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Shimla News: अश्वनी खड्ड प्रदूषण मामले में एनजीटी ने तलब किए अधिकारी

Mon, 23 Feb 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 11:59 PM IST
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NGT summons officials in Ashwani Khad pollution case
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मुख्य सचिव, जल शक्ति विभाग और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से देना होगा अब जवाब


रिपोर्ट में जल की गुणवत्ता के आंकड़े देने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर की अश्वनी खड्ड प्रदूषण मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को जवाबदेही के दायरे में लिया है।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अब केवल कागजी अनुपालन या विभागीय हलफनामों से काम नहीं चलेगा बल्कि मुख्य सचिव, जल शक्ति विभाग और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से स्थिति स्पष्ट करनी होगी। मामले की सुनवाई अब 22 मई को होगी।
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पीठ ने मुख्य सचिव की 9 फरवरी की स्थिति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए पाया कि उसमें सीवरेज नेटवर्क और एसटीपी संचालन की प्रगति का विवरण तो है लेकिन जल गुणवत्ता में वास्तविक सुधार के आंकड़े नहीं दिए हैं। इस पर अधिकरण ने टिप्पणी की कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दावे तभी स्वीकार किए जाएंगे जब नदी जल की गुणवत्ता में ठोस सुधार के प्रमाण रिकॉर्ड पर रखे जाएं। सुनवाई के दौरान यह भी दर्ज किया गया कि चिह्नित 15 एसटीपी में से एक अब भी गैर-संचालित है। इसके अतिरिक्त कई स्थानों पर सीवरेज नेटवर्क की कनेक्टिविटी लंबित है। अधिकरण ने पूछा कि इन लंबित कार्यों की निगरानी किस स्तर पर हुई और देरी के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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पीठ ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई में मुख्य सचिव, जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना पड़ सकता है। साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्वतंत्र सैंपलिंग कर वास्तविक जल गुणवत्ता रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि प्रस्तुत रिपोर्ट और जमीनी स्थिति में अंतर पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।
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