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Himachal: सेब के रेट तय करने की गारंटी का कोई रोड मैप नहीं, यूनिवर्सल कार्टन पर भी पेच

Sun, 09 Apr 2023 11:44 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 09 Apr 2023 11:44 AM IST
सार

सेब पैकेजिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन लागू करने पर भी पेच फंसा हुआ है। मंडियों में किलो के आधार पर सेब बिक्री की घोषणा को बागवान संगठन नाकाफी करार दे रहे हैं और प्रतिकिलो के आधार पर सेब के दाम घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

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No road map to guarantee of apple rate fixing, screw on universal carton too
सेब हिमाचल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनावों से पहले कांग्रेस ने बागवानों को सेब के रेट खुद तय करने की गारंटी दी थी, लेकिन सरकार बनने के चार महीने बाद भी इसके लिए कोई रोड मैप तैयार नहीं हुआ है। सेब पैकेजिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन लागू करने पर भी पेच फंसा हुआ है। मंडियों में किलो के आधार पर सेब बिक्री की घोषणा को बागवान संगठन नाकाफी करार दे रहे हैं और प्रतिकिलो के आधार पर सेब के दाम घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

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सरकार ने पेटी में 24 किलो सेब भरने और पेटी पर वजन लिखने के निर्देश दिए हैं। बागवानों का कहना है कि वजन के साथ पेटी पर एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) लिखने की भी व्यवस्था लागू हो। तभी सरकार की गारंटी पूरी होगी। सेब उत्पादन की प्रतिकिलो लागत पर बागवान को रेट तय करने का अधिकार मिले। बागवान संगठन यूनिवर्सल कार्टन लागृू करने की मांग कर रहे हैं। आढ़ती भी इसके लिए हामी भर चुके हैं। कार्टन निर्माता यूनिवर्सल कार्टन बनाने को तैयार हैं, बावजूद इसके सरकार यूनिवर्सल कार्टन लागू करने में की घोषणा नहीं कर रही।
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क्या कहते हैं बागवान संगठन
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान कहते हैं कि कश्मीर की तर्ज पर लागत के आधार पर ए, बी और सी ग्रेड के लिए क्रमश: 80, 60 और 30 रुपये रेट तय होने चाहिए। यूनिवर्सल कार्टन लागू होने पर सेब की पेटी के वजन की जरूरत नहीं रहेगी। संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि सेब के दाम बागवानों की ओर से तय करने की गारंटी पूरी करने को विधानसभा में कानून बनना चाहिए। मंडियों में आढ़ती बागवानों को 32 और 38 किलो पैकिंग को मजबूर करेंगे।
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यूनिवर्सल कार्टन से ही इस पर अंकुश लग सकता है। कोटगढ़ बागवानी एवं पर्यावरण सोसायटी के अध्यक्ष हरिचंद रोच ने कहा कि आढ़तियों के दबाव में सरकार यूनिवर्सल कार्टन लागू नहीं कर रही। मंडियों में सेब बिक्री की पारदर्शिता के लिए लाइव बोली और शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर होना चाहिए। तीन कानून लागू नहीं होते तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। सरकार मंडियों के दैनिक कारोबार की क्षमता घोषित करे, ताकि क्षमता से अधिक सेब पहुंचने से अव्यवस्था न फैले।

किलो के हिसाब से सेब बिक्री की घोषणा गारंटी पूरी करने की दिशा में पहला कदम : नेगी
मंडियों में किलो के हिसाब से सेब बिक्री की घोषणा बागवानों को दी गई गारंटी की दिशा में पहला कदम है। एपीएमसी कानून सख्ती से लागू करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। यूनिवर्सल कार्टन में तय मात्रा में ही सेब पैक होता है। इसके विकल्प के तौर पर ही 24 किलो की लिमिट तय की गई है। -जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री 

आनाकानी हुई तो सड़कों पर उतरेंगे बागवान : सिंघा
मौजूदा सरकार बागवानों को राहत देने की कोशिश कर रही है इसका स्वागत है, लेकिन अगर मंडियों में बागवान का शोषण न रुका तो यह कोशिश व्यर्थ है। तीन कानून और यूनिवर्सल कार्टन लागू करने में आनाकानी हुई तो बागवान सड़कों पर उतरेंगे और विरोध भी होगा। -राकेश सिंघा, पूर्व विधायक

निचले क्षेत्रों में इस बार सही ढंग से नहीं हुई सेब के फलों की सेटिंग

 मौसम में आए बदलाव और तापमान के अचानक घटने-बढ़ने से इस बार सेब के फलाें की असंतुलित सेटिंग हुई है। कहीं सेब के फल अच्छे से सेट हुए हैं तो कहीं सेब के पौधे खाली हैं। टाइडमैन, ग्रैनी स्मिथ जैसी सेब की किस्मों के फलों की सेटिंग पर मौसम की ज्यादा मार पड़ी है। विशेषकर पांच हजार फीट से लेकर सात हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस तरह से अधिक नुकसान हुआ है। यहां पर ऐन पिंक बड निकलने या फ्लॉवरिंग से पहले मौसम बिगड़ गया और भारी बारिश होती रही।

कई क्षेत्रों में तो ओलावृष्टि और तेज हवाओं से भी नुकसान हुआ है। इससे सेब की फसल प्रभावित हुई है। अब मौसम खुल गया है तो इन क्षेत्रों में सेब के फलों की सेटिंग प्रभावित होने लगी है। टाइडमैन, समर क्वीन, रेड जून जैसी किस्मों में जल्दी फ्लॉवरिंग हो जाती है तो ऐसे में इसी तरह की किस्मों में फलों की सेटिंग नहीं हुई है और समय से पहले पत्ते आ गए हैं।

बागवान कुलदीप कांत शर्मा ने बताया कि इस बार मौसम के अनुकूल न रहने से टाइडमैन, समर क्वीन जैसी सेब किस्मों की फल सेटिंग प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि और असमय बारिश से भी सेब की अन्य किस्मों पर फलों की सेटिंग पर गलत असर पड़ा है।

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