अब देवताओं ने कहा, नहीं लेंगे पशु बलि
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कुल्लू जिले के निरमंड तहसील के अंतर्गत गांव तूनन में देवता नाग ने अपने मंदिर में बलि प्रथा को बंद कर दिया है। पहले जाहरूनाग देवता के मंदिर में चाहे शिखर फेर, भूत निकालना, दंड मरना, दिशा पूजा काली पूजा, मंदिर की प्रतिष्ठा और गुर निकालने जैसे कार्यो पर 10 बकरों की बलि प्रत्येक कार्य में लगता था।
लेकिन उच्च न्यायालय के पशुबलि पर प्रतिबंध के चलते देवता जाहरू नेगा ने स्वंय अपने गुर के माध्यम से सभी कार्मों में बलि प्रथा पर विराम लगा दिया है।
अब मंदिर में पूजा पाठ और अन्य कार्यों में बक रों की बलि के जगह नारियल से पूजा पाठ किया जाएगा। देवता के इस आदेश से देवलू संगठन और गरीब लोगों में खुशी लहर है।
पूजा में लगती थी 10 बकरों की बलि
क्षेत्र के लोगों में कारदार रेवत राम, हीरा सिंह, बूकम, पवन , दलीप, चेनराम,मोतीराम, किमदास, धनी राम, जिला लाल और दलीप सिंह ठाकुर का कहना है कि पहले मंदिर में हर साल पूजा पाठ के लिए 7 से लेकर 10 बकरों की बलि दी जाती थी।
अब देवता ने स्वंय गुर के माध्यम से बलि प्रथा बंद करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा देवता जाहरू नाग तूनन ने एक साल पहले पशु बलि को बंद करने का फैसला लिया था।
उन्होंने कहा कि अब पशु बलि मंदिर में बंद होने से क्षेत्र के लोगों को पूजा पाठ में पहले की अपेक्षा कम खर्चा आएगा।