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नूरपुर हादसा: जब चिराग ही नहीं रहे तो किसके लिए जलाएं दीये

Sat, 20 Oct 2018 12:10 PM IST
विपिन चौधरी, अमर उजाला, धर्मशाला
विपिन चौधरी, अमर उजाला, धर्मशाला Updated Sat, 20 Oct 2018 12:10 PM IST
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Nurpur School bus accident story of victim parents

नूरपुर स्कूल बस हादसे के शिकार बच्चों के परिजनों ने कहा है कि अब उनके जीवन में दिवाली के मायने नहीं रह गए हैं। उनका कहना है कि उनके वंश को रोशन करने वाले चिराग ही बुझ गए हैं तो दिवाली पर दीये किसके के लिए जलाएं।

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अपने चार पोते-पोतियों को खो चुकीं सुरक्षा देवी ने कहा कि उनका वंश आगे बढ़ाने वाली पीढ़ी ही नहीं रही। ऐसे में दिवाली समेत कोई भी त्योहार उनके लिए मायने नहीं रखता। कहा कि नूरपुर हादसे के बाद कई माताएं बीमार पड़ी हैं।

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Nurpur School bus accident story of victim parents

उन्हें न तो खाने की सुध है और न पीने की। बच्चों को खो चुकीं माताएं अपनी सुधबुध तक खो बैठी हैं। रात भर बदहवासी में घूमती रहती हैं। बच्चों के वियोग ने उनकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। बच्चों के गम में रो-रो कर बूढ़े दादा-दादी की तो आंखों की रोशनी ही खत्म हो गई है।

अब तो उन्हें दिखाई भी कम देने लगा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के पास न्याय की गुहार लगाते हुए उन्हें छह महीने बीत गए हैं, लेकिन सरकार और जिला प्रशासन की संवेदनाएं नहीं जाग रहीं।

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