केंद्रीय बजट: न हवाई सेवा में विस्तार, न ही पर्यटन विकास के लिए पैकेज, होटल-होम स्टे संचालक नाखुश
होटल संचालकों, ट्रैवल एजेंटों और होम स्टे संचालकों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार आपदा प्रभावित हिमाचल के लिए विशेष राहत और पर्यटन प्रोत्साहन पैकेज का एलान करेगी।
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केंद्रीय बजट से पर्यटन कारोबारियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट घोषणाओं ने होटल, ट्रैवल एजेंट्स और होम स्टे व्यवसाय से जुड़े लोगों को निराश किया है। बीते तीन वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे प्रदेश के लिए पर्यटन विकास का कोई विशेष पैकेज न मिलने से कारोबारी वर्ग मायूस नजर आ रहा है। होटल संचालकों, ट्रैवल एजेंटों और होम स्टे संचालकों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार आपदा प्रभावित हिमाचल के लिए विशेष राहत और पर्यटन प्रोत्साहन पैकेज का एलान करेगी। खासतौर पर हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार और नए रूटों की घोषणा की अपेक्षा थी, जिससे दूरदराज के पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान हो सके। सर्दियों के मौसम में जब कई इलाकों में सड़क मार्ग बाधित हो जाता है, तब हवाई सेवाएं पर्यटन के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती हैं, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
पर्यटन कारोबारियों को शिमला और कांगड़ा के लिए नई आधुनिक ट्रेन सेवा की भी उम्मीद थी, जिससे रेल पर्यटन को बढ़ावा मिलता और प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होती। लेकिन बजट में ऐसी किसी परियोजना का जिक्र न होने से यह उम्मीद भी धूमिल हो गई है। बजट में पर्वतीय ट्रेल्स और हाइकिंग मार्ग विकसित करने की घोषणा जरूर की गई है, लेकिन पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल माउंटेन ट्रेल्स से प्रदेश में पर्यटन का समग्र विकास संभव नहीं है। पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि जब तक हवाई, सड़क और रेल कनेक्टिविटी को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक पर्यटन क्षेत्र में विकास मुश्किल है। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि हिमाचल की आर्थिकी में पर्यटन की अहम भूमिका है और विशेष पैकेज, कर राहत व आधारभूत ढांचे में निवेश से ही राज्य को आपदा के असर से उबारा जा सकता है।
तीन प्रतिशत टूरिस्ट करते हैं ट्रैकिंग
सिर्फ तीन प्रतिशत टूरिस्ट ट्रैकिंग के लिए आते हैं। इसलिए माउंटेन ट्रेल की घोषणा से बड़ी राहत मिलती नहीं दिखती। हम काजा और स्पीति में एयरपोर्ट, शिमला एयरपोर्ट के विस्तार और आपदा से उबरने के लिए करीब 10,000 करोड़ के विशेष पैकेज की उम्मीद कर रहे थे जो पूरी नहीं हुई। -नवीन पॉल, अध्यक्ष ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन
हिमाचल के पर्यटन उद्योग की अनदेखी
पर्यटन विकास के लिए रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की घोषणा की उम्मीद थी लेकिन इसकी पूरी तरह अनदेखी हुई है।- महेंद्र सेठ, टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर एसोसिएशन
पर्यटन उद्योग की नहीं ली कोई सुध
होटल कारोबारियों, टैक्सी ऑपरेटरों के हित में कोई घोषणा बजट में नहीं की गई है। हिमाचल प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है लेकिन केंद्र सरकार ने प्रदेश की सुध नहीं ली। -राजेंद्र ठाकुर, अध्यक्ष, कॉमर्शियल व्हीकल ज्वाइंट एक्शन कमेटी
माउंटेन ट्रेल पर्याप्त है क्या, यह बड़ा सवाल
अर्थशास्त्री डॉ. रामलाल शर्मा ने कहा कि माउंटेन ट्रेल जैसी पहाड़ी-विशिष्ट इंफ्रा परियोजनाएं बजट में शामिल हैं, जो हिमाचल प्रदेश जैसे उत्तर एक्सपर्ट कमेंट हिमालयी राज्यों में पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा दे सकती हैं। यह कदम हिमाचल के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी है, पर क्या यह पर्याप्त है? यह प्रश्न अभी भी बना हुआ है। डॉ. शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण आबादी की संख्या अधिक है और कृषि व बागवानी रोजगार की मुख्य धुरी हैं। पिछले बजट में प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने, एमएसपी बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए थे, जो किसानों को सहायता दे रहे हैं। लेकिन मौजूदा बजट में राज्य-विशेष कृषि समर्थन की स्पष्ट योजनाओं का अभाव है। यह बजट हिमाचल के चुनौतीपूर्ण भू-आबादी दृष्टिकोण को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता। केंद्र की ओर से पहाड़ी पर्यटन और कनेक्टिविटी पर ध्यान देना अच्छा संकेत है, परंतु स्थानीय पर्यटन इन्फ्रास्ट्रक्चर, सड़क और सुरक्षा की व्यापक आवश्यकताओं के लिए व बजट का समर्थन चाहिए। बजट में हिमाचल प्रदेश जैसे विशेष भौगोलिक और आर्थिक चुनौतियों वाले पर्वतीय राज्य को किसी भी प्रकार का विशेष केंद्रीय अनुदान न दिया जाना निराशाजनक पक्ष है।