पहले ही दिन बिना पढ़े लौटे कॉलेज के विद्यार्थी, एक हफ्ते की दी छुट्टी
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दिन : सोमवार। समय: सुबह 9:30 बजे। स्थान: राजकीय महाविद्यालय ददाहू। नई उमंग और जोश के साथ विद्यार्थी कॉलेज पहुंचने शुरू हो गए। हों भी क्यों न एक तो कॉलेज का पहला दिन और कॉलेज भी नया। कॉलेज पहुंचते ही विद्यार्थियों का जोश और उत्साह मायूसी में बदल गया।
दरअसल, सरकार ने ददाहू में कॉलेज खोल दिया है। दूसरे कॉलेज से प्रतिनियुक्ति पर स्टाफ भेजकर एडमिशन भी करवा दी है, लेकिन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए प्रवक्ताओं की तैनाती नहीं की।
कॉलेज पहुंचे विद्यार्थियों को मायूस होकर लौटना पड़ा। साथ ही एक सप्ताह की छुट्टी देते हुए अगले सप्ताह आने के लिए इस उम्मीद के साथ कह दिया कि तब तक शायद स्टाफ की तैनाती हो जाए।
न हाजिरी लगी और न कोई पढ़ाई हुई
सोमवार को कॉलेज में 140 में से करीब 88 विद्यार्थी पहुंचे। इनमें 62 छात्राएं और 26 छात्र थे। ये बाकायदा कमरों में बैठ गए, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं आया। सुबह 9:30 बजे से विद्यार्थी कॉलेज में पहुंचने लगे थे। 11 बजे तक सभी छात्र-छात्राएं घर लौट गए।
न हाजिरी लगी और न कोई पढ़ाई हुई। कुछ अभिभावकों ने दूसरे कॉलेजों में माइग्रेशन तक करवाने का मन बना लिया है। अभिभावक विजय, राकेश, कमल, हेमचंद, बीना देवी, सरोज बाला, किरण आदि ने बताया कि पहले ही विद्यार्थियों का एक महीना प्रवेश तिथि बढ़ाने के कारण बर्बाद हो गया है।
प्रवेश की अंतिम तिथि तक भी सरकार ने प्रवक्ताओं की तैनात नहीं की। विवश होकर अपने बच्चों की माइग्रेशन दूसरे कॉलेज में करवानी पड़ेगी।
जल्द पद न भरे तो आंदोलन
डिग्री कॉलेज ददाहू के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. दिनेश भारद्वाज ने बताया कि स्टाफ मुहैया करवाने के लिए एक बार फिर विभाग से पत्राचार किया है। कॉलेज की स्थिति के बारे में अवगत करवाया है। स्टाफ न होने पर कॉलेज आए बच्चों को घर भेज दिया है। उन्हें अगले सोमवार आने को कहा है। इस सप्ताह प्रवक्ताओं के पद भरे जाने की उम्मीद है।
डिग्री कॉलेज ददाहू में स्टाफ न आने की सूरत में सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ ददाहू इकाई ने आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ के प्रधान हरिराम शर्मा ने कहा कि इस बारे में रणनीति तैयार की जा रही है। यदि इसी सप्ताह पदों को नहीं भरा गया तो संघ आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश हो जाएगा।