ही नियमित किए जाने का प्रावधान किया गया है। टीसीपी संशोधन विधेयक में अगर किसी भवन मालिक ने दूसरे की जमीन या फिर रास्ते में कब्जा कर रखा है उन्हें नियमित नहीं किया जाएगा।
अपनी ही मलकीयत में भवन नियमित होंगे। इसको लेकर अवैध भवन मालिकों से शपथ पत्र भी लिया जाएगा। इसके साथ ही सड़क के साथ बने भवनों के लिए पार्किंग होना अनिवार्य किया है। अगर भवन मालिक ने मंजिल के पार्किंग फ्लोर में कमरे बना दिए हैं तो ऐसे में उन भवन मालिकों को अपनी मलकीयत में पार्किंग बनाना अनिवार्य किया है। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भवन नियमित नहीं होंगे।
27 अगस्त को होगी चर्चा
विधानसभा में टीसीपी संशोधन विधेयक पर 27 अगस्त को चर्चा होगी। इसके बाद सर्वसहमति से इस विधेयक को पारित किया जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद प्रदेश सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगा। इसके 60 दिन के भीतर लोगों को अवैध भवनों को नियमित करने के लिए आवेदन करना होगा।
यह रहेगी फीस
अब सरकार ने नगर निगम और नगर निकाय में 800 रुपये प्रति वर्ग मीटर जबकि टीसीपी एरिया में 400 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से भवन नियमित करने की फीस तय कर दी है। इसी तरह जिन लोगों ने बिना नक्शे के भवन बनाए हैं उन भवनों को नियमित करने के लिए नगर निगम और नगर निकाय में 1200 रुपये जबकि टीसीपी में 600 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से भवन नियमित कराने का फैसला लिया है। एक हजार रुपये से साथ लोगों को आवेदन करना होगा।