पढ़िए, कढारघाट बस हादसे का ये खौफनाक सच
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शिमला से करीब 60 किलोमीटर दूर कढ़ारघाट में दुर्घटनाग्रस्त हुई एचआरटीसी बस हर तीसरे दिन खराब होकर वर्कशाप पहुंच रही थी। जुगाड़ तंत्र से ठीक कर उसे फिर रूट पर भेजा जा रहा था। एचपी 63-2519 के स्टेयरिंग का पुर्जा चार दिन पहले ही बदला गया था।
स्टेयरिंग में खराबी के कारण चालक को बस चलाने में दिक्कत पेश आ रही थी। पांच दिन पहले 23 जुलाई को बस एचआरटीसी के वर्कशॉप में लाई गई। चालक ने बस के स्टेयरिंग के अलावा टॉयर और ब्रेक में भी दिक्कत बताई थी।
24 जुलाई को बस तारादेवी वर्कशाप भेज दी गई और बस की स्टेयरिंग असेंबली बदली गई। इसके बाद बस डुमैहर रूट पर भेज दी गई। हालांकि, अभी यह जांच का विषय है कि हादसे की असल वजह क्या रही है, लेकिन बस के मेकेनिकल रिकार्ड से यह साफ है कि बस को जैसे तैसे रूट पर चलाने की औपचारिकता निभाई जा रही थी।
3 लाख 63 हजार किलोमीटर चली थी बस
दुर्घटनाग्रस्त हुई एचआरटीसी बस लगभग 3 लाख 63 हजार किलोमीटर चली थी। 2011 मॉडल की यह बस 7 गियर सिस्टम से लैस थी। दुर्घटनाग्रस्त हुई एचआरटीसी बस जीरो बुक वैल्यू नहीं थी।
दुर्घटनाग्रस्त हुई बस की पासिंग 6 महीने पहले 16 जनवरी को हुई थी। पासिंग के दौरान सभी पहलुओं से बस की जांच हुई। इस बस की अगली पासिंग पांच माह बाद 26 दिसंबर 2014 को होनी थी।
एचआरटीसी के शिमला ग्रामीण डिपो के तहत चल रही यह बस निगम के केलांग डिपो से ट्रांसफर होकर शिमला आई थी। केलांग डिपो में डेढ़ लाख किलोमीटर चलने के बाद इस बस को शिमला ट्रांसफर किया गया था।