फसल बीमा योजना के लिए अब पूरी करनी होगी ये नई शर्त
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अगर आप अपनी फसल का बीमा करवाना चाहते हैं तो आपको बीमा फार्म भरने के लिए पटवारी से अपनी जमीन की नकल लगानी होगी। जमीन के नकल के बगैर किसी भी किसान और बागवान के आवेदन स्वीकार नहीं होंगे।
बागवानी विभाग, कृषि विभाग और फसल का बीमा करने वाली निजी बीमा कंपनी ने किसानों की फसल का बीमा करवाने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया है। सूबे में रबी की फसल जौ और गेहूं के अलावा आम, लीची, पलम, आड़ू और सेब की फसल का भी बीमा होगा।
जिसके लिए किसानों को अपने संबंधित पटवारी से जमीन की नकल देने होगी। जिसका किसान मालिक है। उसी के आधार पर उसकी फसल का प्रीमियम तय होगा। रबी की फसल में गेहूं तथा जौ के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम पर फसल बीमा किया जाएगा।
यहां जानिए किस पर कितना बीमा हो सकता है
केंद्र सरकार ने 30 हजार रुपये गेहूं तथा 25 हजार रुपये जौ के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि निर्धारित की गई है। किसान को गेहूं का 450 रुपये प्रति हेक्टेयर या 36 रुपये प्रीमियम प्रति बीघा राशि किसान को देनी होगी और शेष राशि सरकार अनुदान के रुप में भरपाई करेगी।
इसी तरह जौ की फसल के लिए 375 प्रति हेक्टेयर या 30 रुपये प्रति बीघा प्रीमियम के रूप में देना होगा। इस कृषि बीमा में रोपण जोखिम, खड़ी फसल, बुआई से लेकर कटाई तक, फसल कटाई के उपरांत होने वाले नुकसान तथा स्थानीयकृत आपदाओं को कवर किया गया है।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक विनोद धीमान ने कहा कि सभी खंड के विषयवाद विशेषज्ञों को फसल बीमा योजना के बारे में बागवानों को अवगत करवाने के निर्देश दिए हैं। बागवानों को अपने दस्तावेजों में जमीन की नकल लाना अनिवार्य है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. राकेश कुमार कौंडल ने कहा कि पंचायत स्तर पर किसानों को फसल का बीमा करवाने के लिए काम किया जा रहा है। सभी फील्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों को किसानों की फसल का बीमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।