जीत गई जिंदगी, 10वें दिन टनल से निकाले गए दोनों मजदूर
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हिमाचल के बिलासपुर में 12 सितंबर से निर्माणाधीन टनल में फंसे दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। दोनों मजदूर 10 दिन बाद टनल से बाहर निकाले गए। सोमवार शाम करीब 4 बजकर 10 मिनट पर दोनों मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया। बीआरओ और एनडीआरएफ के जवानों की मेहनत आखिरकार रंग लाई।
पहले दोनों मजदूरों को सुबह बाहर निकाले जाने की कोशिश की गई थी मगर पहाड़ी से टनल तक की गई ड्रिलिंग इतनी तंग थी कि इसमें से मजदूरों को बाहर नहीं लाया जा सकता था। ऐसे में फिर इसे चौड़ा किया गया। बाद में एनडीआरएफ के कुछ जवान टनल में उतरे और बारी बारी दोनों मजदूरों को बाहर निकाला गया।
पहले मजदूर को करीब 211 घंटे 47 मिनट बाद टनल से बाहर निकाला गया है। वहीं, दूसरे मजदूर को इससे दस मिनट बाद बाहर निकाला गया।दोनों मजदूरों को देखने के लिए मौके पर भारी भीड़ भी जमा थी।
एक दिन पहले मजदूरों ने की थी ये बातें
मैडम टनल के अंदर पानी भर रहा है, हमें जल्द बाहर निकालो। पहले भी ऐसा कहा गया था, लेकिन आठ दिन हो गए हैं और हमें बाहर नहीं निकाला जा सका है। रविवार को यह बात घुप अंधेरी टनल में फंसे मजदूरों सतीश और मणि राम ने माइक्रोफोन से डीसी और अपने भाइयों से कही। मणि राम माइक्रो फोन के माध्यम से हुई इस बातचीत पर भावुक होकर रो पड़ा था।।
लेकिन, उसका हौसला बढ़ाने के लिए उसके भाई ही नहीं, उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर भी मौजूद रहीं। मणि राम के भाई मोती राम ने कहा कि तुम शेर हो, इतने दिनों तक हौसला रखा है, कुछ देर और हौसला रखो। हम तुम्हें जल्द बाहर निकाल लेंगे। जिला प्रशासन ने रविवार को टनल में फंसे मजदूरों की उनके भाइयों से बात करवाई। आखिरकार आज दोनों को बाहर निकाला जाएगा।
टनल में पानी भरने से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य
टनल में जहां पानी भर गया है, वहीं दोनों का स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है। हालांकि, अभी तक उनका स्वास्थ्य ठीक बताया जा रहा है। फंसे मजदूरों से माइक्रोफोन से टू वे कम्यूनिकेशन के तहत बातचीत की जा रही है। अपने साथी मजदूरों के अलावा वह और लोगों से भी चरचा कर रहे हैं। भीतर फंसे मजदूर अपने परिवार को लेकर अभी भी चिंतित हैं। अपने भाइयों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने-अपने परिवार के एक-एक सदस्य के बारे में पूछा।
यह भी कहा कि परिवार की किसी महिला से उनकी बात न करवाई जाए। उन्होंने डीसी से भी आग्रह किया कि उन्हें जल्द निकाला जाए। इसके अलावा शनिवार रात को दोनों की बात उनके साथी मजदूरों से हुई। मजदूर से उन्होंने पूछा कि काम बंद क्यों है। हमें कब तक बाहर निकाला जाएगा। वह यह भी पूछ रहे हैं कार्य की प्रोग्रेस कितनी है।
खिचड़ी और ड्राई फ्रूट भेजे
अपने एक साथी से बात करते हुए सतीश ने पूछा कि आज क्या दिन है। मजदूर ने उसे बताया कि आज शनिवार है। जिस पर उसने कहा कि आज फंसे हुए हमें एक सप्ताह हो गया है। डीसी मानसी सहाय ठाकुर ने मणिराम के छोटे भाई मोतीराम तथा सतीश तोमर के बड़े भाई विनोद तोमर से ऑडियो कम्यूनिकेशन के माध्यम से बात करवाई। दोनों ने कुशल होने की बात कही, जबकि मोती राम और विनोद ने दोनों को हौसला रखने को कहा। इस दौरान वह भावुक भी हुए।
मजदूरों को खाने के लिए खिचड़ी भेजी गई। सूत्र बताते हैं कि सुबह दोनों को 200 एमएल की छह बोतलें भेजी गईं। इसके अलावा पानी, कुछ ड्राई फ्रूट्स और ग्लूकोज आदि भेजा गया। उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर ने बताया कि दोनों मजदूरों को जो भी खाद्य सामग्री भेजी जा रही है। वह डाक्टरी परामर्श के बाद ही भेजी जा रही है।