नूरपुर हादसा: जब चिराग ही नहीं रहे तो किसके लिए जलाएं दीये
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नूरपुर स्कूल बस हादसे के शिकार बच्चों के परिजनों ने कहा है कि अब उनके जीवन में दिवाली के मायने नहीं रह गए हैं। उनका कहना है कि उनके वंश को रोशन करने वाले चिराग ही बुझ गए हैं तो दिवाली पर दीये किसके के लिए जलाएं।
अपने चार पोते-पोतियों को खो चुकीं सुरक्षा देवी ने कहा कि उनका वंश आगे बढ़ाने वाली पीढ़ी ही नहीं रही। ऐसे में दिवाली समेत कोई भी त्योहार उनके लिए मायने नहीं रखता। कहा कि नूरपुर हादसे के बाद कई माताएं बीमार पड़ी हैं।
उन्हें न तो खाने की सुध है और न पीने की। बच्चों को खो चुकीं माताएं अपनी सुधबुध तक खो बैठी हैं। रात भर बदहवासी में घूमती रहती हैं। बच्चों के वियोग ने उनकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। बच्चों के गम में रो-रो कर बूढ़े दादा-दादी की तो आंखों की रोशनी ही खत्म हो गई है।
अब तो उन्हें दिखाई भी कम देने लगा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के पास न्याय की गुहार लगाते हुए उन्हें छह महीने बीत गए हैं, लेकिन सरकार और जिला प्रशासन की संवेदनाएं नहीं जाग रहीं।