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एनजीटी की हिमाचल सरकार को फटकार, 4 दिन में मांगा जवाब

Thu, 21 Jan 2016 11:29 PM IST
Updated Thu, 21 Jan 2016 11:29 PM IST
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NGT notice to hp govt, ask report within four days.

हिमाचल प्रदेश सरकार अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि वह मनाली से रोहतांग दर्रा के 51 किमी लंबे पर्यावरण संवेदी क्षेत्र में सीएनजी, इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड तकनीक में किस तरह की बसों को चलाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में इस बाबत सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अपना पक्ष रखने में भी विफल रहे।

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वहीं, ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ ने सरकार को फटकार लगाई कि वह अगले सप्ताह सोमवार को स्पष्ट पक्ष रखें। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि जो भी पक्ष ट्रिब्यूनल के समक्ष रखा जाएगा उसे दर्ज (रिकॉर्ड) किया जाएगा। जस्टिस स्वतंत्र कुमार और जस्टिस एमएस नांबियार की संयुक्त बेंच ने वीरवार को इस मामले पर सुनवाई की।

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एक साल बाद भी नहीं ले पाए फैसला

NGT notice to hp govt, ask report within four days.

सरकार की ओर से पेश वकील के बार-बार पक्ष बदलने के बाद बेंच ने यह टिप्पणी की। राज्य सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण संवेदी क्षेत्र में सीएनजी बसों का ट्रॉयल बेस पर सफल परीक्षण कर चुकी है। हालांकि बाद में सरकार ने सीएनजी के बजाए इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने की इच्छा जाहिर की है।

एक वर्ष से अधिक समय में नहीं ले सके निर्णय
ग्रीन बेंच ने सरकारी वकील से कहा कि आपने एक वर्ष से अधिक का समय यह निर्णय लेने में लगा दिया कि कौन सी बसें रोहतांग दर्रा के लिए उपयुक्त होंगी। आप अपना स्पष्ट पक्ष रखिये कि इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी या फिर सीएनजी। हम भारी उद्योग मंत्रालय से कहेंगे कि वह दो इलेक्ट्रिक बसें राज्य को ट्रॉयल के लिए मुहैया कराए लेकिन... कृपया कुछ कीजिए।

इलेक्ट्रिक बसों का दिया था विकल्प

NGT notice to hp govt, ask report within four days.

बीते वर्ष अगस्त महीने में राज्य सरकार ने ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया था कि सीएनजी बसों के ट्रॉयल स्तर पर सफल संचालन के बाद वह रोहतांग दर्रा के लिए सीएनजी बसों को चलाने पर विचार कर रही है।

वहीं, इसके बाद एनजीटी में चैंबर मीटिंग के दौरान भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कंप्यूटर युक्त प्रस्तुतिकरण के जरिये सरकार को रोहतांग दर्रा में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड बसों के चलाने के विकल्प और संभावनाओं को लेकर भी बताया था। इस खुलासे में भारी उद्योग मंत्रालय ने सरकार को इन बसों पर आने वाली वित्तीय लागत का भी लेखा-जोखा पेश किया था।

मंत्रालय 70 फीसदी फंड देने के लिए तैयार
भारी उद्योग मंत्रालय ने राज्य सरकार के जरिये 25 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के प्रोजेक्ट पर मंजूरी भी दी थी। साथ ही कहा था कि वह इन पर आने वाली कुल लागत का 70 फीसदी से ज्यादा का फंड भी देने को तैयार है। इन 25 बसों को खरीदने पर कुल 50 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

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