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Shimla News: चलाने को ली गाड़ी की दुर्घटना में मौत पर नहीं मिलेगा मुआवजा
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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनाया फैसला
छैला के पास वाहन दुर्घटना में हुई थी दो लोगों की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। किसी अन्य व्यक्ति से मांगकर लाई गाड़ी चलाते समय सड़क हादसे का शिकार होने पर चालक के परिजनों को पर्सनल एक्सीडेंट (पीए) कवर का लाभ नहीं मिल सकता। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) और बीमा पॉलिसी में चालक का नाम दर्ज नहीं है, तो बीमा कंपनी की ओर से क्लेम (मुआवजा) खारिज करना सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए चौपाल निवासी परिवार की अपील खारिज कर दी। वाहन पहले रमेश कुमार के नाम पर पंजीकृत था और इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से बीमित था। बाद में पलक पुरी ने इसे खरीदकर अपने नाम पर पंजीकृत करवा लिया। 14 जनवरी 2021 को नेरवा (चौपाल) निवासी प्रांजय कलथाइक ने शिमला से चौपाल जाने के लिए पलक पुरी से यह गाड़ी मांगी थी। रात के समय छैला के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें प्रांजय कलथाइक और एक अन्य सवार मनोज कुमार की मौत हो गई।
हादसे के बाद मृतक प्रांजय की मां निर्मल कलथाइक और बहन पारुल कलथाइक ने बीमा कंपनी के समक्ष पर्सनल एक्सीडेंट क्लेम दायर किया। कंपनी ने बीमा योग्य हित (इंश्योरेबल इंटरेस्ट) नहीं होने का हवाला देते हुए क्लेम खारिज कर दिया। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग शिमला ने भी उनकी शिकायत खारिज कर दी। इस फैसले के खिलाफ परिजनों ने राज्य आयोग में अपील दायर की।
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अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रांजय ने यह गाड़ी पलक पुरी से खरीदी थी और वाहन का कब्जा भी उन्हीं के पास था। इसलिए वह मालिक की स्थिति में थे। वहीं बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि हादसे के समय न तो वाहन की आरसी प्रांजय के नाम पर थी और न ही बीमा पॉलिसी में उनका नाम दर्ज था। राज्य आयोग ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि वाहन की आरसी पलक पुरी के नाम पर थी जबकि बीमा पॉलिसी मूल मालिक रमेश कुमार के नाम पर थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि पर्सनल एक्सीडेंट क्लेम के लिए संबंधित बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्रता और बीमा योग्य हित का होना जरूरी है।
आयोग ने कहा कि मृतक के पास ड्राइविंग लाइसेंस तो था लेकिन गाड़ी खरीदने, बिक्री समझौते या वाहन का स्वामित्व अपने नाम पर हस्तांतरित करवाने से संबंधित कोई दस्तावेजी साक्ष्य परिजनों की ओर से पेश नहीं किया गया। केवल किसी से मांगकर गाड़ी चलाने से व्यक्ति उसका मालिक नहीं बन जाता और न ही इससे उसमें बीमा योग्य हित साबित होता है। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।
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छैला के पास वाहन दुर्घटना में हुई थी दो लोगों की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। किसी अन्य व्यक्ति से मांगकर लाई गाड़ी चलाते समय सड़क हादसे का शिकार होने पर चालक के परिजनों को पर्सनल एक्सीडेंट (पीए) कवर का लाभ नहीं मिल सकता। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) और बीमा पॉलिसी में चालक का नाम दर्ज नहीं है, तो बीमा कंपनी की ओर से क्लेम (मुआवजा) खारिज करना सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए चौपाल निवासी परिवार की अपील खारिज कर दी। वाहन पहले रमेश कुमार के नाम पर पंजीकृत था और इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से बीमित था। बाद में पलक पुरी ने इसे खरीदकर अपने नाम पर पंजीकृत करवा लिया। 14 जनवरी 2021 को नेरवा (चौपाल) निवासी प्रांजय कलथाइक ने शिमला से चौपाल जाने के लिए पलक पुरी से यह गाड़ी मांगी थी। रात के समय छैला के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें प्रांजय कलथाइक और एक अन्य सवार मनोज कुमार की मौत हो गई।
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हादसे के बाद मृतक प्रांजय की मां निर्मल कलथाइक और बहन पारुल कलथाइक ने बीमा कंपनी के समक्ष पर्सनल एक्सीडेंट क्लेम दायर किया। कंपनी ने बीमा योग्य हित (इंश्योरेबल इंटरेस्ट) नहीं होने का हवाला देते हुए क्लेम खारिज कर दिया। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग शिमला ने भी उनकी शिकायत खारिज कर दी। इस फैसले के खिलाफ परिजनों ने राज्य आयोग में अपील दायर की।
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अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रांजय ने यह गाड़ी पलक पुरी से खरीदी थी और वाहन का कब्जा भी उन्हीं के पास था। इसलिए वह मालिक की स्थिति में थे। वहीं बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि हादसे के समय न तो वाहन की आरसी प्रांजय के नाम पर थी और न ही बीमा पॉलिसी में उनका नाम दर्ज था। राज्य आयोग ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि वाहन की आरसी पलक पुरी के नाम पर थी जबकि बीमा पॉलिसी मूल मालिक रमेश कुमार के नाम पर थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि पर्सनल एक्सीडेंट क्लेम के लिए संबंधित बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्रता और बीमा योग्य हित का होना जरूरी है।
आयोग ने कहा कि मृतक के पास ड्राइविंग लाइसेंस तो था लेकिन गाड़ी खरीदने, बिक्री समझौते या वाहन का स्वामित्व अपने नाम पर हस्तांतरित करवाने से संबंधित कोई दस्तावेजी साक्ष्य परिजनों की ओर से पेश नहीं किया गया। केवल किसी से मांगकर गाड़ी चलाने से व्यक्ति उसका मालिक नहीं बन जाता और न ही इससे उसमें बीमा योग्य हित साबित होता है। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।